बुधवार, 29 जनवरी 2014

To LoVe 2015: जब दादामुनि का गाना किशोर कुमार ने गाया


अनोखी और दिलचस्प जानकारी - [24]
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Fact About The Song : Koyi Hamdam Na Raha ... 

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1936-37 में
बाम्बे टाकीज़ द्वारा निर्मित एवं अशोक कुमार और  देविका रानी के
अभिनय से सजी फ़िल्म- 'जीवन नैया' प्रदर्शित हुयी थी ! फ़िल्म में सरस्वती
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मंगलवार, 28 जनवरी 2014

To LoVe 2015: सूरते-हाल-दिल्ली..AAP की सरकार पास

....लेकिन धरना प्रदर्शन न करो

दिल्ली में फिलहाल AAP की सरकार का मूल्यांकन करना बेहूदगी होगी। महज महीने भर में कोई भी चमत्कार भारत के सिस्टम में नहीं हो सकता। फिर भी AAP ने जो निर्णय अबतक किए हैं वो जनता के हित में हैं। AAP सरकार के बिजली और पानी पर लिए गए फैसले की नकल अब सब कर रहे हैं। मुंबई में हास्यापद तरीके से इसकी नकल कांग्रेसी सांसद संजय निरुपम कर रहे तो हरियाणा में हुड्डा महाराज बिजली के बिल कम कर रहे हैं।
   सत्ता संभाले महीना होने के बाद आरोपो की जोरादार बौछार भी केजरीवाल जी महाराज पर हो रहे हैं। लोग कह रहे हैं कि केजरीवाल और कांग्रेस नूरा कुश्ती कर रहे हैं। वैसे कई बार ये आरोप सच भी लगता है। जैसे चुनाव से पहले केजरीवाल शीला दीक्षित को भ्रष्ट बता रहे थे....औऱ अब इस मुद्दे पर वो सवाल करने वालों से ही सबूत मांग रहे हैं। उधर बीजेपी की हालत खिसयानी बिल्ली खंभा नोचे जैसी है। हाथ आई कुर्सी महज चार सीटों से रह गई। लोकसभा चुनाव चंद महीने दूर है...जिसके कारण जोड़तोड़ करके केजरीवाल की सरकार गिराने से दूर भाग रहे हैं।  
   जमीन पर AAP का असर हो रहा है। कई सरकारी कार्यालयों में बिना रिश्वत के काम होने लगे हैं। कुछ स्थानीय डिस्पेंरियों में डॉक्टर नजर आने लगे हैं। विश्वास होता नहीं है ऐसी बातों पर..लेकिन हकीकत यही है। स्थानीय डिस्पेंसरियों में डॉक्टर हैं....मशीनें काम कर रहीं हैं। वैसे ये उन डिस्पेंसिरियों कि रिपोर्ट है जहां AAP के विधायक अपने इलाके में गश्त पर रहते हैं। 400 यूनिट तक के बिजली बिल में छूट से अधिकांश लोग खुश हैं। हां मेनिफेस्टो में किए गए वादों के हिसाब से ये छूट कम है।
   इस एक महीने में केजरीवाल को दो मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। जिसमें पहली और सबसे बड़ी मुश्किल है उनके आपसपास अतिउत्साहित और धैर्यहीन लोगो का जमावड़ा। दिल्ली के कानून मंत्री सोमनाथ भारती महिला आयोग के नोटिस की धज्जियां उड़ाते हैं। उनके पास पतंग उड़ाने का टाइम होता है..लेकिन महिला आयोग के सामने पेश होने का टाइम नहीं है। दूसरी तरफ AAP पार्टी में मौजूद पूर्व राजनीतिक खिलाड़ी दांव-पेंच चल रहे हैं। पार्टी के पहले से ही राजनेता रहे एकमात्र विधायक बिन्नी विद्रोह कर चुके हैं। नतीजतन पार्टी से उनको निकाला जा चुका है। यानि राजनीति के पुराने खिलाड़ी केजरीवाल जी की पार्टी में उठा-पठक मचा रहे हैं।
   केजरीवाल जी कि दूसरी मुसीबत है प्रशासन में कॉन्ट्रेक्ट पर लगे लोग। सरकार बने जुम्मा-जुम्मा चार दिन हुए है...पर कॉन्ट्रेक्ट पर लगे हर महकमे के कर्मचारी धरना दे चुके हैं। ये सभी केजरीवालजी के मुख्यमंत्री बनने के दूसरे दिन ही उनके गाजियाबाद वाले घर के बाहर प्रर्दशन करने पहुंच गए थे। लानत है ऐसे प्रर्दशन करने वालों पर। वैसे इन प्रर्दशनों के पीछे विरोधी दलों का हाथ हो...तो कोई हैरानी नहीं होनी चाहिए।
    कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि महीने भर में केजरीवाल सरकार ने कुछ ऐसे काम किए हैं जिससे जनता को फायदा हो रहा है। फिलहाल जनता इससे ज्यादा कुछ मांग भी नहीं रही औऱ उन्हें पूरा समय देने के मूड में है। वैसे भी दिल्ली की जनता पढ़ी-लिखी है। अब तक के रिकॉर्ड को देखते हुए यहां कि जनता AAP की सरकार को 10 में से 8 नंबर देकर पास कर चुकी है। जो 2 नंबर कटे हैं उसका कारण धरने की राजनीति से लोगो को हुई परेशानी है। यानि आप कह सकते हैं कि केजरीवाल एंड कंपनी की सरकार का अब तक का प्रर्दशन उम्दा है।
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शुक्रवार, 24 जनवरी 2014

To LoVe 2015: केजरीवाल की काली करतूत ...

आवश्यक सूचना : मित्रों इस लेख को लिखने में मुझे काफी मशक्कत करनी पड़ी है। दरअसल मैं चाहता था कि कहानी सच के करीब हो, इसलिए दिल्ली के मुख्यमंत्री ने आंदोलन के दौरान जिस भाषा का इस्तेमाल किया, मैं भी उसी भाषा में बात करना चाहता हूं... क्या हुआ आप नहीं समझे.. मतलब बेहूदी भाषा में बात करना है। दोस्तों पूरी कोशिश तो की है कि जिस सड़क छाप, लंपटी भाषा में दिल्ली का मुख्यमंत्री केजरीवाल देश के गृहमंत्री और लेफ्टिनेंट गर्वनर से संवाद कर रहा था, मेरी भाषा भी वैसी ही हो.. इसके लिए मैने भाषा की मर्यादा को पूरी तरह ताख पर रख दिया है.. फिर भी गलती से अगर कहीं मैं मर्यादित हो गया हूं.. तो प्लीज इसे पारिवारिक संस्कार समझ कर माफ कर दीजिएगा। मेरी मंशा सम्मान देने की बिल्कुल नहीं है। 

च बताऊं, अब बिल्कुल मन नहीं होता कि आम आदमी पार्टी और उसके नेता अरविंद केजरीवाल के बारे में कुछ लिखा जाए ! वजह इसकी बद्जुबानी, बेहूदा आचरण और घटिया राजनीति है। वैसे मैं भाषा के स्तर पर बेईमान नहीं होना चाहता था, मेरी कोशिश भी रहती है कि आलोचना मर्यादा में रहकर ही की जानी चाहिए, लेकिन इस बेलगाम मुख्यमंत्री ने मजबूर कर दिया है, इसलिए उससे उसकी ही भाषा में बात करना जरूरी है। बात आगे करूं, इससे पहले मुख्यमंत्री की बेहूदगी का एक प्रसंग सुन लीजिए। रेलभवन के सामने उसके धरने को 28 घंटे से ज्यादा समय हो गया था, दिल्ली में अफरा-तफरी मची हुई थी, राजपथ के साथ ही एक दर्जन से ज्यादा सड़कों को बंद कर दिया गया था, चार महत्वपूर्ण मेट्रो स्टेशन भी बंद थे। इन हालातों को देखते हुए एक संवेदनशील पत्रकार ने मुख्यमंत्री से सवाल पूछ लिया कि " अरविंद केंद्र सरकार के साथ गतिरोध को खत्म करने के लिए क्या कोई बीच का रास्ता हो सकता है ? इस पर मुख्यमंत्री ने बहुत ही गंदा या यूं कहूं कि  बेहूदा और बचकाना जवाब दिया, तो गलत नहीं होगा। उसने कुतर्क करते हुए कहाकि बीच का रास्ता क्या होता है ?  मतलब महिला से पूरा नहीं आधा बलात्कार किया जाए ? 50 महिलाएं हैं तो 25 से रेप करो, ये बीच का रास्ता है ? अब आप ही बताएं, जब ऐसा बदजुबान मुख्यमंत्री  महिलाओं के सम्मान की बात करता है, तो कोई भला क्या भरोसा करेगा ऐसे मुख्यमंत्री पर... ऐसे  मुख्यमंत्री से तो बदबू आती है। वैसे अरविंद मैं बताता  हूं कि बीच का रास्ता क्या होता है ? बीच का रास्ता यही होता है जो तुमने किया ... तुम तो  दरोगा को ट्रांसफर करने की मांग कर रहे थे और गृहमंत्रालय ने पुलिस वालों से कहाकि वो कुछ दिन की छुट्टी पर चले जाएं। बस इतने से तुम्हारा इगो शांत हो गया और जीत का जश्न मनाते हुए तुम अपने गैंग के साथ चले भी गए। इसे ही कहते हैं बीच का रास्ता ! समझ गए ना ! और पत्रकार ने यही बात तुमसे जानने की कोशिश की थी।

हां वैसे इस मुख्यमंत्री की एक बात से तो मैं पूरी तरह सहमत हूं,  वो ये कि दिल्ली पुलिस लोगों में भेदभाव करती है। बड़े लोगों के लिए उसका कानून कुछ है और छोटे लोगों के लिए कानून कुछ और ही है। दिल्ली का मुख्यमंत्री कहता है दिल्ली पुलिस बेईमान है, मैं भी मानता हूं कि वो आम आदमी और खास आदमी के बीच फर्क करती है, इसलिए दिल्ली की पुलिस बेईमान है। अगर दिल्ली पुलिस ईमानदार होती तो दिल्ली में धारा 144 को तोड़ने वालों की सुरक्षा नहीं करती,  इन सबको तबियत से कूट कर अस्पताल पहुंचा चुकी होती ! मुख्यमंत्री जी वाकई दिल्ली पुलिस बेईमान है, तभी तो 38 घंटे से ज्यादा समय तक तुम्हारी गुंडई रेल भवन के सामने चलती रही, और कानून बौना बना रहा। ईमानदारी से सोचो,  अगर मुख्यमंत्री की जगह कोई आम व्यक्ति इस तरह सरेआम दिल्ली की सड़क पर गुंडागर्दी कर रहा होता तो क्या ये पुलिस इसी तरह बर्दास्त कर रही होती ? फिर क्या पुलिस वालों के सिर पर पत्थर पड़ रहे होते और ये पुलिस यूं ही मूकदर्शक बनी रहती ? सब को पता है कि सड़क पर ये गुंडई मुख्यमंत्री की अगुवाई में चल रही थी, बेईमान पुलिस ने रिपोर्ट में मुख्यमंत्री का नाम ना लिखकर भीड़ के नाम से रिपोर्ट दर्ज किया। सच है केजरीवाल.. दिल्ली की पुलिस वाकई बेईमान है। मेरा मानना है कि दिल्ली की पुलिस और गृह मंत्रालय में थोड़ी भी ईमानदारी होती तो सभी मंत्रियों के साथ तुम जेल में होते और गुंडागर्दी पर उतारू टोपी वाले अस्पताल में पड़े कराह रहे होते।

मैं जानना चाहता हूं कि दिल्ली को तुम लोग क्या बनाना चाहते हो, जिस तरह से सड़कों पर खुले आम नंगा नाच चल रहा है उससे क्या साबित करना चाहते हो ? पहले तो तुम लोग बात करते थे पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के भ्रष्टाचार की, बात करते थे सोनया गांधी के दामाद राबर्ट वाड्रा के बेईमानी की, बात करते थे बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष नीतिन गडकरी के बेईमानी की,  उद्योगपति मुकेश अंबानी के गड़बडियों की.. अब कुर्सी पर आते ही सब एजेंडा भूल गए। बात करने लगे गली मुहल्ले की.. शपथ लेने के बाद तीन मंत्रियों ने न्यूज चैनल के रिपोर्टरों के साथ बस तीन रात  दौरा किया। एक ने आदेश दे दिया कि 48 घंटे के भीतर 45 रैन बसेरा बनाया जाए। वो अफसरों को कैमरे वालों के सामने फर्जी फोन कर अपना नंबर भी बढ़ाता रहा। हालत ये है कि इस बार ठंड से अब तक 187 लोगों की मौत हो चुकी है और सरकार सड़क पर गुंडागर्दी कर रही है। एक महिला मंत्री शाम को निकली, क्रिकेट खेल रहे एक बच्चे की गेंद से उसकी कार का शीशा टूट गया, इसने तमाम लोगों की भीड़ जमा कर ली और पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करा दी कि उस पर हमला किया गया है। बेचारा पूरा परिवार छिपा-छिपा फिर रहा था, कई दिन बाद सुलह सपाटा हो पाया। तीसरा मंत्री रात में दिल्ली के एक मुहल्ले में पहुंचा और पुलिस से कहने लगा कि मकान में छापेमारी करो, वहां विदेशी महिलाएं धंधा कराती हैं। पुलिस ने कहाकि छापेमारी के लिए उनके साथ महिला पुलिस का होना जरूरी है, तो ये मंत्री हत्थे से उखड़ गया और अपने नेता की तरह ही बदजुबान हो गया। जब पुलिस ने भी अपना असली रूप दिखाया तो फिर तो मंत्री की शिट्टी पिट्टी गुम हो गई। बाद में कुछ असामाजिक तत्वों के साथ खुद ही मकान में छापेमारी कर युंगाडा की पांच महिलाओं को कार में बैठा कर उन्हें एम्स ले गया और उनका मेडिकल टेस्ट कराया, हालांकि टेस्ट में कुछ नहीं निकला। महिलाओं ने आरोप लगाया है कि रात में उनके साथ मंत्री और उनके साथ वालों ने छेड़छाड़ की। कोर्ट के आदेश पर मंत्री के खिलाफ मामला दर्ज हो चुका है, फैसला आ जाएगा।

अब इस ईमानदार मुख्यमंत्री का चरित्र देखिए। पुलिस वालों पर आरोप है कि उसने मंत्री की बात नहीं सुनीं, जबकि ये आरोप उसके मंत्री ने ही लगाया है। मुख्यमंत्री ने तुरंत इन पुलिसकर्मियों की सजा तय कर दी और कहाकि इन्हें निलंबित किया जाए। गृहमंत्री और लेफ्टिनेंट गवर्नर जनरल ने उसे समझाने की कोशिश की.. और कहाकि जांच के आदेश किए गए हैं, रिपोर्ट आ जाने की दो, जरूर कार्रवाई होगी। लेकिन अपने बिगड़ैल मंत्री की बात को प्रतिष्ठा का प्रश्न बनाकर केजरीवाल ने ऐलान कर दिया कि वो गृहमंत्रालय के सामने धरना देगा। चूंकि गणतंत्र दिवस परेड की तीन महीने पहले से तैयारी शुरू हो जाती है, धरने से तैयारियों में मुश्किल होगी, ये सोचकर स्थानीय प्रशासन ने धारा 144 लगाया, लेकिन इस बेलगाम मुख्यमंत्री ने कानून की धज्जियां उड़ाते हुए संसद भवन के करीब रेल भवन के सामने अपने गुर्गों के साथ धरने पर बैठ गया। बात पुलिस वालों के निलंबन से शुरू किया और आखिर में तबादले तक आ गया, लेकिन दिल्ली वालों का बढ़ता गुस्सा देख पीछे खिसक गया और उन पुलिस वालों के कुछ दिन के लिए छुट्टी पर चले जाने से धरना खत्म करने को तैयार हो गया। खैर अब दिल्ली की जनता कह रही है कि मुख्यमंत्री साहेब तुम्हें तो जांच पड़ताल से कोई मतलब नहीं है, अगर आरोप लगने के बाद तुमने पुलिस वालों का निलंबन मांग लिया तो अब तो तुम्हें अपने कानून मंत्री को भी तुरंत बर्खास्त कर देना चाहिए। इस पर जो आरोप है वो पुलिस वालों से कहीं ज्यादा गंभीर है। मंत्री पर विदेशी महिलाओं के साथ छेड़छाड़ और अभद्रता करने का आरोप है। उन विदेशी महिलाओं को आधी रात में जबर्दस्ती उठाकर एम्स ले जाया गया। कोर्ट के आदेश पर मंत्री के खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज हो गई। अब केजरीवाल को इस आरोपी मंत्री की छुट्टी करने में क्यों तकलीफ हो रही है ? अगर पुलिस वालों को बिना जांच के ही कार्रवाई करने की बात दिल्ली का मुख्यमंत्री कर रहा था तो अपने मंत्री के खिलाफ कार्रवाई करने में जांच की आड क्यों ले रहा है ?

खैर नए नए मंत्री बने थे, पूरा मंत्रिमंडल बेलगाम हो गया था। खासतौर पर केजरीवाल की तो भाषा बदल चुकी है। राजनीति में जिस भाषा की शुरुआत केजरीवाल ने की, कांग्रेसी उससे एक कदम और आगे निकल गए। गृहमंत्री दिल्ली के मुख्यमंत्री को " येडा मुख्यमंत्री " कह रहे हैं। खैर राजनीति में ये नई विधा की शुरुआत हो रही है, जिसका संस्थापक केजरीवाल ही रहेगा। आखिर में मैं चेतन भगत की बात का जिक्र जरूर करूंगा। मैं उनकी बातों से सहमत हूं। उन्होने दिल्ली की राजनीति को आसान शब्दों में समझाने के लिए एक उदाहरण दिया। कहा कि बाँलीवुड में लड़कियां आती हैं और सिनेमा में हीरोइन का अभिनय कर खूब नाम कराती हैं। लेकिन जब उनकी फिल्म नहीं चलती है तो वो फिल्म तड़का डालने की कोशिश में आइटम गर्ल बन जाती हैं। ठीक उसी तरह दिल्ली की राजनीति हो गई है और अब केजरीवाल अपनी फिल्म को चलाने के लिे आइटम को तड़का देने में लगा है। बहुत बुरा समय आ गया है केजरीवाल ! जय हो ...


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To LoVe 2015: जब भारत के देश-भक्ति गीतों को पाकिस्तान ने चुराया



[अनोखी और दिलचस्प जानकारी - 23]

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वर्ष 1954 में देश भक्ति की भावना को जगाती फ़िल्म 'जागृति' प्रदर्शित हुयी थी ! वस्तुतः यह 1949 में सत्येन बोस द्वारा निर्देशित बांगला फ़िल्म 'परिबर्तन' पर आधारित थी !
अभि भट्टाचार्य, प्रणोति घोष, कनु राय, महमूद इत्यादि के अभिनय से
सुसज्जित फ़िल्म 'जागृति' जब रिलीज हुयी तो सर्वत्र सराही गयी ! इस फ़िल्म के
सभी/a>
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सोमवार, 20 जनवरी 2014

To LoVe 2015: संगीतकार रवि के गाये फ़िल्मी गाने



अनोखी और दिलचस्प जानकारी - 22

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Musician Ravi As a Singer

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जन्म : 3 मार्च 1926 /// मृत्यु : 7 मार्च 2012


अगर फ़िल्म जगत के सर्वाधिक सफल गीतों के सृजन की बात हो तो संगीतकार रवि जी का नाम सबसे पहले लिया जाएगा ! कहानी की सिचुएशन और गीत के मुताबिक़ धुनें तैयार करने/a>
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गुरुवार, 16 जनवरी 2014

To LoVe 2015: गायिका सुधा मल्होत्रा : [गायकों का पहला / आखिरी गाना- 13]


गायकों का पहला / आखिरी गाना- 13


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Sudha Malhotra : First / Last Song

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हिंदी
फिल्मों की गायिका सुधा मल्होत्रा 30 नवम्बर,1936 को दिल्ली में पैदा हुई
! रेडिओ लाहौर में एक बाल कलाकार [गायिका] के रूप में काम शुरू किया ! 6
साल की उम्र में कानन /a>
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बुधवार, 15 जनवरी 2014

To LoVe 2015: कमाल-BlogAdda के अवार्ड लिस्ट में मेरा भी ब्लॉग Wow Wow

कमाल है कि खुशदीप जी के साथ ही मुझे भी आज ब्लॉग अड्डा वालों की ओर ये मेल मिला है-यानि ब्लॉग अड्डा अवार्डस की लिस्ट में मेरा ब्लॉग भी अवार्ड के लिए शॉर्टलिस्ट हो गया है। वाह वाह..

मेरा ब्लॉग भी हिंदी वाले हिस्से में शॉर्टलिस्टेड हुआ है। आप यहां जाकर वोट कर सकते हैं।   http://win.blogadda.com/awards .या फिर ..http://win.blogadda.com/view-blogs-voting/hindi/boletobindas/ 
वोट करें.
 
BlogaAdda की तरफ से जो मेल मुझे मिला वो यहां हैं...



Dear rohitash kumar,
We hope you are doing well! We're sure to keep that smile pasted on your face with what we've got to tell you!

We are drafting this mail with a lot of happiness! Congratulations! Your blog has been shortlisted by our jury as one of the top blogs in India for the BlogAdda Blog Awards!
 
You are as close as possible to the finish line and at such a stage, you don't want to let it go, do you? 

For the last leap we want the community to like, tweet, comment and tell us who their favourite is! Have a look at all the top blogs, 'Like & Tweet' to encourage and increase your favourite blog's chance of winning!

Every vote is ought to make a difference, for your blog to reach the top 3! Tell your family and friends to spread the word! Visit http://win.blogadda.com/awards now to 'Like' & 'Tweet' your favorite blogs!

May The Best Blogs Win!

Do let us know if you have any further queries and we will be glad to assist you.

Thanks,
Best Regards,
Team @ BlogAdda.com



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रविवार, 12 जनवरी 2014

To LoVe 2015: Ariel Sharon-अलविदा भारत के मित्र


आठ साल कोमा में रहने के बाद इजराइल के पूर्व प्रधानमंत्री एरियल शैरोन का निधन हो गया...कहते हैं कि मरने के बाद इंसान की बुराई नहीं की जाती, मगर शैरोन की मौत के बाद अखबारों की हेडलाइन ने उन्हें कसाई औऱ जाने क्या-क्या लिखा..हैरत है कि ऐसा भारतीय अखबारों में भी पढ़ने को मिला.(butcher-of-beirut) जबकि शैरोन भारत के मित्र थे। उन्हीं के दौर में भारत औऱ इजराइल के रिश्ते सामान्य हुए थे। वो पहले इजराइली प्रधानमंत्री थे जिन्होंने भारत का दौरा किया था। जाहिर है ऐसे नेता का मूल्याकंन भारत के साथ उनके संदर्भ को देखते हुए करना चाहिए, न कि इजराइल के दुश्मन देश के नजरिए से। ये अलग बात है कि हमारा राजनैतिक नेतृत्व शैरोन के दुश्मन देश फिलिस्तीन का समर्थक था।
  शैरोन की मौत के साथ ही मुझे आठ-नौ साल पुरानी वो बात याद आ गई जब फिलिस्तीन और इजराइल से संबंधित खबरों में हमेशा मेरी दिलचस्पी रहती थी। मुख्य कारण यराफात थे जो हमारे देश की बेहद इज्जत करते थे। उन दिनों यराफात से समझौते के बाद मेरी नजरों में शैरोन की इज्जत ज्यादा बढ़ गई थी। आखिर एक सैनिक यौद्धा ने शांति की राह पर चलने का फैसला किया था। मैंने तब एक रिपोर्ट में शंका जताई थी कि अगर समझौते का पालन नहीं होगा तो शैरोन अपने पुराने रुख पर लौटने को मजबूर हो सकते है....पर शायद उपरवाले को ये मंजूर नहीं था। पहले संदिग्ध परिस्थितयों में यराफात दुनिया से कूच कर गए फिर शैरोन कोमा में चले गए।
   बचपन से यासिर यराफात की छवि हमारे मन में भारत के मित्र की थी। इंदिरा गांधी को वो बहन कहते थे। ये भी हकीकत है कि राजीव गांधी को उन्होंने पहले ही आगाह कर दिया था कि कुछ ताकतें उनकी जान लेना चाहती हैं। इसको लेकर अराफात इतने चिंतित थे कि जब उन्होंने खबरों में राजीव गांधी को सुरक्षा की परवाह किए बगैर चुनाव प्रचार करते देखा था तो विचलित हो गए थे। उन्होंने उसी वक्त किसी तरह राजीव गांधी से संपर्क करके उन्हें सुरक्षा में रहने को कहा था। खबरों के मुताबिक अराफात जब राजीव गांधी के अंतिम संस्कार में भारत आए तो उन्होंने राजीव हत्या की जांच में मदद की पेशकश भी की थी। लेकिन उसका क्या हुआ पता नहीं।
  हो सकता है कि मानवता की विशाल कसौटी पर शैरोन माफ नहीं किए जाएं..लेकिन इजराइल के लिए जो उन्होंने किया वो कोई भी राजनेता करता। हमारे देश के नजरिए से शैरोन एक मित्र थे। इसलिए एक मित्र देश के मित्र नेता के जाने पर हमें दुख होना चाहिएउनकी मौत पर बेरुत का हत्यारा जैसे शब्दों से अखबारों को परहेज करना चाहिए था। मेरी नजर में एरियल शैरोन का मूल्याकंन भारत के संदर्भ में है, औऱ इसी नजरिए से मैं भगवान से प्रार्थना करुंगा कि वो भारत के मित्र शैरोन की आत्मा को शांति प्रदान करे।
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बुधवार, 8 जनवरी 2014

To LoVe 2015: कभी बेक़सी ने मारा, कभी बेबसी ने मारा : [Copied or Inspired Song]



Copied or Inspired By Other Song [26]

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आज हम जिस 'कॉपीड सांग' की बात कर रहे हैं, वो मेरा पसंदीदा गाना है ! अचानक ही जब इस गाने की असलियत सामने आयी तो यकीन ही नहीं हुआ कि ये तो एक पाकिस्तानी फ़िल्म के गाने की नक़ल है और दिलचस्प बात ये भी है कि न सिर्फ गाना बल्कि फ़िल्म का पूरा 'सीन' ही उड़ा लिया गया ! 

1985 में प्रदर्शित फ़िल्म- 'अलग अलग/a>
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मंगलवार, 7 जनवरी 2014

To LoVe 2015: फिल्मी पैरोडी गीत : [विषय आधारित गाने]


विषय आधारित फ़िल्मी गाने - 8
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Complete List of 
Films Parody Songs 

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Please Note -------------------

Titles of all the songs are hyperlinked with YouTube links.If you want  to see related video song, Just click on them.We have done this for your convenience. Hope you appreciate our/a>
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सोमवार, 6 जनवरी 2014

To LoVe 2015: "आप" मुझे दिल्ली ही रहने दें .. प्लीज !

रोजाना कुछ ऐसी बातें होती हैं कि खुद को रोक नहीं पाता और चला आता हूं आप सबकी अदालत में एक नई जानकारी के साथ। कुछ मित्रों की सलाह थी कि कुछ दिन केजरीवाल साहब को काम करने दीजिए, फिर उनकी समीक्षा की जाएगी। मैने सोचा बात भी सही  है, मौका तो मिलना ही चाहिए। लेकिन रोज कुछ ना कुछ ऐसा हो रहा है, जिससे मजबूर होकर इनके बारे में लिखना जरूरी हो जाता है। अब देखिए ...."आप "के मंत्री रात को रैन बसेरा की हालत देखने जाने के पहले  इलेक्ट्रानिक मीडिया के दफ्तर में फोन करते हैं। पूछते हैं कि नाइट शिफ्ट का रिपोर्टर आफिस आ गया है क्या ? जब आफिस से बताया जाता है कि हां आ गया है, तो कहा जाता है कि उसे भेज दीजिए, मैं रैन बसेरा देखने जा रहा हूं। आफिस से जवाब मिलता है कि नहीं आज तो रिपोर्टर कहीं और बिजी है, तो बताया जाता है कि आज तो जरूर भेज दीजिए, क्योंकि एक्सक्लूसिव खबर मिलेगी ! जब मंत्री एक्सक्लूसिव खबर की बात करें तो तमाम चैनलों के रिपोर्टर मौके  पर पहुंच ही जाते हैं। रिपोर्टरों के मौके पर आ जाने के बाद मंत्री का चेला मंत्री को बताता है कि आ जाइये,  रिपोर्टर पहुंच गए हैं। थोड़ी देर में ही मंत्री पहुंच जाते हैं और रिपोर्टर से पूछते हैं कि आप सबका कैमरा चालू हो गया है, शुरू करूं मौके मुआयना। रिपोर्टर कहते हैं हां सर ! हम सब रेडी हैं।

अब " आप "के मंत्री जी रैन बसेरा के अंदर जाते हैं, यहां लोगों की हालत देखते हैं और लोगों से उनकी तकलीफ सुनते हैं। 15 मिनट बाद जब मंत्री जी वापस लौटने के लिए निकलने लगते हैं तो एक रिपोर्टर कहता है,  सर मजा नहीं आया। ये तो आप कल भी कर चुके थे, मुझे तो लगता नहीं कि चैनल पर आज दोबारा ये कहानी चल पाएगी,  क्योंकि इसमें कुछ नया तो है नहीं। रिपोर्टर सलाह देते हैं कि खबर चलवानी है तो ... चलिए किसी अफसर के घर और उन्हें रात में ही जगाकर कैमरे के सामने डांटिए..। मंत्री मुस्कुराने लगते हैं, रिपोर्टरों से कहते हैं ..नहीं ...नहीं.. , ज्यादा हो जाएगा। फिर रिपोर्टर सलाह देते हैं कि अच्छा अफसर को फोन मिला लीजिए और उसे जोर-जोर डांटिए । हम लोग यही शूट कर लेते हैं।

बेचारे मंत्री जी अब फंस गए, उन्होंने कहा कि इतनी रात में अफसर को फोन मिलाना ठीक नहीं है। तब एक बड़े चैनल के रिपोर्टर ने सलाह दी, अरे सर ..चलिए फोन मिलाइये मत, बस मोबाइल को कान के पास लगाकर डांट - डपट कर दीजिए। कैमरे पर ये थोड़ी दिखाई पड़ेगा कि बात किससे हो रही है। मंत्री जी ये करने के लिए तत्काल तैयार हो गए। मंत्री ने कहा चलिए जी,  कैमरा चालू कीजिए, हम अभी फोन पर अफसरों को गरम करते है। एक मिनट में मंत्री ने मूड बनाया और फिर एक सांस मे लगे अफसर को डांटने। पूरा ड्रामा मंत्री ने इतनी सफाई से की कि बेचारे रिपोर्टर भी बीच में कुछ बोल नहीं पाए। जब मंत्री की बात खत्म हो गई, तब एक कैमरामैन अपने रिपोर्टर से बोला, भाई कुछ भी रिकार्ड नहीं हुआ है,  मंत्री जी अंधेरे में ही चालू हो गए।

तब सभी रिपोर्टरों ने एक साथ मंत्री से कहा  " सर.. बहुत बढिया था, बस इसी मूड में एक बार और करना होगा, क्योंकि जहां आप खड़े थे.. वहां लाइट कम थी, आप का चेहरा बड़ा काला काला आया है, चेहरे पर गुस्सा दिखाई भी नहीं दे रहा है। मंत्री ने पूछा फिर क्या करें ? कुछ नहीं बस अब आपको वहां खड़ा करते हैं, जहां थोड़ी लाइट होगी, इससे आपका चेहरा चमकता हुआ आएगा और लाइट में चेहरे पर  गुस्सा भी साफ दिखाई देगा। बस फिर क्या, मंत्री जी ने दोबारा फोन पर अफसर को डांट लगा दी । चलते-चलते सब से पूछ लिया अब ठीक है ना, कोई दिक्कत तो नहीं। रिपोर्टरों की तरफ से आवाज आई, नहीं सर, अब बिल्कुल ठीक है। चलिए आप लोग भी जाइए आराम कीजिए, हम भी जा रहे हैं आराम करने।


रैन बसेरों के औचक निरीक्षण का यही असली चेहरा है, वरना सप्ताह भर पहले मंत्री ने कहाकि 48 घंटे के भीतर दिल्ली मे 45 रैन बसेरा बनकर तैयार हो जाना चाहिए। अगर तैयार नहीं हुआ तो अफसरों की खैर नहीं। अब क्या बताए यहां 48 घंटा नहीं 148 घंटा बीत गया है, लेकिन दिल्ली में कोई नया रैन बसेरा नहीं बनाया गया। मैं जानना चाहता हूं कि जो मंत्री रात मे मोबाइल पर  अफसरों को गरम करते हुए खुद को शूट करा रहे थे, क्या कोई जवाब है उनके पास ? मंत्री जी बताएंगे कि किस अफसर के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई ? दरअसल सच्चाई ये है कि इस समय दिल्ली में बहुत ही टुच्ची राजनीति चल रही है। कहा जा रहा है मंत्री लाल बत्ती नहीं लेगें। अरे भाई लाल बत्ती लोगे तो आम आदमी का क्या नुकसान हो जाएगा और नहीं लेने से उसे क्या फायदा हो जाएगा। पगलाई इलेक्ट्रानिक मीडिया भी पूरे दिन इसी पर चर्चा कर रही है। बात मंत्रियों की सुरक्षा की होने लगती है, कुल मिलाकर छह तो मंत्री है, वो सुरक्षा नहीं लेगें, इससे आम आदमी पर क्या फर्क पडने वाला है। हम कुछ नहीं कहेंगे, आप सुरक्षा भी लीजिए, गाड़ी भी लीजिए, बत्ती भी लीजिए, बंगला भी लीजिए.. मसलन मंत्री के तौर पर जो सुविधा मिलती है, सब ले लीजिए, लेकिन दिल्ली के लिए कुछ काम कीजिए।  हल्के बयानों से कुछ नहीं होने वाला है, ये दिल्ली है, प्लीज इसे दिल्ली ही रहने दीजिए।

यहां बात वो होनी चाहिए जिससे आम आदमी की मुश्किलें आसान हो, लेकिन आज बात वो  की जा रही है, जिससे आम जनता खुश हो और ताली बजाए। ठीक उसी तरह जैसे रामलीला के दौरान जोकर के आने पर लोग ताली बजाते हैं। दिल्ली की आज सच्चाई ये है कि अगर पब्लिक ट्रांसपोर्ट की ही चर्चा कर लें, तो इस समय आँटो वाले बेलगाम हो गए हैं। मनमानी किराया तो आम बात रही है, अब वो सवारी के साथ बेहूदगी भी करने लगे हैं। मसला क्या है, बस आम आदमी की सरकार है, लिहाजा अब वो कुछ भी करने को आजाद हैं, उनका कोई कुछ नहीं कर सकता। ये मैसेज है आज दिल्ली में। खैर धीऱे धीरे ही सही, लेकिन सब कुछ अब सामने आने लगा है।




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रविवार, 5 जनवरी 2014

To LoVe 2015: बाजे पायल छुन छुन होके बेकरार : [Copied or Inspired Song]



Copied or Inspired By Other Song [25]
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फ़िल्म- 'छलिया' (1974) में एक बहुत ही मधुर गाना था - 'बाजे पायल छुन छुन होके बेकरार', जो कि संगीतकार कल्याणजी आनंदजी द्वारा संगीतबद्ध एवं गीतकार कमर जलालाबादी द्वारा लिखा गया था और लता मंगेशकर ने अपनी आवाज़ से इस गाने को दिलकश बनाया था ! दरअसल ये गाना हॉलीवुड के गायक/संगीतकार 'रोनॉल्ड गुडविन' /a>
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शनिवार, 4 जनवरी 2014

To LoVe 2015: WELCOME 2014...खुशियां बांटते चलो

नए साल के पहले वीकेंड की रात को आप सभी को नए साल की शुभकामनाएं....वैसे ये सब आप तो जानते ही हैं कि मैं देर करता नहीं ..देर हो जाती है। इस बार मैं नए साल का स्वागत ऑफिस में कर रहा था। लगभग 5-6 साल बाद मेरा नया साल ऑफिस में बीत रहा था...वैसे 21 वीं सदी की शुरुआत अपन ने ऑफिस में ही की थी...कहते हैं कि जो पहले दिन किया जाए तो वो साल भर होता है...औऱ हमने तो सदी की शुरुआत ही ऑफिस से की थी। खैर इस बार मैं दुनिया भर में हो रहे नए साल के स्वागत की खबर देने के साथ-साथ देख भी रहा था। न्यूजीलैंड से लेकर भारत तक घड़ी की सूईयां जैसे-जैसे 12 बजाती गई हर जगह haapy new year का शोर मचता रहा....पांच सितारा होटलों से लेकर क्लबों में जहां एक तरफ कमसिन जवानियां अंगड़ाई ले-लेकर जलवा बिखरेती रहीं...तो दूसरी तरफ दुनिया भर के लोग अपने-अपने शहरों के सबसे happening place यानि शहर के दिल में जमा होकर ठंड को अपने जोश से धता बताते रहे...जहां जहां दिल में उमंग थी वहां-वहां हंसी खुशी लोग बांटते रहे।
         
  नए साल की शुरुआत के बाद अपने साथ ऑफिस की कैब में लौटते लोगो के चेहरे पर खुशी थी...पर एक शख्स के मुंह से निकल गया  "यार अपन तो ऐसी तैसी कराकर लौट रहे हैं"...तो दूसरे साथी के मुंह से निकला ""देखो दुनिया मजे ले रही है औऱ हम ऑफिस से लौट रहे हैं।"" ये सुनते ही मुझे लगा कि क्यों न इन लोगो को खुशी की एक छोटी सी डोज दी जाए। बस अपन ने तय कर लिया कि इंडिया गेट के आसपास आइसक्रीम खाई जाएगी। इंडिया गेट के पास के रास्ते पर आइसक्रीम वाला दिखते ही हमने गाड़ी रुकवाई औऱ हल्ला-गुल्ला करते हुए टूट पड़े आइसक्रीम पर। कड़कड़ाती ठंड के बावजूद किसी ने भी आइसक्रीम खाने से इनकार नहीं किया। कोई दस मिनट रुक कर, फोटो खिंचवा कर हमने कैब कनॉट प्लैस की तरफ मुड़वा दी...वहां की रंगत देखकर हमारे दिल ने कहा क्यों न यहां भी फोटो सेशन किया जाए..परंतु हम में से एक शख्स के दिल में उमंग पूरी तरह से लौटी नहीं थी। इसिलए गाड़ी को वहां नहीं रुकवाया गया। जब मैं अपने घर के पास तिलक नगर पहुंचा, तो देखा कि यहां रात दो बजे भी नए साल की रंगत मौजदू थी। ये देखकर मेरे चेहरे की रंगत दोगुनी हो गई। 
   अगले दिन यानि एक जनवरी को फिर सब लोग   ऑफिस में मौजूद थे...शाम को रात की टोली के एक शख्स ने कहा कि रात आइसक्रीम खाकर मजा आ गया औऱ फोटो देखकर पता लगा कि हम लोग नए साल में दुखी नहीं थे। (मैने फोटो को Facebook पर शेयर करते हुए लिख दिया था कि ये गैंग है हिंदुस्तान के उन लोगो का जो देश की होप हैं.मेरी तरह अनेक लोग काम करते हैं ..त्यौहार पर भी औऱ नए साल पर भी ) यही बात जब रात के उदास लोगो ने भी  कही..तो उसे सुनकर अपन हल्के से मुस्कुरा दिए। आखिर अपन की एक छोटी सी कोशिश से नए साल के स्वागत के लम्हों में कुछ साथियों के चेहरे पर चंद लम्हों के लिए ही सही...खुशी तो आई। 
    
   ये ठीक है कि नए साल की रात में कनॉट प्लेस की गलियों में कई लोग रतजगा करते हैं क्योंकि उनके पास ठंड से बचने के साधन के नाम पर सिर्फ अलाव होता है। वहां से कुछ ही दूर रेलवे स्टेशन के पास भी गरीब लोग सड़क किनारे ठंड से जूझते हुए मिल जाते हैं....मगर इससे दिल छोटा करके खुशी को दुख में नहीं बदलना चाहिए। उल्टा अपने दिल की खुशी को अपनी ताकत बनाते हुए छोटी सी ऐसी कोई कोशिश करनी चाहिए जिससे ऐसे लोगो के दिलों में भी खुशी के क्षण पैदा हो सकें....उनमें जिंदगी जीने का हौंसला पैदा हो। नए साल पर कोई बड़ा संकल्प न लेकर हमारी यही छोटी सी कोशिश होनी चाहिए। जाहिर है कि जब दिल में उमंग हो तो खुशियां दौड़ी चली आती हैं...जिंदगी जीने कि हिम्मत बढ़ जाती है। तो दोस्तो नए साल की शुभकामना देते हुए मैं यही दुआ करुंगा कि आप सभी के दिल में उमंग बरकरार रहे....कोई भी काम हो...उसे करते वक्त सबके दिल में खुशी हो...और ये खुशी आप सब में बांटते रहें। आमीन....
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To LoVe 2015: अभिनेता गोविंदा : [नायक/नायिकाओं द्वारा गाये गाने - 23]


[नायक/नायिकाओं द्वारा गाये गाने - 23]
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Actor Govinda As a Singer

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अभिनेता गोविन्दा की माँ निर्मला देवी भारत की
प्रमुख शास्त्रीय गायिकाओं में से एक हैं। निर्मला देवा का विवाह उस समय
(1940) के प्रसिद्ध फ़िल्म कलाकार अरुण आहूजा से हुआ था। उन्होंने 'राम
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To LoVe 2015: क्या खतरनाक खेल में शामिल हैं केजरीवाल ?

ज सुबह से मित्रों के फोन आ रहे हैं और सब एक ही बात कह रहे हैं, भाईसाहब आप बिल्कुल सही कह रहे थे, अब हमें भी कुछ-कुछ समझ में आ रहा है, अरविंद केजरीवाल जो कह रहे हैं या कर रहे हैं वो सब महज दिखावा है, असल मकसद तो कुछ और ही लग  रहा है। दरअसल मैं तीन दिन लखनऊ में रहा, कुछ व्यस्तता के चलते खबरों से बिल्कुल कटा हुआ था। मित्रों ने ही मुझे फोन पर बताया कि केजरीवाल ने भी दिल्ली में फ्लैट पसंद कर लिया है, वो भी एक नहीं दो.. मैं चौंक गया कि दो फ्लैट क्यों ? पता चला कि अगल बगल के दो फ्लैट के पांच पांच कमरों को मिलाकर 10 कमरे का मुख्यमंत्री आवास तैयार किया जा रहा है। इन दोनों फ्लैट को लाखों रूपये खर्च कर चमकाने का भी काम  शुरू  हो गया है। बहरहाल न्यूज चैनलों पर खबर आई तो अब भाग खड़े हुए, कह रहे है, इससे छोटा आवास तलाशा जाए। अच्छा अभी इस मित्र ने फोन काटा ही था, दूसरे का फोन आ गया, कहने लगे अरे महेन्द्र जी आपका जवाब नहीं, जो आपने कहा था सब सामने आ रहा है। मैंने पूछा अब क्या हुआ, कहने लगे कि कल तक जो लोग मेट्रो और आटो में सफर करके न्यूज चैनलों की हेडलाइन बने हुए थे, आज सभी ने दिल्ली सरकार से इनोवा गाड़ी उठा ली, अब हर मंत्री शानदार लक्जरी गाड़ी पर चल रहा है। चलिए एक-एक कर सभी मुद्दों पर चर्चा करते हैं।

सबसे पहले केजरीवाल साहब के नए ठिकाने की बात करते हैं। दिल्ली के प्राइम लोकेशन भगवानदास रोड पर 7/6 डीडीए ऑफिसर्स कॉलोनी अब आम आदमी पार्टी के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का नया पता बनने को तैयार हो रहा है। वैसे तो मुख्यमंत्री की हैसियत से वो लुटिंयन दिल्ली में एक शानदार बंगले के हकदार हैं, इसमें कोई दो राय नहीं है। लेकिन खुद अरविंद ने ऐलान किया था कि उनका कोई भी मंत्री किसी तरह की सरकारी सुविधा यानि बंगला, मोटर, वेतन कुछ नहीं लेगा, हम सब सिर्फ जनता की सेवा करेंगे। लेकिन जब केजरीवाल ने पांच-पांच कमरों वाले दो फ्लैट लेने का फैसला किया तो दिल्ली वालों के कान खड़े हो गए। अरविंद केजरीवाल से पहले इस फ्लैट को देखने उनके माता-पिता पहुंच गए। सब ने ओके कर दिया, यहां तक कि इस फ्लैट को मुख्यमंत्री के रहने के काबिल बनाने के लिए लाखों रुपये पानी की तरह बहाने का फैसला भी हो गया और आनन-फानन में अफसरों ने काम भी शुरू कर दिया। खैर मीडिया में आज भी एक तपका ऐसा है जिसकी आंखे खुली हुई हैं। उसे लगा कि दिल्ली को इस बात की जानकारी होनी चाहिए कि अरविंद जो एक समय बड़ी - बडी बात कर रहे थे, दरअसल वो सच्चाई नहीं है, सच्चाई ये है कि अरविंद भी दूसरे राजनीतिक दलों और नेताओं से अलग नहीं है। खैर थोड़ी देर बाद टीवी पर अरविंद के शानदार फ्लैट की तस्वीर दिखाई जाने लगीं।

अब बारी थी अरविंद केजरीवाल की, दिल्ली वाले जानना चाहते थे कि आम आदमी के मुख्यमंत्री इस आरोपों का क्या जवाब देते हैं ? बहरहाल जवाब आया कि पहले जाकर शीला दीक्षित का आवास देखो फिर मेरे फ्लैट की तुलना करो। उनसे तो बहुत छोटा है मेरा फ्लैट। मुझे लगता है किसी आम आदमी के बीच के मुख्यमंत्री का इससे फूहड़ और गंदा जवाब हो ही नहीं सकता। इसका मतलब तो ये कि  मैं कहूं कि शीला ने मुख्यमंत्री रहते अगर भ्रष्ट तरीके से एक हजार करोड़ रुपये की हेराफेरी की है तो ढाई सौ करोड़ की हेराफेरी करने का आपका भी हक बन जाता है। क्यों केजरीवाल साहब आप ने ईमानदारी की ये नई परिभाषा गढ़ ली है। बहरहाल अभी केजरीवाल का कद उतना नहीं बढ़ा है कि मीडिया की पूरी तरह अनदेखी कर सकें। रात भर कुछ चैनल को छोड़कर ज्यादातर ने केजरीवाल को खूब खरी-खरी सुनाई और दिल्ली वालों को उनका असली चेहरा दिखाया, तब कहीं जाकर सुबह केजरीवाल मीडिया के सामने आए और कहा कि अब वो इस बड़े फ्लैट में नहीं रहेंगे। छोटा फ्लैट तलाशने के लिए अफसरों को कहा गया है। यहां एक सवाल है कि क्या केजरीवाल का भी मन डोल गया है सरकारी आवास को लेकर? क्या ये सच नहीं है कि मीडिया के दबाव में केजरीवाल ने ये फ्लैट छोड़ दिया, वरना तो उनके पापा मम्मी ने भी इस फ्लैट को ओके कर दिया था ?

अब दूसरी बात करते है, सरकारी गाड़ी को लेकर उनके विचार। केजरीवाल तीन दिन तक  ड्रामा करते रहे कि वो सरकारी गाड़ी नहीं लेगें, अपने निजी कार से दफ्तर जाएंगे। मीडिया ने उनके इस फैसले को बढ़ा चढ़ाकर खूब चलाया। तीन दिन तक हर चैनल पर उनकी नीले रंग की कार दौड़ती भागती दिखाई दे रही थी। न्यूज चैनल पर केजरीवाल भाषण देते रहे कि यहां से वीआईपी कल्चर खत्म करेंगे और पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देंगे। ड्रामेबाजी का आलम ये कि केजरीवाल ने शपथ लेने के लिए आधा रास्ता मेट्रो से तय किया, बाद में अपनी कार से गए। हालाकि ये अलग बात है कि उनके लिए अलग ही मेट्रो ट्रेन की व्यवस्था की गई थी। अब उनके मंत्री दो कदम आगे निकले, वो सुबह उठते ही न्यूज चैनलों को फोन करते और बताते कि सुबह साढ़े नौ बजे घर से सचिवालय के लिए निकलेंगे और पहले आटो से मालवीयनगर मेट्रो स्टेशन जाएंगे, फिर मेट्रो से सचिवालय जाएंगे। अगर न्यूज चैनल के रिपोर्टर जाम में फंस गए तो मंत्री भी घर से नहीं निकल रहे थे। वो भी रिपोर्टरों के आने के बाद ही आटो पर बैठे। खैर ये ड्रामा भी ज्यादा दिन नहीं चल पाया। अब मुख्यमंत्री सहित सभी मंत्रियों के पास शानदार सरकारी लक्जरी गाड़ी है। सभी गाड़ियों पर वीवीआईपी नंबर है। मैं पूछना चाहता हूं कि केजरीवाल साहब ये तीन दिन अपनी बैगनआर कार पर चल कर आप क्या बताना चाहते थे ? क्या ये कि आपके पास भी कार है ! अब आपके मंत्रियों ने भी कार लपक ली, कहां गया आपका पब्लिक ट्रांसपोर्ट प्रेम ?

अच्छा आप पानी बिजली पर बड़ी बड़ी बातें कर रहे हैं। जनता को हकीकत क्यों नहीं बताते। आपने जिस तपके यानि मीडिल क्लास को ध्यान में रखकर पानी की बात की, पूरी दिल्ली जानती है कि आपके फरमान से उसे कोई फायदा नहीं होने वाला है। दिल्ली में झुग्गी झोपड़ी या फिर अवैध कालोनी में पानी पहुंच ही नहीं रहा है, मीटर की तो बात ही दूर है। हां मीडिल क्लास तपका हाउसिंग सोसाइटी में रहते हैं, जहां सबके अलग-अलग कनेक्शन नहीं है, पूरी सोसाइटी का एक कनेक्शन है। ऐसे में मुझे तो नहीं लगता कि किसी को फायदा होगा। दूसरा आपने बिजली के बिल को आधा करने की बात की थी, लेकिन अब उसमें चालाकी कर दी आपने। चुनाव के पहले आपने बिजली कंपनियों को चोर बताया था और कहा था कि इन पर शिकंजा कसा जाएगा। हो क्या रहा है कि आप ने तो इन्हीं बिजली कंपनियों को करोडो रुपये सौंपने की तैयारी कर ली। बिजली का बिल कम करने के लिए सब्सिडी का क्या मतलब है ? केजरीवाल साहब सब्सिडी आप अपने घर से नहीं हमारी जेब से दे रहे हैं। हमारे टैक्स के पैसे जिसे कहीं विकास के काम में लगाया जा सकता था, वो पैसा आप बिजपी कंपनियों को दे रहे हैं, फिर मेरा सवाल है कि अब आप में और कांग्रेस में अंतर क्या है ? दोनों के लिए ही आम आदमी से कहीं ज्यादा बिजली कंपनियो की फिक्र है। फिर बड़ी बात तो ये है कि अभी तो बजट पास नहीं हुआ, आपके पास पैसे ही नहीं है, ऐसे में आप सब्सिडी दे कैसे सकते हैं ? केजरीवाल साहब कहीं ऐसा तो नहीं कि आपको दिल्ली सरकार के घाघ अफसर मूर्ख बना रहे हैं ?

वैसे आप अपनी बातों पर ज्यादा समय तक कायम नहीं रह पाएंगे, इस बात का आभास तो आपके शपथ ग्रहण समारोह में ही हो गया था। आप ने कहाकि सादगी से समारोह होगा, कोई वीआईपी नहीं होगा, सब आम आदमी होंगे। केजरीवाल साहब आपकी आंखों पर पट्टी पड़ी हुई थी क्या ? आपने देखा नहीं कि आम आदमी रामलीला मैदान में किस तरह से धक्के खा रहा था और खास आदमी सोफे और शानदार सफेद कवर चढ़ी कुर्सियों पर विराजमान था। क्या आप अभी भी इस बात से इनकार कर सकते हैं कि आपके समारोह में खास लोगों के लिए वीआईपी इंतजाम नहीं था ? हां भूल गया था, आप सुरक्षा को लेकर भी काफी कुछ कहते रहे हैं। पुलिस विभाग के रिकार्ड बता रहे हैं कि आपकी सुरक्षा में काफी पुलिस बल शामिल है। अगर आप सुरक्षा लेते तो 10-20 पुलिस कर्मी आपके साथ हो जाते, लेकिन सुरक्षा ना लेने की वजह से जहां से आप का आना जाना होता है, उस पूरे एरिया में सुरक्षा बलों को तैनात किया जाता है। बताते हैं की तीन सौ से चार सौ पुलिस वाले आपके आस पास रहते हैं। इससे तो बेहतर यही होता कि आप सुरक्षा ले लें। खैर ये वो बातें हैं जो आप दावा करते रहे और खोखली साबित हुई..

केजरीवाल साहब अब मैं कुछ गंभीर मुद्दा उठाना चाहता हूं। विधानसभा के भीतर आप पर एक गंभीर आरोप लगा, कि आप ने अपने एनजीओ में विदेशों से चंदा लिया। आप जिससे चंदा लेते हैं उसके क्रिया कलाप जानने की कोशिश करते हैं? मेरी जानकारी है कि ये संस्थाएं   लोकतंत्र को अस्थिर करने का काम करती हैं। मेरा सवाल है कि विधानसभा में आपने इस आरोप का जवाब क्यों नहीं दिया ? विधानसभा के रिकार्ड में आप पर आर्थिक धांधलेबाजी के आरोप दर्ज हो गया है। लेकिन उस दौरान आप मौजूद थे, फिर भी इस पूरे मामले में खामोश हैं, दिल्ली की नहीं देश की जनता सच्चाई जानना चाहती है। कुछ बातें हैं जो आपको जानना जरूरी है।

केजरीवाल का  काला सच !

दरअसल अमेरिकी नीतियों को पूरी दुनिया में लागू कराने के लिए अमेरिकी खुफिया ब्यूरो  ‘सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी (सीआईए)’ अमेरिका की मशहूर कार निर्माता कंपनी ‘फोर्ड’ द्वारा संचालित ‘फोर्ड फाउंडेशन’ और कई अन्य फंडिंग एजेंसी के साथ मिलकर काम करती है। 1953 में फिलिपिंस की पूरी राजनीति और चुनाव को सीआईए ने अपने कब्जे में ले लिया था। भारत अरविंद केजरीवाल की ही तरह सीआईए ने उस वक्त फिलिपिंस में ‘रेमॉन मेग्सेसाय’ को खड़ा किया था और उन्हें फिलिपिंस का राष्ट्रपति तक बनवा दिया था। अरविंद केजरीवाल की ही तरह ‘रेमॉन मेग्सेसाय’ का भी पूर्व का कोई राजनैतिक इतिहास नहीं था। उन्हीं ‘रेमॉन मेग्सेसाय’ के नाम पर एशिया में अमेरिकी नीतियों के पक्ष में माहौल बनाने वालों, वॉलेंटियर तैयार करने वालों, अपने देश की नीतियों को अमेरिकी हित में प्रभावित करने वालों, भ्रष्‍टाचार के नाम पर देश की चुनी हुई सरकारों को अस्थिर करने वालों को ‘फोर्ड फाउंडेशन’ व ‘रॉकफेलर ब्रदर्स फंड’ मिलकर अप्रैल 1957 से ‘रेमॉन मेग्सेसाय’ अवार्ड प्रदान कर रही है। ‘आम आदमी पार्टी’ के संयोजक अरविंद केजरीवाल को वही ‘रेमॉन मेग्सेसाय’ पुरस्कार मिल चुका है और सीआईए के लिए फंडिंग करने वाली उसी ‘फोर्ड फाउंडेशन’ के फंड से उनका एनजीओ ‘कबीर’ और ‘इंडिया अगेंस्ट करप्शन’ मूवमेंट खड़ा हुआ है।

‘फोर्ड फाउंडेशन’ के एक अधिकारी स्टीवन सॉलनिक के मुताबिक ‘‘कबीर को फोर्ड फाउंडेशन की ओर से वर्ष 2005 में 1 लाख 72 हजार डॉलर एवं वर्ष 2008 में 1 लाख 97 हजार अमेरिकी डॉलर का फंड दिया गया।’’ यही नहीं, ‘कबीर’ को ‘डच दूतावास’ से भी मोटी रकम फंड के रूप में मिला है। अमेरिका के साथ मिलकर नीदरलैंड भी अपने दूतावासों के जरिए दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में अमेरिकी-यूरोपीय हस्तक्षेप बढ़ाने के लिए वहां की गैर सरकारी संस्थाओं यानी एनजीओ को जबरदस्त फंडिंग करती है। अंग्रेजी अखबार ‘पॉयनियर’ में प्रकाशित एक खबर के मुताबिक डच यानी नीदरलैंड दूतावास अपनी ही एक एनजीओ ‘हिवोस’ के जरिए नरेंद्र मोदी की गुजरात सरकार को अस्थिर करने में लगे विभिन्‍न भारतीय एनजीओ को अप्रैल 2008 से 2012 के बीच लगभग 13 लाख यूरो, मतलब करीब सवा नौ करोड़ रुपए की फंडिंग कर चुकी है।  इसमें एक अरविंद केजरीवाल का एनजीओ भी शामिल है। ‘हिवोस’ को फोर्ड फाउंडेशन भी फंडिंग करती है।

डच एनजीओ ‘हिवोस’  दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में केवल उन्हीं एनजीओ को फंडिंग करती है,जो अपने देश व वहां के राज्यों में अमेरिका व यूरोप के हित में राजनैतिक अस्थिरता पैदा करने की क्षमता को साबित करते हैं।  इसके लिए मीडिया हाउस को भी जबरदस्त फंडिंग की जाती है। एशियाई देशों की मीडिया को फंडिंग करने के लिए अमेरिका व यूरोपीय देशों ने ‘पनोस’ नामक संस्था का गठन कर रखा है। दक्षिण एशिया में इस समय ‘पनोस’ के करीब आधा दर्जन कार्यालय काम कर रहे हैं। 'पनोस' में भी फोर्ड फाउंडेशन का पैसा आता है। माना जा रहा है कि अरविंद केजरीवाल के मीडिया उभार के पीछे इसी ‘पनोस' के जरिए 'फोर्ड फाउंडेशन' की फंडिंग काम कर रही है।


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शुक्रवार, 3 जनवरी 2014

To LoVe 2015: अभिनेता संजय दत्त : [नायक/नायिकाओं द्वारा गाये गाने - 22]


[नायक/नायिकाओं द्वारा गाये गाने - 22] 
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 Sanjay Dutt As a Singer

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Song - Ae Shivani .... Film - Khoobsurat (1999) 

Singer - Sanjay Dutt, Sharda Pandit, Lyricist - Sanjay Chhel Music Director - Jatin Lalit Artist - Sanjay Dutt, Urmila Mantodkar



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To LoVe 2015: अभिनेता अक्षय कुमार : [नायक/नायिकाओं द्वारा गाये गाने - 21]


[नायक/नायिकाओं द्वारा गाये गाने - 21] 
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Akshay Kumar As a Singer

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- Song - 

मुझ में तू , तू ही तू बसा

नैनों में जैसे ख्वाब सा 

Mujh Men Tu, Tu Hi Tu 

Naino Men Jaise Khwaab Sa

Movie : Special 26 (2013)

Singer : Akshay Kumar

Lyrics : Irshad Kamil
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To LoVe 2015: अभिनेता हृतिक रोशन : [नायक/नायिकाओं द्वारा गाये गाने - 20]




[नायक/नायिकाओं द्वारा गाये गाने - 20]
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Hritisk Roshan  As a singer

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 - Song- 
Kites in the sky

Film : Kites (2010)

Singer : Hritik Roshan & Suzzane D'Mello

Music Director : Rajesh Roshan

Lyricist : Anand Bakshi




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To LoVe 2015: अभिनेता आमिर खान : [नायक/नायिकाओं द्वारा गाये गाने - 19]


[नायक / नायिकाओं द्वारा गाये गाने - 19]
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Amir Khan As a Singer

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- Song -

ऐ क्या बोलती तू ..... आती क्या खंडाला

Aati Kya Khandala



FIlm : Ghulaam (1998)

Singers : Aamir Khan, Alka Yagnik

Music : Jatin-Lalit
Lyricist : Nitin Raikwar


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