गुरुवार, 31 अक्तूबर 2013

To LoVe 2015: अमिताभ बच्चन : [नायक/नायिकाओं द्वारा गाये गाने -13]



Amitabh Bachchan





Complete List of All The Songs Sung By Amitabh Bachchan

बिग बी यानि अमिताभ बच्चन अभिनय की दुनिया के वो सूरज हैं जो चार दशक से
बालीवुड की दुनिया में राज करते हुए अपना जलवा बिखेर रहे हैं ! उनकी
शख्सियत को शोहरत की बुलंदियों तक ले जाने में उनकी आवाज का बहुत बड़ा हाथ
है !  



ये कहना गलत नहीं होगा कि अमिताभ की आवाज़ में
ऐसा जादू है जो बेजान अल्फ़ाज़ों में भी जान डाल देती /a>
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मंगलवार, 29 अक्तूबर 2013

To LoVe 2015: पटना धमाका : बात सिर्फ मोदी की नहीं

    पटना में धमाकों के बीच नरेंद्र मोदी ने सफल हुंकार रैली की.....बिहार की धरती पर नरेंद्र मोदी का रैली का सपना कई महीनों से अटका हुआ था। धमाकों से मोदी की रैली को रोकने की नापाक कोशिश भी नाकाम हो गई...मगर धमाकों के बाद नेता लगातार पोलिटिकल धमाके कर रहे हैं। कोई  सुधरने को तैयार नहीं। नेताओं की फिसलती जुबान पर कोई रोक नहीं है। ब्लास्ट के बाद नेता आतंकवाद से लड़ने की बात करने की बजाए आपस में ही लड़ रहे है…जबकि  परेशान करने वाली बात यह है कि मोदी कि रैली में धमाके हुए कैसे?
   धमाकों के लिए बिहार सरकार या प्रशासन को ही दोष देना बेमानी है। समस्या पुरे सिस्टम की है। हमारे देश के लिए आतंकवाद एक बड़ी मुसीबत इसलिए है क्योंकि हमारे पड़ोस में कई अराजक औऱ नापाक मुल्क हैं जहां से आतंकवादियों को पूरी मदद मिलती है। उसपर भारी मुसीबत ये है कि विदेशी आतंकवादियों को देश के भीतर से भी मदद मिल रही है। पटना स्टेशन पर पहले विस्फोट में जो आतंकवादी मरा था वह भारतीय था..वहां से भागते हुए जो आतंकवादी पकड़ा गया वो भी भारतीय ही था। जो मास्टरमाइंड है वो भी भारतीय ही है। इन सबको आर्थिक मदद पाकिस्तान से और ट्रैनिंग बांग्लादेश से मिलती है।
    ऐसे में कड़ी चौकसी से ही ऐसी घटनाओं पर काबू पाया जा सकता है.…मगर ब्लास्ट के तुरंत बाद राज्य सरकार पुराना राग अलापने लगी थी कि उन्हें केंद्र ने कोई अलर्ट नहीं दिया था। बाद में केंद्र और खुफिया एजेंसियों कि रिपोर्ट्स ने राज्य सरकार के दावों की पोल खोल दी। भटकल की गिरफ्तारी के बाद से ही इस बारे में शायद अलर्ट जारी कर दिया गया था। दरअसल केंद्र और राज्य कि मशीनरी में तालमेल की कमी का नतीजा हैं ऐसी घटनाएं। केंद्रिय खुफिया एजेंसियां अक्सर राज्यों की पुलिस की गफ़लत और धमाकों के बाद काम करने के तरीकों पर उंगलियां उठाती रही हैं। मसलन इस बार जिस तरह से जिंदा बमों को डिफ्यूज करने की जगह उसमें बिहार पुलिस ने धमाके करा दिए उससे बम के बनाने के तरीकों के बारे में पता चलने से एजेंसियां वंचित रह गईं। इसके अलावा पटना में धमाकों के दो दिन बाद फिर तीन जिंदा बम मिलना पुलिस के काम करने के तरीकों पर सवाल उठाता है।
   ये काफी चिंता की बात है कि सूरक्षा के ऐसे लचर प्रबंध मोदी की रैली में हुए। सवाल किसी पार्टी या नेता विशेष का नहीं है। सवाल देश के राजनैतिक नेतृत्व का है। देश का सारा राजनैतिक नेतृत्व आतंकवादियों के निशाने पर है। सोनिया गांधी, राहुल गांधी, लालकृष्ण आडवाणी और नरेंद्र मोदी आतंकवादियों की हिटलिस्ट में सबसे ऊपर हैं। इसलिए इन नेताओं की सुरक्षा में किसी तरह की कोताही नहीं की जानी चाहिए। ऐसे में जब भविष्य में देश की अगुवाई करने वाले सभी संभावित नेता आतंकवादियों की हिट लिस्ट में हैं तो इन पार्टियों के नेताओं को बचकानी बयानबाजी नहीं करनी चाहिए।
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सोमवार, 28 अक्तूबर 2013

To LoVe 2015: तू मेरी जिंदगी है, तू मेरी हर ख़ुशी है : Copied or Inspired By Other Song [12]



[Original Song] 

 तू मेरी जिंदगी है तू मेरी हर ख़ुशी हैतू ही प्यार तू ही चाहत तू ही बंदगी है


[Male Version]Singer - Mehadi HasanPakistani Film - Mohabbat Mar Nahin Sakti (1977)Music - NashadLyrics - Taslim FazaliStarring  - Deeba, Nadeem, Talat Hussain, Saqi, RehanaFilm Director - Aziz-ul-Hassan



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[Female Version]Singer - Noor Jahan
Film - /a>
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रविवार, 27 अक्तूबर 2013

To LoVe 2015: पंडित जसराज जी का फ़िल्म के लिए गाना : (हिंदी सिनेमा के दुर्लभ गाने- 13)






जो आवाज़ हम आप को आज सुनवाने जा रहे हैं वह किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं फिर भी हम बता दें कि यह  हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत शैली के  दिग्गज, पद्म विभूषण से सम्मानित संगीत मार्तांड पंडित जसराज जी की आवाज़ है !




यह विक्रम भट्ट द्वारा निर्देशित फिल्म '1920'
(2008) थी ! यह पंडित जसराज जी का एकमात्र सोलो गीत है जिसे उन्होंने किसी फिल्म के लिए विशेष रूप से गाया ! इसीलिये हमने इसे दुर्लभ गीत /a>
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शुक्रवार, 25 अक्तूबर 2013

To LoVe 2015: मन्ना डे के लिए विकट चुनौती थी


[अनोखी और दिलचस्प जानकारी - 17]




फिल्म जगत की बातें निराली होती हैं और कई बार ऐसी स्थितियां आ जाती हैं
जिन्हें अच्छे -अच्छे भी झेलना मुश्किल समझते हैं ! अपने अहम् और कद को एक
तरफ रख कर समझौते करने पड़ते हैं !


शास्त्रीय गायन के उस्ताद को कहा जाए
कि वह नौसिखीये के सामने जानबूझकर हार जाए तो उस के लिए यह काम आसान न होगा
,कभी उसका अहम् कभी उसकी काबिलियत आड़े आयेगी ही ! ऐसी ही स्थिति मन्ना डे/a>
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गुरुवार, 24 अक्तूबर 2013

To LoVe 2015: गायक मन्ना डे : (गायकों का पहला / आखिरी गाना-8)



जन्म : 1 मई, 1919मृत्यु : 24 अक्टूबर, 2013

Manna Dey : First / Last Song






मन्ना दा अपने सम्पूर्ण और विलक्षण गायन के साथ संगीत प्रेमियों के दिलों
पर दशकों तक छाए रहे ! मन्ना दा को निःसंदेह शास्त्रीय संगीत को आमजन तक
पहुँचाने के लिए भी याद रखा जाएगा। उनकी आवाज़ की मधुरता न सिर्फ कानों में
बल्कि दिल में भी रस घोलती रही है ! तभी तो मोहम्मद रफ़ी साहेब ने एक
साक्षात्कार के दौरान कहा था -  "आप/a>
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बुधवार, 23 अक्तूबर 2013

To LoVe 2015: अभिनेता डैनी डेन्जोंगपा : [नायक/नायिकाओं द्वारा गाये गाने -12]





Danny Denzongpa





सिक्किम के रहने वाल अभिनेता डैनी डेन्जोंगपा न केवल हिंदी फिल्मों के एक कुशल अभिनेता रहे हैं बल्कि एक बहुत उम्दा गायक भी हैं ! हिंदी फिल्मों के लिए गाना उन्होंने लता जी के साथ फिल्म 'ये गुलिस्तां हमारा' के लिए गा कर शुरू किया था !

Singers - Lata Mangeshkar and Danny 

Film - Ye Gulistan Hamara (1972)

 Music - S D.Burman



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सोमवार, 21 अक्तूबर 2013

To LoVe 2015: गायिका वर्षा भोसले - [गुमनाम गायक/गायिका - 7]



Singer Varsha Bhosle 




वर्षा भोसले भारतीय सिनेमा की जानी-मानी गायिका आशा भोसले की बेटी थीं, जिन्होंने मानसिक अवसाद के चलते 8 अक्टूबर 2012 को सुसाईड करके अपना जीवन ख़त्म कर लिया था। एक गायिका के तौर पर वर्षा भोसले ने कुछ हिन्दी फ़िल्मों तथा भोजपुरी व मराठी फ़िल्मों में गीत गाए। उनकी गायकी की तुलना उनकी माँ के गाये गीतों से होने के कारण वो अपेक्षाओं का बोझ न उठा सकीं, नतीजतन वर्षा ने परेशान /a>
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रविवार, 20 अक्तूबर 2013

To LoVe 2015: अभिनेत्री स्मिता पाटिल : [नायक/नायिकाओं द्वारा गाये गाने -11]


जन्म : 17 अक्टूबर 1955
मृत्यु : 13 दिसंबर 1986

Song Sung By Smita Patil



हिंदी सिनेमा की सशक्त अभिनेत्री स्मिता पाटिल को 

उनकी जीवंत और यादगार भूमिकाओं के लिए जाना जाता है।


स्मिता पाटिल जी कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद वह मराठी टेलीविजन में बतौर समाचार वाचिका काम करने लगीं। एक
दिन प्रसिद्ध फ़िल्म निर्माता-निर्देशक श्याम बेनेगल ने उन्हें टीवी पर
समाचार पढ़ते हुए देखा। वह स्मिता के /a>
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गुरुवार, 17 अक्तूबर 2013

To LoVe 2015: फिल्म- 'मेरा नाम जोकर' के अनरिलीज़्ड गीत: (हिंदी सिनेमा के दुर्लभ गाने- 12)






1-'गाओ गाओ झूम के गाओ, भूल दर्द ग़म मुस्कुराओ ..'

यह गीत राजकपूर की फिल्म मेरा नाम जोकर से है जिसकी जानकारी और गीत दोनों ही पार्श्वगायिका शारदा जी ने स्वयं ये गीत श्री सुदर्शन पाण्डेय जी को दिए  हैं  ! शारदा जी के तीन गाने इस फिल्म के लिए रिकॉर्ड हुए थे लेकिन कोई भी गीत फिल्म में नहीं रखा गया ! यह गीत मुकेश और शारदा की आवाज़ में है, संगीत शंकर जयकिशन का है और 'हँसी' सिमी ग्रेवाल की है !


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मंगलवार, 15 अक्तूबर 2013

To LoVe 2015: सबसे पहले रेकॉर्डेड गीत : (हिंदी सिनेमा के दुर्लभ गाने -11)



हिंदी  फिल्म इतिहास के 
पहले चार रिकॉर्ड हुए गीतों में से दो गीत 





गीत- 'परमुख बनी तू कमला' और  'अहंकार कर के' 







1931 में पहली बोलती फिल्म आलम आरा रिलीज़ हुई थी दुर्भाग्य से जिसकी सभी रीलें आग में जलने के कारण नष्ट हो गयी थीं.उस फिल्म में  6 गाने थे वे सभी आग में नष्ट हो गए.क्योंकि फिल्म के गीतों के रिकॉर्ड बनाने का विचार किसी को नहीं आया था ! 1932 में एक ट्रायल के रूप में माधुरी /a>
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To LoVe 2015: गुलज़ार का अनरिलीज़्ड गाना : (हिंदी सिनेमा के दुर्लभ गाने- 10)



Unreleased Song of Gulzar 
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'शाम से आँख में नमी-नमी सी है ,आज फिर आप की कमी-कमी  सी है'






गुलज़ार साहब की लिखी हुई इस ग़ज़ल को आप ने जगजीत सिंह जी की आवाज़ में सुना होगा, लेकिन हम आप को सुनवायेंगे इसी ग़ज़ल को मुकेश जी के स्वर में ! फिल्म - 'मिटटी का देव' बहुत ही अच्छी फिल्म बनी थी लेकिन रिलीज़ होने से पहले ही /a>
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To LoVe 2015: फिल्म 'मुग़ले आज़म' का अनरिलीज़्ड गाना : (हिंदी सिनेमा के दुर्लभ गाने-9)



Unreleased Song of Film Mughal-E-Aazam
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गीत - 'हुस्न की बारात चली मौसमे बहार में'



बताया जाता है कि फिल्म मुगले आज़म की एडिटिंग के समय 
फिल्म की लम्बाई अधिक होने के कारण इस गीत को हटा दिया गया था !



Song - Husn kii barat chali Mausm E bahar mein

         Film - Mughal-E -Azam [1961]

Lyrics - /a>
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सोमवार, 14 अक्तूबर 2013

To LoVe 2015: दशहरा..तूफान...मंदिर...मैं..तुम

    दशहरा बीता...औऱ देशभर में बुराई पर अच्छाई की जीत का त्यौहार पूरे जश्न के साथ मनाया गया....ये अच्छाई एक व्यापक शब्द है...लेकिन जीवंत समाज की अनिवार्य निशानी है...अच्छाई का मतलब सिर्फ भला होना नहीं होता। अच्छाई का अर्थ ये भी है कि कामों में इमानदारी और तेजी दिखे....जैसे इस बार प्राकृतिक आपदा के दौरान केंद्रीय ऐजेंसियां के काम में दिखा। ये ही मशीनरी पवित्र केदारनाथ धाम हादसे के वक्त लकवाग्रस्त नजर आई थी..मगर इसबार तटीय इलाकों की तरफ प्रचंड गति से बढ़ रहे समूद्री तूफान से लोगो को बेहद सफलता के साथ बचा लिया गया। 
     तत्परता का आलम ये था कि एक ही दिन में 5 लाख लोगो को सुरक्षित जगह पर भेज दिया गया। इंसान तो इंसान...मवेशियों यानि पालतू जानवरों को भी सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया गया। दो दिन बीतते-बीतते संचार व्यवस्था बहाल कर दी गई। यानि ये साबित हो गया कि सरकारी अधिकारी औऱ नेता अपना काम ढंग से करें तो देश की बल्ले-बल्ले हो जाए। पिछली बार सिर्फ ओडिशा में ही 10,000 लोग मारे गए थे..वहीं इस बार बहुत कम लोगो की मौत हुई है। अब देखना ये है कि बिहार, ओडिशा, झारखंड और आंध्र प्रदेश में तूफान से होने वाली बारिश की बाढ़ आने पर स्थानीय प्रशासन अपने स्तर पर कितनी तत्परता दिखाता है?
    इसके ठीक उलट जब सरकारी मशीनरी लापरवाह हो जाए तो वो होता है जो मध्यप्रदेश में रतनगढ़ माता के मंदिर में हुआ। वहां मची भगदड़ में 115 से ज्यादा लोगो की मौत हो गई है। वहां नियमों की धज्जियां उड़ाई गईं। नो एंट्री में धड़ल्ले से गाड़ियां जा रही थीं...जिससे 10 किलोमीटर तक जाम लग गया। फिर वही हुआ जो कई बार पहले भी हो चुका है..कोई अफवाह फैली और भगदड़ मच गई...उधर भीड़ को काबू में करने के नाम पर पुलिस ने लाठी भांज दी....नतीजा सब लोग नदी के पुल पर जमा हो गए...पुल स्थानीय आबादी के अनुसार ठीक-ठाक था..पर भीड़ की वजह से छोटा औऱ संकरा हो गया...नतीजा कई लोग नदी में कूद पड़े..तो कई लोग नदी में गिर गए...कई भीड़ में कूचले गए....नतीजतन वहां लाशों के ढेर लग गए....। 
    हैरत होती है कि इस तरह की घटनाएं कई मंदिरों में घट चुकी है। इतने हादसों के बाद कई पुख्ता योजनाएं भी बनीं...लेकिन उनपर अमल करने को कोई तैयार नहीं। उलटा पहले तो प्रशासन हद दर्जे की लापरवाही दिखाता है...उसपर सो कॉल्ड आधुनिक संवेदनहीन तबका जनता की धार्मिक विश्वासों को कोसने लगता हैं। किसी को अपनी लापरवाही औऱ निकम्मापन नजर नहीं आता। सवाल ये है कि हर बार...हर जगह मंदिरों में ही अफवाह कैसे फैल जाती है 
 आइए एक बार फिर अच्छाई के अंश की बात करते हैं। दिल्ली औऱ एनसीआर में की गई एक रिसर्च से पता चला है कि हमारे समाज में एक सकारात्मक उर्जा बह रही है। लोगो में अपने सपनो को पूरा करने के लिए सामूहिक तौर पर काम करने का जज्बा दिख रहा है। अगर कोई अकेला ही चल रहा हो..तो उसके पीछे कारवां बनते देर नहीं लग रही है। 
   अब सवाल ये है कि ये रिर्सच किसकी है? इसकी प्रमाणिकता कितनी है? तो चलते-चलते मैं आपको बताता चलूं कि ये रिसर्च मेरी है। मैं कुछ महीने से व्यक्तिगत तौर पर मस्ती के साथ इसपर गंभीरता से काम कर रहा हूं। वैसे ये रिसर्च खर्चीली भी है। दिल्ली औऱ एनसीआर में चक्कर काटते वक्त टाइम...पेट्रोल औऱ पैसा सबकुछ खर्च होता है। खैर इस तरह के प्रयोग मैं करता रहता हूं। जो कि एक अच्छी बात है....पर जेब के लिए ये बुरी बात है...। आमदनी अठन्नी खर्चा रुपैया....लोकव्यवहार कहता है ये गलत है...पर दिल कहता है कि ऐसे मामलों में ये अच्छी बात है...। यानि दोनो का कहा थोड़़ा-थोड़ा मान लीजिए...।
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To LoVe 2015: अँखियों को रहने दे, अंखियों के आस-पास : Copied or Inspired by Other song [11]



[Original Song] 


अँखियाँ नु रैन दे अँखियाँ दे कोल कोल

Ankhiyan nu rain de ankhiyan de kaul kaul
Chan pardesiya bol bhavain na bol

Pakistani Singer - Reshma
Non filmi Album - Lok Virsa Reshma (Vol.1)


[Punjabi folk song which is also sung by other Pakistani Singer Atif Aslam.]




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[Copied/Inspired Song]


अँखियों को रहने दे अंखियों के आस पास 
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रविवार, 13 अक्तूबर 2013

To LoVe 2015: फिल्म अन्नदाता का गीत और नृतक गोपीकृष्ण


[अनोखी और दिलचस्प जानकारी - 16]


Song - O Meri Pran Sajani Champawati Aa Ja


'फिल्म अन्नदाता के गीत - 
'ओ मेरी प्राण सजनी चंपावती आ जा' में दो रोचक और ख़ास बाते हैं :


पहली ख़ास बात - इस गीत में जो नृत्य कर रहे हैं वे हैं नृत्य सम्राट - कथक के जाने माने नृतक रहे गोपी कृष्ण जी जिन्होंने 1952 में मात्र 17 साल की उम्र से नृत्य निर्देशन का काम शुरू कर दिया था, और लगातार 9 घंटे 20 मिनट का कत्थक /a>
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To LoVe 2015: न जईओ परदेस ,माही वे न जईओ परदेस : [Copied or Inspired song]


Copied or Inspired by Other song [10] 
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[Original Song]
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गोरिया मैं जाना परदेस, माही वे न जावीं परदेस
Goriya main Jana Pardes
Mahi ve naa jaavin pardes 




Pakistani Singers - Reshman and Parvez Mehadi

Music Director - Tasadduq Hussain 

Lyrics -Ismail Qalander 
Year -1960 s



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To LoVe 2015: यारा सीली सीली बिरहा की रात का जलना : [Copied or Inspired Song]


Copied or Inspired by Other Song [9] 
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[Original Song]

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'वे मैं चोरी चोरी तेरे नाल  'इस गीत को पाकिस्तान की गायिका रेशमा जी ने 1965 में गाया था ! उनके कई स्टेज कार्यक्रमों में भी उनसे यह गाना सुना जाता है ! उनके गाये इस गीत  की क्लिप नेट पर हैं, लेकिन जो 60 के दशक में गाया हुआ गीत है, /a>
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To LoVe 2015: लता-सुमन का एकमात्र युगल गीत : हिंदी सिनेमा के दुर्लभ गाने -8



The only 'duet' of Suman and Lata




सुमन कल्यानपुर और लता जी की आवाजें 1950 और 60 के दशक तक के गानों में बेहद समनाता लिए हुए सुनायी देती थीं ! सुमन जी की आवाज़ 70 के गीतों में थोडा अलग सुनायी देने लगी थी !




सुमन जी का फिल्म इंडस्ट्री में गायिका के रूप में आना तत्कालीन लता विरोधियों के लिए एक वरदान जैसा था ! सुमन और लता की आवाज़ में बेहद समानता होने के कारण शायद उनसे ड्युट नहीं गवाए गए /a>
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शनिवार, 12 अक्तूबर 2013

To LoVe 2015: महेंद्र-रफ़ी का युगल गीत : हिंदी सिनेमा के दुर्लभ गाने -7



Only Duet of Rafi and Mahendra Kapoor
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महेद्र कपूर जो रफी साहब को हमेशा अपना गुरु मानते रहे थे ! उनके साथ रफ़ी साहब का एक ही दोगाना फिल्म आदमी के लिए रिकॉर्ड हुआ था ! रफ़ी साहब और उनकी आवाज़ काफी मिलती जुलती थी जिसे उनके युगल गीत ना गाने का एक  कारण बताया जाता था, लेकिन फिर भी एक गीत ऐसा बन ही गया जिस में इन दोनों गायकों को /a>
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To LoVe 2015: अभिनेता असरानी [नायक/नायिकाओं द्वारा गाये गाने -10]




Songs Sung by Actor Asraani




 फिल्म 'अलाप' में अभिनेता असरानी ने गीत गाये जो उन्हीं पर फिल्माए गए थे !

गीत - ओह रामा डर लागे 

 Movie : Alaap (1977)

Music : Jaidev 

Lyrics : Dr Rahi Masoom Raza

Singer : Asrani 





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गीत- बिनती सुनल तनिक नटखट गोरी मोरी बिनती 

Song-Binati sunal tanik natkhat gori mori 

Movie : Alaap (1977)

Music : /a>
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To LoVe 2015: अभिनेत्री करीना कपूर [नायक/नायिकाओं द्वारा गाये गाने -9]



Song sung by Actress Kareena Kapoor 






अभिनेत्री करीना कपूर का गाया गीत जिसे 'फिल्म देव' में उन्हीं पर फिल्माया गया था ! इस गीत को पहले गायिका विजयेता पंडित की आवाज़ में रिकॉर्ड किया गया था, लेकिन बाद में इस गीत के संगीतकार आदेश श्रीवास्तव ने इसे करीना से गवाया और यही गीत फिल्म में रखा गया !


Song : Jab Nahin Aaye The Tum
Movie : Dev (2004)
  Music : Aadesh Shrivastava
Singer : Kareena /a>
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To LoVe 2015: गायिका शमशाद बेग़म - (गायकों का पहला / आखिरी गाना-7)



Shamshaad Begum : First / Last Song







भारतीय सिनेमा गीत संगीत के सुनने वालों में से शमशाद बेगम जी को  कौन नहीं जानता होगा ? वे हिंदी फ़िल्मी पार्श्वगायन की पहली गायिकाओं में से एक थीं ! मधुर खनक लिए उनकी आवाज़ ने उनको लाखों प्रशंसक दिए उनकी गायकी में रस था ! उन्होंने अपने गायन की शुरुआत रेडिओ पेशावर से की ! उनकी पहली फिल्म खजांची (1941) थी, जिस में उन्होंने एक नहीं पूरे नौ गीत गाये थे !


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शुक्रवार, 11 अक्तूबर 2013

To LoVe 2015: आसाराम का मिशन बलात्कार !

हले सोच रहा था कि पांच राज्यों मं चुनाव घोषित हो गए हैं, उसकी बात करूं, 2014 यानि आम चुनाव में भले ही अभी देरी हो पर सियासी पारा बिल्कुल चढ़ा हुआ है। लेकिन इन सब पर भारी पड़ रहा है आसाराम और उसका परिवार। सूरत की दो बहनें जिस तरह सामने आई हैं और उनकी आप बीती सुनने से तो लगता है कि आसाराम और उसका दुलारा नारायण साई दोनों ही रेपिस्ट हैं। सवाल ये भी है कि अगर आसाराम रेपिस्ट नहीं होता तो भला वो क्यों भरी सभा में कहता कि वो मर्दानगी बढ़ाने के लिए दूध में सोना उबाल कर पीता है। इसके अलावा पलास का फूल और ना जाने क्या - क्या चबाता है। अच्छा इस बाप बेटे की करतूतें सुन कर ही आम आदमी हिल जाता है, उसे लगता है कि ये धर्म की आड़ कैसे - कैसे भेड़िए पनाह लिए हुए हैं। एक बार बात यहीं खत्म हो जाती तो गनीमत थी, लोगों को लगता कि अब इस बाप - बेटे की करतूत सामने आई है तो ये दोनों आगे सुधर जाएंगे, क्योंकि अब तो ये समाज में क्या परिवार में मुंह दिखाने के लायक नहीं रहे। पर सबसे बड़ी हैरानी इस बात पर हुई की बाप के लिए लड़की का इंतजाम उसकी बेटी कर रही थी। जब ऐसी करतूतें सामने आ रही हों तो भला कहां राजनीति पर कलम चलाने की जरूरत थी, पहले तो इन कुकर्मियों का असली चेहरा लोगों के बीच में लाना जरूरी हो गया।

चलिए पहले बात आसाराम की ही कर लेते हैं। यूपी की शाहजहांपुर की बेटी ने जिस तरह इसके कुकर्मों का खुलासा किया है, मुझे लगता है कि उस बेटी ने तमाम दूसरी बेटियों की जिंदगी तबाह होने से बचा ली। वरना एकांतवास और समर्पण की आड़ में आसाराम की  अय्याशी यूं ही चलती रहती। आसाराम के लिए लड़कियों का इंतजाम कौन करता था, ये नाम सुनकर आप भी हमारी तरह चौंक जाएंगे। इसके लायक बेटे और बेटी अपने अपने बाप के लिए लड़कियां पहुंचाने का काम करते थे। इतना ही नहीं इसकी बीबी भी अपने पति के चरणों में लड़की पेश करती थी। ये बात मैं नहीं कह रहा हूं, इसका खुलासा जोधपुर में मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज बयान में आसाराम के ही पूर्व सेवादार अजय कुमार ने किया है। उसका साफ कहना है कि नारायण साई अक्सर आसाराम के लिए लड़की का इंतजाम करता था। लड़के की करतूतों का खुलासा जहां पूर्व सेवादार ने कर दिया, वहीं सूरत की बहनों ने पुलिस में दर्ज कराई गई एफआईआर में कहा है कि उन्हें आसाराम के पास उनकी बेटी ले जाती थी, इतना ही नहीं एक बार जाने से मना कर देने पर आसाराम की बीबी ने उसे तमाचा मारा। आसाराम के कुकर्मों का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वो अय्य़ाशी में इस कदर अंधा है कि लड़की का इंतजाम करने के लिए अपने बेटे, बेटी और पत्नी सब को लगा रखा है।

हालांकि ये सब सुनकर हैरानी होती है। मेरा मानना है कि बेटा अगर खुद भी निकम्मा और अय्याश हो तो एक बार बाप की करतूतों को बर्दास्त कर लेगा, लेकिन बेटी और पत्नी भला ये कैसे बर्दास्त कर सकती हैं कि उसका बाप या पति लड़कियों के साथ अय्याशी करे ? जब से सूरत की दोनों बहनों ने इस परिवार के बारे में खुलासा किया है, ये पूरा परिवार कम से कम मेरी निगाह में तो घृणा का पात्र बन गया है। बताते हैं कि पुलिस को प्राथमिक जांच में आसाराम के खिलाफ पुख्ता सुबूत मिले हैं। इसके बाद अहमदाबाद पुलिस ने कोर्ट से आसाराम का ट्रांजिट वारंट मांगा है। चूंकि लड़की का आरोप  है उसके साथ बलात्कार अहमदाबाद के मोटेरा आश्रम में हुआ, इसलिए इस मामले की जांच अहमदाबाद पुलिस कर रही है। इस बीच आसाराम की न्यायिक हिरासत 25 अक्टूबर तक बढ़ गई है। मतलब ये कि अभी कुछ दिन और इस आसाराम जेल की ही रोटी खानी होगी। वैसे लड़कीबाजी आसाराम की बीमारी है, तो ये साल दो साल अगर जेल में रह गया तो काफी  हद तक उसे इस बीमारी से आराम मिलेगा। बस जरूरत इस बात की है इसे महिला वैद्य से भी दूर रखा जाए।

बात नारायण साईं की करें तो हम कह सकते हैं कि बड़े मियां तो बड़े मियां, छोटे मियां सुहानल्लाह ! खैर जब बाप ही आश्रमों में रंगरेलियां मना रहा है, उसे लड़की की सप्लाई भी बेटा कर रहा है, फिर नारायण साईं तो आसाराम के अनुयायी ही है ना। उसका तो बाप के पदचिन्ह पर चलना हक बनता है। आरोप लगा है कि सूरत की जिन दो बहनों के साथ बलात्कार हुआ, उसमें बड़ी के साथ आसाराम ने और छोटी के साथ नारायण साईं ने मुंह काला किया। इसके पहले  इंदौर की एक लड़की ने भी नारायण साईं पर छेड़छाड़ का गंभीर आरोप लगाया था। हालांकि ये सब आरोप है, सभी मामले न्यायालय में विचाराधीन है। ऐसे में इस मामले में किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। लेकिन ये बात भी सही है कि अगर नारायण साईं सही होता तो वह पुलिस से भागता नहीं। कुछ दिन पहले तक तो वो खुद तमाम न्यूज चैनलों में जाकर अपने बाप आसाराम का बचाव कर रहा था, जब से सूरत की लड़कियों ने रिपोर्ट दर्ज कराई है, ये अचानक लापता हो गया है। पुलिस की नोटिस का जवाब भी नहीं आ रहा है। लुकआउट नोटिस के बावजूद इसका कहीं कोई अता पता नहीं है। सूरत पुलिस ने इसे पूछताछ के लिए जहांगीरपुरा आश्रम में समन भेजा है। ऐसी आशंका है कि नारायण साईं नेपाल भाग गया है। लेकिन पुख्ता तौर पर पुलिस को उसके बारे में कुछ नहीं पता। उधर पुलिस ने सूरत आश्रम में छापेमारी के बाद दावा किया कि बलात्कार के मामले में नारायण साईं के खिलाफ उसे पुख्ता सबूत मिले हैं।

नारायण साईं खुद फरार है, लेकिन पुलिस से बचने और जनता में अपनी छवि बनाए रखने के लिए वो अपने वकील गौतम देसाई के जरिए समर्थकों को संदेश दे रहा है। उसके वकील ने सूरत के एक स्थानीय अखबार में इश्तेहार दिया है कि नारायण को बलात्कार के केस में फंसाया जा रहा है। मैं कहता हूं कि अरे भाई अगर तुम्हें फंसाया जा रहा है तो सामने आकर उसका सामना करो । लड़की के साथ आमने सामने की बात चीत से साफ हो जाएगा कि तुमने बलात्कार किया या नहीं ! भागने से क्या होगा, किसी को ये पता नहीं है कि नारायण इस समय है कहां, वो देश में है या नेपाल  भाग गया है। रही बात अग्रिम जमानत की अर्जी डालने की, तो वो सभी को हक है।  हास्यास्पद तो ये है कि प्रवक्ता नीलम दुबे कह रही हैं कि नारायण कहीं  भाग नहीं हैं, बल्कि वो किसी आश्रम में ध्यान-योग में लीन है। मैडम नीलम जिसके पीछे पुलिस लगी हो, वो भी बलात्कार जैसे गंभीर मामले में, वो ध्यान योग भला क्या करेगा ! माफ कीजिएगा, पर आपसे एक बात जरूर कहूंगा कि बलात्कार जैसे गंभीर मामलो के आरोपी आसाराम और नारायण साईं के चक्कर में पड़कर कम से कम ध्यान और योग को कलंकित मत कीजिए। अगर नारायण साईं सच्चा और अच्छा होगा तो वो खुद पुलिस के सामने आएगा और कहेगा कि मेरी जांच कीजिए, मैं निर्दोष हूं। लेकिन इतना कहने के लिए नैतिक बल की जरूरत है, जो आपके नारायण साईं में नहीं है।

वैसे मैडम नीलम दुबे जी माफ कीजिएगा, मैं महिलाओं के बारे में बिना ठोस जानकारी के कुछ नहीं कहना चाहता, लेकिन एक टीवी चैनल पर चर्चा के दौरान आश्रम के पूर्व सेवादार नाम शायद भोला है, उसने तो आप पर भी गंभीर आरोप लगाएं हैं। उसने तो चैनल पर चर्चा के दौरान यहां तक कहाकि नारायण साईँ ने आपके प्राईवेट पार्टंस पर बाईं ओर दांत काट लिया है, जिसका काफी दिनों तक इलाज चला है। उसका दावा है कि आज भी कटे का निशान वहां मौजूद है। इस दावे की सच्चाई मे मैं नहीं जाना चाहता, पर इतना जरूर कहूंगा कि आप महिला हैं, इसलिए इस संवेदनशील मुद्दे पर बस सच बोलना चाहिए, वरना लोगों का महिलाओं पर से भी भरोसा टूट जाएगा। आप ये बात भले ना स्वीकार करें, पर जब आप आसाराम और नारायण साईं का बचाव करतीं है, तब आपकी बाँडी लँग्वेज से बदबू आती है, पता चलता है कि आप झूठ बोल रही हैं।

खैर जहां आसाराम की बेटी और पत्नी पर गंभीर आरोप लग रहे हों, वहां आपकी चर्चा करना बेमानी है, लेकिन हर मामले में आश्रम की ओर से आप ही मीडिया के सामने आती हैं, इसलिए आपके बारे में दो बातें करना जरूरी हो गया था। हालांकि मैने जो बातें कहीं है, वो आश्रम के ही पूर्व सेवादार यानि भोला के आरोप हैं। हो सकता है कि भोला का दावा गलत हो, लेकिन इसके लिए आपको भी ये साबित करना होगा कि आपके प्राईवेट पार्टस के बाईं ओर दांत से काटने का कोई निशान मौजूद नहीं है और ना ही इसका कोई इलाज कराया गया है। बीजेपी की वरिष्ठ नेता साध्वी उमा भारती ने जब आसाराम की बेटी को अपना प्रिय दोस्त बताया तो मुझे लगा कि आसाराम की बेटी एक सरल और सामान्य महिला होंगी। लेकिन जिस तरह का आरोप उन पर सूरत की दोनों बहनों ने लगाया है, वो बहुत ही गंभीर है। मैं तो ईश्वर से प्रार्थना करूंगा कि कि आसाराम की बेटी और पत्नी पर लगे आरोप सच ना हों, लेकिन ये आरोप अगर सच हैं तो मैं एक बात तो दावे के साथ कह सकता हूं कि देश और दुनिया में इससे ज्यादा निकृष्ट परिवार और कोई नहीं होगा।




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To LoVe 2015: किशोर कुमार - (गायकों का पहला / आखिरी गाना-6)




जन्म : 4 अगस्त, 1929 मृत्यु : 13 अक्टूबर, 1987  
 
Kishor Kumar : First / Last Song




किशोर कुमार जी का गाया पहला प्लेबैक सोलो गीत फिल्म जिद्दी (1948) के लिए रिकॉर्ड किया गया था ! किशोर कुमार कुंदन लाल सहगल के प्रशंसक थे और उनके इस पहले गीत में किशोर दा आप को सहगल साहब की नक़ल करते हुए ही सुनायी देंगे ! सहगल साहब को किशोर दा मानस-गुरू भी कहा करते थे ! गौरतलब है कि बोम्बे टोकीज़ की  फिल्म /a>
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To LoVe 2015: 'कतिया करूँ सारी राती कतिया करूँ '



[अनोखी और दिलचस्प जानकारी - 15]


Song - Katiya Karun Saari Raati Katiya Karun
 

'कतिया करूँ सारी राती कतिया करूँ ...'  प्रेम और समर्पण के ये भाव एक प्रेमिका अपने प्रेमी को गा कर कह रही है कि रात रात भर अपने मन के चरखे पर तेरे प्रेम के धागे कातती रहूँ ! पंजाब के ग्रामीण अंचल से निकले इस  गीत ने कई संगीतकारों को बहुत आकर्षित किया है ! साल 1963 की फिल्म 'पिंड दी कुड़ी' में इस पंजाबी गीत को /a>
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बुधवार, 9 अक्तूबर 2013

To LoVe 2015: पहली हिंदी फिल्म जो तमिल में डब हुई-




अनोखी और दिलचस्प जानकारी-14



First Hindi Film Which Was Dubbed In Tamil






आजकल फिल्मों की डबिंग इस भाषा  से उस भाषा में होना नई बात नहीं है लेकिन अगर हम पुराने दिनों की बात करें जब तकनीक का इतना विकास नहीं हुआ था तब यह बात सामान्य बात नहीं थी ! 1952 में बनी 'आन' फिल्म एक ऐसी फिल्म थी जिसकी लोकप्रियता ने उसे तमिल ,फ्रेंच ,अंग्रेज़ी और जापानी भाषा में डब करवाया .तमिल में डब हुई वह पहली /a>
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रविवार, 6 अक्तूबर 2013

To LoVe 2015: चाँद/चंदा/चन्द्रमा गीत : [विषय आधारित फ़िल्मी गाने]



Moon : Hindi Film Songs







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Aaja Re Chandani Hamari Gali Chand Le ke Aaja, Ja Ja Re /a>
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शनिवार, 5 अक्तूबर 2013

To LoVe 2015: भक्ति/प्रार्थना गीत : [Films Devotional Songs Collection]


विषय आधारित फ़िल्मी गाने - 3
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Devotional Songs of Hindi Films

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To LoVe 2015: चेतक स्मारक या चेटक स्मारक ??


आज फेसबुक पर टहलते हुए एक तस्वीर पर निगाह पड़ी ...
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जिसे मैं वहाँ से यहाँ जस का तस पोस्ट कर रही हूँ ,अगर किसी को आपत्ति हो तो कृपया सूचित करें .सामग्री हटा दी जायेगी 
कृपया बताएँ कि क्या चेतक को स्थानीय भाषा में 'चेटक'  कहा जाता है?
या यह  उनके नाम की वर्तनी- त्रुटि है?
 अगर यह त्रुटि है तो सम्बंधित अधिकारी  कृपया इस पर ध्यान दें और अपेक्षित सुधार करें.
यह स्थल

शुक्रवार, 4 अक्तूबर 2013

To LoVe 2015: Mahatma Gandhi.....साडे National केमिकल लोचा

(गांधी नाम ऐसा है जो कुछ करे या न करे...दिमाग का दही कर ही देता है। मुन्नाभाई के शब्दों में कहूं तो गांधी जी दिमाग में केमिकल लोचा तो शर्तिया करेंगे....इसलिए उनपर लिखना आसान नहीं होता..फिर भी लिख ही डाला...फिर लिखकर तीन दिन में पोस्ट कर ही डाला..पोस्ट लंबी है..पर क्या करुं....बापू ने कहा इससे कम शब्दों में नहीं समाउंगा....सो बापू को जय रामजी बोलनी हैं तो पढ़ लें पूरी पोस्ट...)


दो अक्टूबर का दिन....टीवीरेडियो औऱ अखबार के पन्नों पर महात्मा गांधी काफी हद तक जिंदा थे। लालबहादूर शास्त्री भी कहीं-कहीं नजर आ रहे थे..ठीक उसी तरह जिस तरह आजकल नैतिक साहस से भरपूर इंसान कभी-कभी ही नजर आता है। बड़े शहरों में युवाओं को महात्मा गांधी याद थे...कुछ को लाल बहादूर शास्त्री भी। कई युवा खासकर वो जो राहुल गांधी की उम्र के आसपास के हैं..वो गांधीजी के दर्शन को आज के हिसाब से बदलना चाहते हैं। वैसे गांधी का असली दर्शन क्या है ये अधिकांश लोग नहीं जानते। कहा जाता है कि गांधीजी अगर आज होते तो वो बदले स्वरुप में होते...जबकि हकीकत है कि 100 साल पहले जो महात्मा गांधी ने कहा था....वो कालजयी था। इसलिए 21वीं सदी में गांधीजी काम करने के नए तरीके अपनाते....परंतु नैतिकता के मापदंड नहीं बदलते। 
     
     चार वेदों पर हमारे समाज ने अनगिनत टिकाएं लिखीं...फिर यही समाज बाद के दिनों में अपनी-अपनी टिकाओं के पन्ने को ही सच मानता रहा औऱ ज़ड़ होता चला गया। वही हाल गांधीजी का हुआ। दरअसल बापू ने वही आदर्श अपनाया था जो 5000 साल से भारत में हर महान शख्स अपना रहा है...। अब विंडबना देखिए कि आज कायर औऱ कर्महीन लोग इन मूल्यों की आड़ ले रहे हैं। 20वीं सदी में महात्मा गांधी को मजूबरी का दूसरा नाम बना दिया गया है। बहादूरों की अहिंसा कायरों की अहिंसा कही जाने लगी....जबकि गांधी नाम था एक बदलाव का....एक नाम था जड़ता को तोड़ने वाला।
     बापू की आलोचना करने वालों की तादाद भी कम नहीं है। आलोचना आसानी से की जा सकती है...पर बिना पढ़े आलोचना का कोई अर्थ नहीं है। लोग कहते हैं कि गांधीजी आधुनिक मशीनों का विरोध करते थे। जबकि गांधी आधुनिक मशीनों को इंसान पर तरजीह दिए जाने की सोच के खिलाफ थे। इसलिए बापू की आधुनिक मशीनों को लेकर की गई कड़ी आलोचना को उनके निंदक आधुनिक मशीनों का विरोध बताते हैं।
   
   जहां अच्छे आदर्श हों वहीं पैदा होते हैं नैतिकता औऱ सरलता के प्रतीक...महात्मा गांधी के अनेक अनुयायी थे...उनके सिद्धांतों की एक प्रतिमूर्ती थे-लाल बहादूर शास्त्री....सौम्य, सरल और चमक-दमक से दूर एक इंसान। जिन्होंने पंडित नेहरु के बाद सरलता से देश की बागडोर संभाली। संकट के समय इसी सौम्यता के पीछे अटल इरादो वाला इंसान लोगो को दिखा। शास्त्री जी कि निश्छल मुस्कान पर भरोसा करके जवान से किसान तक एक ही कड़ी में जुड़ गए थे....तो नैतिकता से उत्पन ताकत का अहसास पाकिस्तान जैसे नापाक मुल्क को तब हुआ जब भारतीय फौज लाहौर पर काबिज हो गई।
  
     महात्मा गांधी जानते थे कि भारत में नैतिक बल की कमी है...तभी भारत 1000 साल तक गुलाम रहा..और उससे पहले कई सदियों तक दिगभ्रमित। गांधीजी ने अनेक बार बताया कि कहां से अहिंसा कायरता में तब्दील हो जाती है.....औऱ हिंसा कब अहिंसा के लिए बेहद जरुरी हो जाती है। मगर अफसोस कि इसे खान अब्दुल गफ्फार खां औऱ उनके अनुयायियों के अलावा कम ही लोग समझ सके। कई बार गांधीजी ने कहा कि हम बहादूर नहीं हैं....अधिकतर लोग अहिंसा रुपी बहादूरी नहीं अपना सकते हैं....गांधीजी जिस ओर खुलकर कहते थे..वो कमी आज चारो तरफ दिखती है....उसी की कमी के कारण 21वीं सदी में मंगल पर पहुंचने की तैयारी में लगे भारत में जमीन पर आज भी प्रेमी जोड़े कत्ल कर दिए जाते हैं...दुनिया में आने से पहले कन्या वध कर दिया जाता है...कहीं आम लड़कों का गिरोह सड़क पर चलती लड़की को देखते ही हैवान में तब्दील हो जाता है...तो कहीं तेजाब इंसानियत को झुलसा देती है 
    गांधीजी के उसूलों को अपनाना आसान है...पर उस पर टिके रहना कहीं ज्यादा मुश्किल...इश्क करना आसान है..पर इश्क को सच्चे अर्थ में जीना मुश्किल.....जो ये कर जाता है वो नाम कर जाता है....और जो टूट जाता है वो बिखर जाता है। पिलपिला इंसान बापू का सिद्दांत नहीं अपना सकता...उसके लिए नैतिक बल औऱ कलेजा चाहिए....पर अफसोस कि आज हर परिस्थिती में अधिकतर लोग पिलपिले ही दिख रहे हैं। गांधीजी ने साफ शब्दों में कहा है गुंडागर्दी वहीं चलती है जहां नैतिकता की ताकत नहीं होती....जहां नैतिकता होगी वहां विरोध होगा...जब विरोध होगा तो गुंडागर्दी नहीं चलेगी...औऱ विरोध के दौरान किसी तरह के भी नुकसान के लिए तैयार रहना चाहिए..औऱ कोई सरकार जनता के सक्रिय सहयोग के बिना कुछ नहीं कर सकती....जब ईश्वर उन्हीं की मदद करता है जो अपनी मदद खुद करता है तो ये नश्वर सरकार खुद कैसे आपकी मदद करेगी

   सच में गांधीजी का दर्शन तब जितना जरुरी था....आज भी उतना ही जरुरी है। जरुरत गांधीजी के पीछे चलने की नहीं...गांधी जी के मूल्यों को समझने की है। 
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To LoVe 2015: होली के गीत : (Holi Songs Collection)


विषय आधारित फ़िल्मी गाने - 2
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Biggest Collection of Holi Songs

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गुरुवार, 3 अक्तूबर 2013

To LoVe 2015: महात्मा गांधी जी का लिखा एक गीत : हिंदी सिनेमा के दुर्लभ गाने - 6



Hindi Song : Written By Mahatma Gandhi 





महात्मा गांधी जी का लिखा एक गीत सुनेंगे ? 

जी हाँ आप ने बिलकुल सही पढ़ा, आज जो गीत हम आप को सुनाने जा रहे हैं,  उसके गीतकार महात्मा गांधी जी ही हैं ! सर्वविदित है कि गांधी जी फिल्मों की चमक -दमक से दूर थे उन्हें फिल्में पसंद ही नहीं थीं ! गांधी जी ने अपने जीवन काल में सिर्फ एक ही फ़िल्म - राम राज्य (1943) देखी थी ! 



यह गीत 1969 में रिकॉर्ड हुआ था !/a>
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बुधवार, 2 अक्तूबर 2013

To LoVe 2015: या अली रहम आली : Copied or Inspired by Other song (8)




[Original Song] 

या ग़ाली .. ..[हिंदी में अर्थ--बहुमूल्य  ]


Ya ghali Enshaghal baly

Ya Ghali tea'ab haly 


Ya Ghaali....



    Directed  by Yacub [2003]


Sung by Guitara Band from Kuwait





Rahad Shammoh, one of the band members, confirmed

that they are aware of the Bollywood rip off. They filed case against Pritam.


इस अरबी गाने को बनाने वाले बैंड ने  कुवैत के प्रिन्स के सहयोग /a>
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मंगलवार, 1 अक्तूबर 2013

To LoVe 2015: प्रधानमंत्री जी बस एक बार अंदर झांकिए !

मित्रों कुछ व्यक्तिगत कारणों से महीने भर से ज्यादा समय से मैं ब्लाँग पर समय नहीं दे पा रहा हूं। वैसे समय ना दे पाने की एक वजह मेरे निजी कारण तो हैं ही, लेकिन दूसरी बड़ी वजह रिलायंस जैसी कंपनी पर जरूरत से ज्यादा भरोसा करना भी रहा है। पहले मैं MTS का डेटा कार्ड इस्तेमाल कर रहा था, पता चला कि इस कंपनी के तमाम जगहों पर लाइसेंस रद्द हो चुके हैं, लिहाजा ये कार्ड देश के एक बड़े हिस्से में काम करना ही बंद कर दिया। बाद में मैने कुछ मित्रों की सलाह पर रिलायंस का 3 जी डेटा कार्ड लिया, ये कार्ड दिल्ली में तो फिर भी ठीक काम करता है, लेकिन जैसे ही दूसरी जगह पहुंच जाइये, काम करना बंद कर देता है। इसके बाद तो बेवजह अंबानी बंधुओं के लिए मुंह से गाली निकलती है। पिछले महीने मैं 20 से 25 दिन लखनऊ में रहा हूं। अब बताइये देश के इतने बड़े राज्य की राजधानी लखनऊ में रिलायंस का डेटा कार्ड इसलिए काम नहीं कर रहा है, क्योंकि यहां 3 जी की सुविधा नहीं है। कुछ नहीं हो सकता इस शहर का। हैरानी इस बात की होती है कि अदब के इस शहर में हर चीज की मांग के लिए शोर मचते देखता हूं, पर तकनीकि खामियों को दूर करने या फिर नई तकनीक का लाभ शहर को मिले, इसके लिए ये शहर गूंगों-बहरों की बस्ती के अलावा कुछ भी नहीं है। खैर छोड़िए ! इस शहर पर उलझा रहूंगा तो जो बात कहने आया हूं, वो कहीं खो जाएगा। बहरहाल अब कोशिश होगी कि ब्लाँग पर नियमित बना रहूं, आप सबके ब्लाँग भी काफी समय से नहीं देख पाया हूं, वहां भी जाऊं !

आज बात की शुरूआत चटपटे नेता लालू यादव से। चारा घोटाले में आरोप सिद्ध हो जाने के बाद लालू यादव जेल चले गए। 17 साल से ये मामला न्यायालय में विचाराधीन था। अगर पिछले चार पांच साल को छोड़ दें तो इस मुकदमे के चलने के दौरान लालू बिहार और केंद्र की सरकार में अहम भूमिका निभा रहे थे। ये लोकतंत्र का माखौल ही है कि भ्रष्टाचार का आरोपी व्यक्ति यहां मंत्री बना बैठा रहता है। होना तो यही चाहिए कि जब तक नेता आरोपों से बरी ना हो जाए, उसे मंत्री, मुख्यमंत्री बिल्कुल नहीं बनाया जाना चाहिए। बहरहाल लालू यादव अब सही जगह पर हैं, उन्हें यहीं होना चाहिए। जो हालात हैं उसे देखकर हम कह सकते हैं कि अगर सुप्रीम कोर्ट की चली तो आने वाले चुनावों के बाद संसद और विधानसभाओं की सूरत थोड़ी बदली हुई होगी। क्योंकि तब यहां भ्रष्ट, बेईमान, अपराधी, हत्यारे, बलात्कारी नहीं आ पाएंगे। अब देखिए शिक्षक भर्ती घोटाले मे हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला जेल चले गए, मेडीसिन खरीद घोटाले में रसीद मसूद जेल गए, चारा घोटाले में ही बिहार के एक और पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र भी जेल भेजे गए। खैर जो नेता अभी तक जेल जा रहे हैं, सच्चाई तो ये है कि अब वो राजनीति के हाशिए पर हैं, उनकी कोई खास पूछ रही नहीं अब सियासत मे। हालांकि लालू जरूर कोई भी करिश्मा करने की हैसियत रखते हैं। जेल जाने के दौरान लालू ने कहा "मैं साजिश का शिकार हो गया" । मुझे भी लगता है कि वो साजिश के शिकार हो गए। मेरा मानना है कि मायावती और मुलायम सिंह की तरह अगर लालू के पास भी 19 - 20 सांसद होते, तो यही सरकार और प्रधानमंत्री उनके तलवे चाटते फिरते। यूपीए (एक) की सरकार में लालू की हैसियत किसी से छिपी नहीं है।

बहरहाल इन दिनों घटनाक्रम बहुत तेजी से बदल रहा हैं। आपने देखा ना कि राहुल गांधी ने एक शिगूफा छोड़ा और खबरिया चैनलों से लेकर देश दुनिया के सारे अखबार राहुल की तस्वीरों से रंग गए। लेकिन मुझे चैनल और अखबारों की रिपोर्ट देखकर काफी हैरानी हुई । हैरानी इस बात पर हुई कि क्या इतना बड़ा फैसला सरकार ने कांग्रेस पार्टी की मर्जी के बगैर ले लिया गया ? अगर इस फैसले में पार्टी की राय थी तो सवाल उठता है कि क्या पार्टी के उपाध्यक्ष राहुल गांधी से इस मामले में कोई सलाह मशविरा नहीं किया गया ? सवाल ये भी क्या राहुल गांधी को पार्टी का उपाध्यक्ष बनाकर सिर्फ उनका कद बढ़ाया गया है, उनसे जरूरी मसलों पर कोई सलाह मशविरा नहीं की जाती है ! या फिर ये समझा जाए कि राहुल गांधी की विशेषता सिर्फ ये है कि वो गांधी परिवार में जन्में है, इसलिए उनका सम्मान भर है, उनकी राय पार्टी या सरकार के लिए कोई मायने नहीं रखती ? यही वजह तो नहीं कि उनसे किसी मसले पर रायशुमारी नहीं की जाती। अरे भाई मैं एक तरफा बात किए जा रहा हूं,  पहले मैं आपसे पूछ लूं कि मुद्दा तो आपको पता है ना ? बहुत सारे लोग सरकारी काम से बाहर या फिर निजी टूर पर रहते हैं, इसलिए हो सकता है कि उन्हें  ना पता हो कि राहुल ने ऐसा क्या तीर चला दिया, पूरी व्यवस्था ही हिल गई है।

दरअसल आपको पता होगा कि 10 जुलाई 13 को सुप्रीम कोर्ट ने राजनीति में अपराधियों को रोकने के लिए एक महत्वपूर्ण आदेश दिया। इसमें कहा गया कि अगर किसी जनप्रतिनिधि को दो साल या इससे अधिक की सजा सुनाई जाती है तो उसकी सदस्यता तत्काल प्रभाव से समाप्त हो जाएगी। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का देश भर में स्वागत हुआ। कहा गया कि इससे राजनीति में सुचिता आएगी, अपराधी, भ्रष्ट नेताओं पर लगाम लगाया जा सकेगा। देश की आम जनता और विपक्ष ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का खुले मन से स्वागत किया। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से केंद्र की सरकार खुद को असहज महसूस करने लगी। सरकार को मालूम है कि अगर कोर्ट के आदेश का पालन हुआ तो केंद्र की ये सरकार किसी भी समय मुंह के बल जा गिरेगी, क्योंकि दो एक पार्टी को छोड़ दें तो ज्यादातर पार्टी के नेताओं पर भ्रष्टाचार और अन्य गंभीर अपराधों से जुड़े कई मामले कोर्ट में विचाराधीन हैं। वैसे भी पूरा देश जानता जानता है कि आज अगर केंद्र सरकार के हाथ में सीबीआई ना हो, तो ये सरकार कब का गिर चुकी होती। अगर मैं ये कहूं कि इस सरकार को सीबीआई  चला रही है तो ये कहना बिल्कुल गलत नहीं होगा। इस सरकार को लूटेरे, चोर, भ्रष्ट नेताओं का आगे भी समर्थन लेना होगा, यही सोचकर अंदरखाने विचार मंथन शुरू हो गया।

मेरी तरह आप भी  देख रहे होंगे कि जैसे-जैसे इस सरकार का कार्यकाल समाप्त होने को आ रहा है, अपने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का असली और बदसूरत चेहरा भी सामने आता जा रहा है। आमतौर पर मेरी आदत गाली गलौज करने की नहीं है, पर अब प्रधानमंत्री का नाम जब भी आता है, वाकई इनके लिए बहुत गाली निकलती है। पता नहीं मुझे क्यों लगता है कि मनमोहन सिंह महज एक इंसानी शरीर का पुतला भर हैं, इनके भीतर अपना कुछ भी नहीं है। इस पुतले को अपने और अपने पद के मान, सम्मान, इमान किसी भी चीज की कोई चिंता नहीं है। बस कुर्सी पर बने रहने के लिए सब कुछ 10 जनपथ में गिरवी रख चुके हैं। कई बार मन में एक सवाल उठता है कि क्या प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह सचमुच अस्वस्थ हैं या फिर ऐड़ा बनकर पेड़ा खा रहे है, ये बात मैं समझ नहीं पा रहा हूं। अब देखिए ना दो दागी मंत्री अश्वनी कुमार और पवन बंसल से इस्तीफा लेने  की बारी आई, तो पार्टी की ओर से ऐसा संदेश दिया गया कि सोनिया गांधी तो दोनों मंत्रियों को भगाना चाहती हैं, पर मनमोहन सिंह उन्हें चंड़ीगढ़ का होने की वजह से बचा रहे हैं। दोनो मंत्रियों के इस्तीफे का मामला तूल पकड़ रहा था, प्रधानमंत्री की किरकिरी हो रही थी, लेकिन पूरी पार्टी खामोश रही। बाद अचानक सोनिया गांधी 10 जनपथ से निकलीं और प्रधानमंत्री निवास यानि 7 आरसीआर पहुंच गईं। सोनिया के सख्त तेवर के बाद प्रधानमंत्री ने दोनों से इस्तीफा ले लिया ! दागी  मंत्रियों को कौन बचा रहा था ? इस बात की जानकारी आज तक किसी को नहीं हुई।

अब एक बार फिर संदेश दिया जा रहा है कि चोरों, दागियों , अपराधियों, जेल में बंद नेताओं के मददगार हैं अपने प्रधानमंत्री। इन पर कुर्सी का ऐसा भूत सवार है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश को बदलने के लिए अध्यादेश लाने से भी नहीं बाज आते। हुआ क्या, कल के लड़के ने प्रधानमंत्री की अगुवाई में लिए गए कैबिनेट के फैसले को "नानसेंस" कह कर संबोधित किया। राहुल ने ये कह कर कि " मेरी निजी राय में अध्यादेश बकवास है, इसे फाड़कर फैंक देना चाहिए"  तूफान खड़ा कर दिया।  बहरहाल राहुल की निजी राय के बाद जैसी हलचल देखी जा रही है, उससे  प्रधानमंत्री और उनके कैबिनेट की हैसियत का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है । वैसे एक बात है राहुल को जिसने भी ये सलाह दी वो है तो बहुत ही शातिर राजनीतिबाज ! जानते हैं क्यों ? सब को पता है कि इस समय राष्ट्रपति भवन में प्रतिभा  देवी सिंह पाटिल नहीं बल्कि महामहिम प्रणव दा हैं । मेरा दावा है कि इस अध्यादेश पर प्रणव दा एक बार में तो हस्ताक्षर बिल्कुल नहीं कर सकते थे ! सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों के जरिए संभवत: ये संदेश भी उन्होंने सरकार तक पहुंचा दिया था। राष्ट्रपति भवन से अध्यादेश बिना हस्ताक्षर के वापस आता तो सरकार और कांग्रेस पार्टी और उसके नेता कहीं मुंह दिखाने लायक नहीं रहते।

बीजेपी पहले से ही इसका विरोध कर रही थी। यहां तक की आडवाणी की अगुवाई में एक प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति से मिलकर आग्रह भी कर चुका था कि इस अध्यादेश पर वो अपनी मुहर ना लगाएं। सच्चाई ये है कि राष्ट्रपति भवन और विपक्ष के तेवर से कांग्रेस खेमें में बेचैनी थी। सब तोड़ निकालने में जुट गए थे कि कैसे इस अध्यादेश को वापस लिया जाए। बताते हैं कि राहुल गांधी ने जिस तरह अचानक प्रेस क्लब पहुंच कर रियेक्ट किया, वो एक स्वाभाविक प्रतिक्रिया नहीं थी, बल्कि एक रणनीति  के तहत राहुल को सामने किया गया। कांग्रेस नेताओं ने जानबूझ कर राहुल को कड़े शब्द इस्तेमाल करने को कहा। इस बात पर भी चर्चा हुई कि अपनी ही सरकार के खिलाफ कड़े तेवर दिखाने से प्रधानमंत्री नाराज हो सकते  हैं, इतना ही नहीं यूपीए में शामिल घटक दल भी अन्यथा ले सकते हैं। इस पर कांग्रेस के रणनीतिकारों ने साफ किया कि ये एक ऐसा मुद्दा है कि इस पर कोई भी खुलकर सामने नहीं आ सकता। जो अध्यादेश का समर्थन करेगा, जनता उससे किनारा कर लेगी। राहुल अगर  अपनी ही सरकार को "नानसेंस" कहते हैं तो सांप  भी मर जाएगा और लाठी भी नहीं टूटेगी। जहां तक प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की नाराजगी का सवाल है, कहा गया कि कई बार इससे भी गंभीर टिप्पणी उनके बारे में हो चुकी है और वो नाराज नहीं हुए। इस बार तो उनकी अगुवाई में इतना गंदा काम हुआ है कि इस मुद्दे पर नाराज हुए तो फिर कहीं मुंह दिखाने के काबिल नहीं रहेंगे।

बताया जा रहा है कि सब कुछ तय हो जाने के बाद राहुल को तीन लाइन की स्क्रिप्ट सौंपी गई और कहा गया कि उन्हें ये याद करना है और आक्रामक तेवर में मीडिया के सामने रखना है। मीडिया के सवाल का जवाब नहीं देना है। अगर कोई सवाल हो भी जाए और जवाब देने की मजबूरी हो तो इसी बात को दुहरा देना है। बताया गया कि गंभीर मामला है, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह हमेशा की तरह इस बार भी बाहर हैं, इसलिए नपे तुले शब्दों में ही हमला होना चाहिए, क्योंकि हमारे प्रधानमंत्री को गुस्सा कम आता है, लेकिन जब आता है तो कुछ भी कहने से नहीं चूकते। वैसे मेरा एक सवाल है, प्रधानमंत्री जी विपक्ष ने आपको भ्रष्ट कहा तो नाराज हो गए, आपने संसद में कहाकि दुनिया के किसी दूसरे देश में प्रधानमंत्री को वहां का विपक्ष भ्रष्ट नहीं कहता है। आपकी बात सही है, लेकिन मुझे ये जानना है कि दुनिया के किसी दूसरे देश में अपनी ही पार्टी का नेता अपने प्रधानमंत्री को " नानसेंस " कहता है क्या ? प्लीज आप जवाब मत दीजिए, क्योंकि इसका आपके पास कोई जवाब है भी नहीं ।

चलते - चलते

मैं प्रधानमंत्री होता तो अमेरिकी से ही इस्तीफा भेजता और वहीं ओबामा से टू बीएचके का एक फ्लैट ले कर बस जाता, देशवासियों को अपना काला चेहरा नहीं दिखाता ।



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To LoVe 2015: गायिका कमल बारोट - [गुमनाम गायक/गायिका - 6]



Singer Kamal Barot 






हिंदी फिल्मों की पार्श्वगायिकाओं में एक भूला-बिसरा सा नाम - 'कमल बारोट',
जिनका नाम सुनते ही सबसे पहले में जो गाना याद आता है वह है - 'हँसता हुआ नूरानी चेहरा' जिसे उन्होंने लता के साथ गाया है !
'दादी अम्मा दादी अम्मा मान जाओ' इस गीत में भी उनका साथ आशा ने दिया है ! उनकी विशेषता यह थी कि वह एक छोटे बच्चे के लिए, एक किशोरी के लिए या फिर किसी अल्हड शरारती युवती के लिए /a>
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To LoVe 2015: तलत महमूद - (गायकों का पहला / आखिरी गाना-5)



जन्म : 24 फरवरी, 1924 

मृत्यु : 9 मई, 1998 



Talat Mehmood : First / Last Song 



तलत महमूद जी का पहला रिकार्डेड गाना 

एक गैर फ़िल्मी गीत था 

जिसे सुबल दासगुप्ता ने संगीतबद्ध किया था : 

गीत - 'सब दिन एक समान नहीं था ……' 



Song - Sab Din Ek Samaan Nahin Tha 

Music - Subal Dasgupta

 
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फिल्म राजलक्ष्मी के लिए 1945 में रिकॉर्ड हुआ - 
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