बुधवार, 31 अगस्त 2011

खेल के नाम पर जनता के विशवास के साथ खेल



जी हाँ दोस्तों देश में खेल के नाम पर जनता के साथ विश्वासघात का खेल किया जा रहा है .सारा देश जानता है के कोमन वेल्थ के नाम पर भाजपा के समर्थन से बने सुरेश कलमाड़ी ने देश में क्या खेल किया हिया इसके बाद शरद पंवार केसे क्रिकेट में बने और फिर अभी राजस्थान में सी पी जोशी पर जब कोंग्रेस के ही सांसद महेश जोशी ने हाथ साफ़ किया तो कोंग्रेस के सी पी जोशी कुछ वोटों के लियें ललित मोदी और वसुंधरा के सामने इंग्लेंड होने पर भी केसे गिडगिडाए............क्रिकेट सट्टा हो चाहे मेच फिक्सिंग हो चाहे ललित मोदी का क्रिकेट घोटाला हो सभी मामलों में देश की जनता के सामने एक सवाल है के देश की खेल संस्थाएं कहां से कितना रुपया लेती है और कहां इस रूपये को खर्च करती हैं क्या वोह रुपया जनहित में खर्च है या फिर मनामाना खर्च हो रहा है .इस बार जनता की आवाज़ पर यह पहल खुद केंद्र सरकार के खेल मंत्री अजय माकन ने किया बस अजय माकन ने संसद से चाहा के खेल संस्थाओं की स्वायत्त बरकरार रखते हुए उन्हें सिर्फ इतनी सी पाबंदी लगा दें के उनकी आमदनी और खर्च का सच वोह जनता को बता दें और यह संस्थाएं देश से कुछ भी ना छुपायें इसलियें इन्हें आर टी आई के दायरे में ले लें बस फिर क्या था भाजपा ..कोंग्रेस .ऍन सी पी एक हो गए और चोर चोर मोसेरे भाई बन कर खेल में हो रहे भ्रष्टाचार के सच को उजागर करने से केसे रोका जाए सी मामले में अपनी सारी ताकत झोंकने लगे अब सरकार और केंद्र के खेल मंत्री देश के खेलों के नाम पर खेल संस्थाओं के इस भ्रस्ताचार और भ्रष्टाचार एकता के आगे बे बस हैं ...............अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान /a>
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To LoVe 2015: Asteroid discovered by Delhi boys :Create History in Sept 2011



First of all what is Asteroid:

Asteroids are a class of Small Solar System Bodies in orbit around the Sun. They have also been called planetoids, especially the larger ones.(From Wiki)

 Main News it is Also consider as GK news okay guys..

  • Vaibhav Sapra and Sharanjeet Singh Both from  Bal Bharati Public School, Pitampura, have discovered a Main Belt Asteroid  as part of NASA project, ready for create and save name in history. 

  • Both are Science students.


  • This research is conducted by non-government organisation called Science Popularisation Association of Communicators and Educators (SPACE) in collaboration with the United States-based International Astronomical Search Collaboration, the All-India Asteroid Search Campaign-2011.

    • This is done  in the month of August.

    • It involved school and college students from across the country working with a special software to discover asteroids. 

    • The students, divided into groups of two each, collaborated and analysed their data for asteroid hunting.

    • It was a  challenging task for Vaibhav and Sharanjeet, to jointly detect the asteroid from a series of pictures of the sky.

 Sharanjeet told to the media that, it was the three-month-long campaign.
  • it involved software training, studying and spotting moving objects on the highly-advanced Astrometrica software. 

  • We had to assume the shape of the asteroid. 

  • For each image, there was a graph which we had to jointly analyse and prepare a report.

  •  Once the report was completed, the duo despatched it to renowned astrophysicist and head of International Astronomical Search Collaboration Miller Patrick. 

    • Since there is an official confirmation of discovering “2011QM14,” the name of the new asteroid, both Vaibhav and Sharanjeet will now have to wait till its orbit is completely known



    source form TheHindu
     For full news click here

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To LoVe 2015: एक अकेला पत्ता



एक पेड़ से टूटा हुआ, निरुपाय, हताश, निपट अकेला पत्ता  क्या सन्देश देना चाहता है. पढिये यहाँ:  एक पत्ता



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To LoVe 2015: २६ अगस्त के आन्दोलन का एक और अनदेखा बलिदान



मौत से पहले दिनेश ने पूछा था, ”टीम अन्ना का कोई क्यों नहीं आया?”
अब आप जानना चाहेंगे की कौन दिनेश?
हम बात कर रहे हैं अन्ना हजारे जी के सशक्त लोकपाल के समर्थन में आत्मदाह करने वाला दिनेश.

दिनेश यादव का शव जब बिहार में उसके पैतृक गांव पहुंचा तो हजारों की भीड़ ने उसका स्वागत किया और उसकी मौत को बेकार नहीं जाने देने’ का प्रण किया। लेकिन टीम अन्ना की बेरुखी कइयों के मन में सवालिया निशान छोड़ गई। सवाल था कि क्या उसकी जान यूं ही चली गई या उसके बलिदान’ को किसी ने कोई महत्व भी दिया?

गौरतलब है कि सशक्त लोकपाल पर अन्ना हजारे के समर्थन में पिछले सप्ताह आत्मदाह करने वाले दिनेश यादव की सोमवार को मौत हो गई थी। पुलिस के मुताबिक यादव ने सुबह ... २६ अगस्त के... (Complete)

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To LoVe 2015: एक लघुदीप की लौ





इक खामोश अँधेरी रात की, इक रोशनी कहती है,
ये जो चमक है, उस लघुदीप की कहानी कहती है,
जिसकी लौ में जिजीविषा की, छोटी झलक दिखती है,
और इस अथाह अँधेरे से, लड़ने की कोशिश दिखती है॥

ये रात से जंग जीत लेने की, ख्वाइश दिखती है,
मजलूम की ईश्वर से की गयी, फरमाइश लगती है,
इस कालिमा में भले ही, बस ... एक लघुदीप की लौ (Complete)

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To LoVe 2015: Air India landing in mumbai under emergency conditions

on august 31 the last days of August Month.



Main crash POINTS are:
  • Air India plane from Jeddah with 286 passengers  landed under emergency conditions at the airport in Mumbai due to hydraulic failure.

  • All the passengers on the Jeddah-Mumbai flight were safe, an airline spokesperson

  • suspected hydraulic failure at around 13.45 hrs. All the passengers deplaned safely,” the spokesperson told PTI.

  • Airbus 330 aircraft landed safely at 1.38 p.m. The alert was withdrawn at 2.13 p.m.


     

  • The incident comes a day after an Air India plane with 123 passengers and crew landed under emergency conditions at the Thiruvananthapuram airport after a minor defect was detected in its hydraulic system.



Source:thehindu
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To LoVe 2015: INDIA:1.5 lakh engineering teachers shortage



The nation faces a shortage of 1.5 lakh engineering teachers. Abdul Latheef Naha (Write of TheHindu ) looks at the state of colleges with inadequate number of faculty.

Main points are:

  • Higher education in the country, particularly engineering education, is facing a crisis.

  • It is pulling on with half the teacher strength it requires. 

  • The government pressed a red button the other day when it was revealed in Parliament that the country faced a shortage of more than 3,00,000 teachers in its institutions of higher learning. 

  • In engineering education alone, the shortage is more than 1,50,000.

  • What is more shocking is the increase in the faculty shortage to 54 per cent from the 40 per cent a few years ago.

  • The Union Ministry of Human Resource Development has permitted the 15 Indian Institutes of Technology (IITs), premier engineering institutes in the country, to appoint non-resident Indians (NRIs) and people of Indian origin (PIOs) as permanent faculty as part of measures to tide over the teacher shortage. Foreign nationals, however, are not allowed permanent appointment.


  • From 30 per cent to 50 per cent of the teaching posts are lying vacant in the country’s top engineering institutions. 

  • The situation is worse in hundreds of private self-financing colleges.




Source from TheHINDU


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To LoVe 2015: हिंदू मुस्लिम की मुहब्बत का ताजमहल है देवबंद

देवबंद। देवबंद में ईद की नमाज़ सकुशल संपन्न हुई।

देवबंद की ईदगाह में क़ारी उस्मान साहब की इमामत में ईद की नमाज़ 9 बजकर 30 मिनट पर अदा हुई।
जामा मस्जिद में मौलाना सालिम क़ासमी साहब की इमामत में 9 बजे सुबह अदा हुई जबकि मस्जिद ए रशीद में सुबह 7 बजकर 15 मिनट पर ही ईदुल फित्र की नमाज़ अदा की जा चुकी थी।
इस मौक़े पर शान्ति व्यवस्था के लिए पुलिस प्रशासन की ओर से उचित प्रबंध किए गए।
देवबंद की सरज़मीन प्यार मुहब्बत की सरज़मीन है। ईदगाह के बाहर ही बहुत से पंडाल लगाकर हिन्दू भाई बैठ जाते हैं और जैसे मुसलमान भाई नमाज़ अदा करके निकलते हैं तो वे उनसे गले मिलकर ईद की मुबारकबाद देते हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं के अलावा राजनीतिक पार्टियों के लीडर भी ईद मिलन के आते हैं और दिन भर अलग अलग जगहों पर ईद मिलन के औपचारिक और अनौपचारिक कार्यक्रम चलते ही रहते हैं बल्कि कई बड़े आयोजन तो कई दिन बाद तक होते रहते हैं।
इस साल भी प्यार मुहब्बत की यही ख़ुशनुमा फ़िज़ा देखने में आ रही है। कोई हिन्दू भाई अपने मुसलमान दोस्तों के घर ईद मिलने जा रहा है और कहीं कोई मुसलमान अपने हिन्दू दोस्तों के घर शीर लेकर जा रहा है और उसका मक़सद उनकी मां से दुआ प्यार पाना भी होता है।
दुनिया भर में देवबंद की जो छवि है,  वह यहां आकर एकदम ही उलट जाती है।
बड़ा अद्भुत समां है।
आम तौर पर कुछ लोग कहते हैं कि धर्म नफ़रत फैलाता है और अपने अनुयायियों को संकीर्ण बनाता है लेकिन ईद के अवसर पर हर जगह यह धारण ध्वस्त होते देखी जा सकती है और देवबंद का आपसी सद्भाव देख लिया जाए तो बहुत लोग यह जान जाएंगे कि इंसान को इंसान से जोड़ने वाली ताक़त सिर्फ़ धर्म के अंदर ही है।
जो लोग धर्म के बारे में लिखने पढ़ने के शौक़ीन हों या फिर वे सामाजिक संघर्ष के विराम पर चिंतन कर रहे हों, उन्हें चाहिए कि वे एक नज़र देवबंद के हिन्दू मुस्लिम रिलेशनशिप का अध्ययन ज़रूर कर लें।
आगरा में अगर पत्थर का ताजमहल है तो यहां सचमुच मुहब्बत का ताजमहल है।
हिंदू मुस्लिम की मुहब्बत का ताजमहल है देवबंद।

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To LoVe 2015: RBI worry about Inflation hike 2011




: ( Inflation High Human Low : )

What is inflation?
  • Simply put, inflation is the sustained increase in the overall price level. Relative change in prices of goods and services is a desirable attribute of market economy as it reflects productivity changes as well as demand and supply conditions. 

  • However, when this process transforms into an acceleration of the overall price level, we need to worry as inflation imposes many socio-economic costs.



(Below Speech by Deepak Mohanty, Executive Director, Reserve Bank of India, delivered at the Motilal Nehru National Institute of Technology (MNNIT), Allahabad on 13th August 2011)

  • The headline wholesale price index (WPI) inflation averaged 9.6 per cent in 2010-11 as compared with 5.3 per cent per annum in the previous decade.

  •  READ THIS CAREFULLY: -- " Similarly, the average consumer price inflation, measured by the consumer price index for industrial workers (CPI-IW), was even higher at 10.5 per cent in 2010-11 as compared with 5.9 per cent per annum in the previous decade. Moreover, this elevated level of inflation also persisted through the first quarter of 2011-12. In response to inflationary pressures, the Reserve Bank has raised the policy repo rate 11 times bringing it up from a low of 4.75 per cent in March 2010 to 8.00 per cent by July 2011. It is expected that inflation should come down towards the later part of this year. "

  • Why has inflation been so high and persisted for so long? 

  • This is the theme of my talk today. In my presentation, I propose to address the following questions: Is India an outlier among major countries in terms of recent inflation performance? Has the inflation process changed? What are the causal factors – global and domestic as well as supply and demand? I will conclude with some thoughts on managing the inflation dynamics on the way forward.




Source from RBI or click here


Is India an outlier in the inflation performance among major countries?
It is important to appreciate the global backdrop in which we are experiencing a resurgence of inflation now. In the last decade, inflation was low, both in advanced countries as well as in emerging and developing economies till the global financial crisis unfolded. Consequently, global economy got into a recession and global output declined by 0.5 per cent in 2009. However, global output growth rebounded to 5.0 per cent in 2010.
As the global economy recovered from the worst effect of the global financial crisis, inflation picked up in emerging and developing economies. This was because the global recovery was largely driven by emerging market economies (EMEs) what was termed as a two-speed recovery – a faster growth in EMEs accompanied by a slower growth in advanced economies. As output gaps closed, there was increasing inflationary pressure in EMEs, particularly in Asia. According to the International Monetary Fund (IMF), consumer price inflation in developing Asia almost doubled from 3.1 per cent in 2009 to 6.0 per cent in 2010 and is projected to be around the same level in 2011. Latest data suggest that inflation in rapidly growing BRICS1 remains elevated (Table 1).









Table 1: Inflation* in BRICS Countries
Country
2010 (Average)
2011 (Latest)@
Brazil
5.0
6.9
Russia
6.9
9.0
India
9.6
9.4
China
3.3
6.5
South Africa
4.3
5.0
* WPI for India and CPI for other countries.
@ June/July (year-on-year)
Global factors
With recovery, global commodity prices rebounded given the higher level of commodity intensity of growth in EMEs. There was also an element of financialisation of commodities given the global excess liquidity2. Crop loss due to adverse weather conditions in many parts in the world coupled with increased diversion of foodgrains towards biofuel exerted added pressure on global food prices. Thus, global commodity prices including food prices rose sharply. For example, the IMF Commodities Index rose by 24 per cent in 2010 on top of an increase of 43 per cent in 2009. It further rose by 20 per cent in December 2010–April 2011, before moderating by about 2 per cent during June–July 2011. Notwithstanding some softening in the last few months, it is important to recognize that the current level of commodity prices is almost double of that two and half years ago (Table 2).









Table 2: Global Commodity Prices
(IMF Primary Commodity Index: 2005 = 100)
Dec-08
Dec-09
Dec-10
Apr-11
Jul-11
All Commodities
98.4
140.9
174.7
209.9
198.9
Food
119.6
139.5
176.4
190.9
180.3
Beverage
132.5
176.7
192.6
216.6
210.0
Agricultural Raw Materials
87.6
111.2
146.9
171.6
161.5
Metals
107.5
176.8
233.6
250.1
242.2
Energy
91.6
137.9
167.1
212.6
200.7
The increase in commodity prices has affected different countries differently depending on whether they are net importers or exporters of commodities. India being a net importer of commodities, the adverse impact on domestic inflation has been stronger. Inflation increased in developing and emerging economies with a combination of closing of output gaps and sharp increase in commodity prices. In this regard, India is not an exception. But the level of inflation in India has been high compared to those in many EMEs. This suggests that apart from global factors, domestic factors have had a significant influence on the inflation trajectory in India.


Has the inflation process changed?
 

In India, we have multiple price indices – 6 consumer price indices and a wholesale price index (WPI). While the Reserve Bank examines all the price indices both at aggregate and disaggregated levels, changes in the WPI is taken as the headline inflation for policy articulation. Within the WPI, non-food manufactured products inflation is considered the core inflation.




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To LoVe 2015: Good News For PUNJAB PASSPORT SERVICE

Main Highlights are:

  • Three New Passport Sewa Kenderas two in Jalandhar .

  • One in Hoshiarpur would be opened in Jalandhar and Hoshiarpur to facilitate the people in first week of the October.

  • This was stated by Passport Officer Jalandhar Parneet Singh while talking to newsmen after attending a function in local Blood Bank here on Tuesday.

  • All these SEWA KENDRAS Operated by TCS.

    • Accept ONLY online Application.

    • Good news is that now it take only 3 days in order to renewal the Passport while in Past it take 15-to-20 days. :)


So Enjoy the Passport service. this will surely lead to success and  Corruption free.

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मंगलवार, 30 अगस्त 2011

To LoVe 2015: ईद की नमाज़ से पहले ग़रीबों को फ़ित्रा दे दीजिए



ईद की नमाज़ से पहले फ़ित्रा देने के बारे में

ईद अरबी शब्द है, जिसका मतलब होता है ख़ुशी। सो ईद से ख़ुशी जुड़ी हुई है। ईदुल्फित्र से रोज़े और फ़ित्रे की ख़ुशी। फ़ित्रा वह रक़म है जो ईदुल्फित्र की नमाज़ से पहले अदा की जाती है। यह रक़म ग़रीबों को दी जाती है, जिससे वह भी ईद मना सकें।
जब तक रोज़ेदार फ़ित्रा अदा नहीं करेगा, अल्लाह उसके रोज़े भी क़ुबूल नहीं करेगा। सो मुसलमान पर लाज़िम है कि ईद की नमाज़ से पहले पहले फ़ित्रा अदा कर दे वर्ना तो लौटकर ज़रूर ही अदा कर दे। यह एक निश्चित रक़म होती है जो अलग अलग साल में गेहूं की क़ीमत के मददे नज़र अलग अलग होती है। इस्लामी विद्वान हर साल हिसाब निकाल इसकी घोषणा करते हैं। यह रक़म मुस्लिम और ग़ैर मुस्लिम हरेक को दी जा सकती है, बस आदमी ग़रीब होना चाहिए। इसी के साथ यह भी एक ख़ास बात है कि पैग़ंबर हज़रत मुहम्मद साहब सल्ल. ने कहा है कि मेरी औलाद को ज़कात और फ़ित्रा वग़ैरह मत देना, यह मेरी औलाद पर हराम है अर्थात वर्जित है। अक्सर मुसलमान इसी माह में अपनी ज़कात भी निकालते हैं। मुसलमानों को सदक़ा देने की ताकीद भी क़ुरआन और हदीस में बहुत की गई है और कमज़ोर आय वर्ग के लोगों को ‘क़र्ज़ ए हसना‘ देने के लिए भी बहुत प्रेरणा दी गई है।
‘क़र्ज़ ए हसना‘ की शक्ल यह होती है कि क़र्ज़ देने वाला आदमी अल्लाह की रज़ा की ख़ातिर जब किसी ज़रूरतमंद को क़र्ज़ देता है तो न तो वह उस पर सूद लेता है और न ही कोई अवधि निश्चित करता है बल्कि यह सब वह क़र्ज़ लेने वाले पर छोड़ देता है कि वह जैसे चाहे और जब चाहे क़र्ज़ लौटाए और न चाहे तो न लौटाए। इन सबके बदले में अल्लाह का वादा है कि वह ईमान वालों को दुनिया में इज़्ज़त की ज़िंदगी देगा और मरने के बाद जन्नत की ज़िंदगी। हक़ीक़त यह है कि अगर दुनिया के मालदार इस तरीक़े से ग़रीबों और ज़रूरतमंदों की मदद करने लगें तो दुनिया से भूख और ग़रीबी का ख़ात्मा हो जाएगा और जो जुर्म इनकी वजह से होते हैं वे भी दुनिया से ख़त्म हो जाएंगे। अमीर और ग़रीब की आपसी नफ़रत और आपसी संघर्ष भी मिट जाएगा। तब यह दुनिया भी जन्नत का ही एक बाग़ बन जाएगी। दुनिया के सामने इसका नमूना मुसलमानों को पेश करना है।
धर्म की उन शिक्षाओं को सामने लाने की ज़रूरत आज पहले से कहीं ज़्यादा है जिनका संबंध जन कल्याण से है। जो लोग यह कहते हैं कि धर्म शोषण करना सिखाता है और दुनिया को बेहतर बनाने के लिए धर्म को छोड़ना ज़रूरी है।‘ उन लोगों से हमारा यही कहना है कि भाईयो , आपने धर्म के नाम पर अधर्म के दर्शन कर लिए होंगे। एक बार इस्लाम के दर्शन तो कीजिए, बराबरी और इंसाफ़ की, आपस में भले बर्ताव के बारे में इस्लामी शिक्षाओं को जान लीजिए और फिर उससे बेहतर या उस जैसी ही शिक्षा स्वयं बनाने की कोशिश कर लीजिए और हमारा दावा है कि आप दोनों ही काम नहीं कर पाएंगे। इस्लाम की बिना सूदी अर्थ व्यवस्था अर्थ शास्त्रियों की समझ में अब आ रही है।
इसी व्यवस्था में से एक है ‘फ़ित्रा‘।
क़ुरआन कहता है कि ‘...और मोमिन के माल में याचक और वंचित का भी हक़ है।‘ यानि ऐसा करके दौलतमंद मोमिन किसी याचक और किसी वंचित पर कोई अहसान नहीं कर रहा है बल्कि वह उन्हें वही धन दे रहा है, जिस पर उनका हक़ है। यह हक़ ईश्वर अल्लाह ने निश्चित किए हैं। जो ईश्वर अल्लाह को और उसके धर्म को नहीं मानते, वे उसके निश्चित किए हुए हक़ को भी नहीं मानते और दुनिया में भूख और ग़रीबी मौजूद है तो इसका कारण यही है कि दुनिया अल्लाह के ठहराए हुए हक़ को मानने के लिए तैयार ही नहीं है और सारी समस्या की जड़ यही न मानना है और इनका हल केवल मान लेना है। जो मान लेता है , वह ईमान वाला कहलाता है। ईमान वालों को चाहिए कि जो हक़ अल्लाह ने मुक़र्रर कर दिए हैं, उन्हें पूरा करने की कोशिश करे ताकि लोग जान लें कि धर्म इंसानियत को क्या कुछ देता है ?

सबको ईद मुबारक

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ऐसे हुई कोटा में ईद की घोषणा .................



दोस्तों कल ईद है पहले बिहार में चाँद दिखा फिर लखनऊ से चाँद दिखने की खबर आई लेकिन कोटा में बरसात होने के कारण चाँद दूर दूर तक दिख नहीं सका था और ईद की घोषणा तो चाँद देखने के बाद ही की जाने की शरियत है बस कोटा के लोगों के दिल थमे हुए थे और उन्हें शहर काजी अनवार अहमद के फेसले का इन्तिज़ार था .....में खुद भी शहर काजी अनवर अहमद का नजदीकी हूँ कोटा वक्फ कमेटी का नायब सदर और कानूनी सलाहकार के अलावा पत्रकारिता से जुडा हूँ इसीलिए मेरे फोन पर धन धनाधन घंटियाँ बजने लगी .हम खुद काजी साहब से चाँद दिखने की शहादत केसे लें और ईद केसे घोषित करें इसकी चर्चा में थे ...........इसी बीच मेरे पास बारां के वकील जनाब आफाक भाई का फोन आया उनका कहना था कोटा में तो चाँद नहीं दिखा लेकिन बूंदी में उनके रिश्तेदार ने चाँद देख लिया है इसकी खबर शहर काजी साहब कोटा को दी गयी ...शहर काजी कोटा ने बूंदी शहर काजी से राबता किया वहां चाँद दिखने की पुष्ठी हुई लेकिन चाँद दिखने की शरीयती साक्ष्य तो लेना थी ..शहर काजी साहब ने एक कार मंगवाई उसमे दो ज़िम्मेदार लोगों को चाँद देखने वालों से जिरह करने और उनकी गवाही लेने के लियें बूंदी भेजा गया बूंदी कोटा से चालीस किलोमीटर दूर दुसरा जिला है ....खेर ज़िम्मेदार लोग बूंदी पहुंचे इस दोरान कोटा के सभी लोगों के दिल थमे हुए थे क्योंकि कोटा में अनेकों बार चाँद की शहादत नहीं हाने पर ईद दुसरे दिन हुई है चाहे पुरे देश में कभी भी ईद मना ली जाए कुछ लोग एतेकाफ में बेठे थे जो मस्जिदों से उठना चाहते थे लेकिन ईद की घोषणा चाँद की शहादत पर होना थी .................बूंदी गए दोनों मोअज्जिज़ लोग शहादत लेकर वापस कोटा आये काज़ियात कार्यालय में इसे पेश किया गया शहर काजी ने फिर एक बार तस्दीक की और तस्दीक करने के बाद एक फरमान एक आदेश जारी कर कोटा में भी कल ईद की घोषणा करते हुए ईद की नमाज़ साढ़े नो बजे पढने की घोषणा की ..............ईद की घोषणा हो चुकी थी पटाखे फूट गए थे एलान होने लगा था इसी बीच मुबारक बाद के सिलसिले शुरू हो गये ..थोड़ी देर बाद कोटा के अनवरत ब्लोगर भाई दिनेश राय जी द्विवेदी का फोन आया उन्होंने ईद के बारे में पूंछा तो मेने सारी जानकारी दी उन्होंने सुझाव दिया के भाई ईद की इस घोषणा को कमसे कम ब्लॉग पर लिख कर लोगों तक पहुंचाएं मेने भाई दिनेश द्विवेदी जी को कल ईद पर आने की दावत दी ..दिनेश जी ने तपाक से जवाब दिया के मेरे तो बेटे और बेटी दोनों आधी रात को आ रहे है हमारी तो ईद उनसे ही होगी उनका कहना था के बच्चे राखी पर नहीं आये थे अब चार दिन कोटा में उनके साथ रहेंगे इसलियें हमारी तो चार दिन ही ईद रहेगी ..भाई दिनेश जी द्विवेदी जी की यह बात सुन कर में दुखी हो गया और में मेरी ईद के बारे में सोचने लगा क्योंकि मेरा इकलोता प्यारा बेटा शाहरुख कहां नोयडा अमिटी में बी टेक कम्प्यूटर साइंस में कर रहा है और छुट्टी नहीं होने के कारण उसे पहली बार हमसे अलग दूर ईद मनाना पढ़ रही है मेरी बस आँखे छलछला आयीं और भावुकता में बहकर एक बार फिर मेने अपने बच्चे शाहरुख को फोन कर ईद की मुबारक बाद दी जो दिल्ली में मेरी बहन केघर रोहिणी में ईद मनाने के लियें रास्ते में जा रहा था .........तो दोस्तों चाँद की शहादत से ईद की घोषणा और फिर ख़ुशी से उदासी के इस सफ़र की दास्ताँ आपके सामने पेश है सभी भाइयों को ईद की बहुत बहुत मुबारकबाद ...अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान /a>
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यादें एक छोटी सी प्रेम कहानी


कहते है जो बीत गया सो बीत गया हम लोगों को उस से छोड़ कर आगे बढ़ना चाहिए शायद इसलिए ऊपर वाले ने भी हमको हमारी दोनों आँखें हमारे सर के पीछे न दे कर आगे चेहरे पर दी हैं ताकि हम चाह कर भी हमेशा के लिए या ज्यादा लम्बे समय के लिए अपने अतीत को ना देख सकें हालाँकि यह बात अलग है की यह ज़रूरी नहीं है की हर किसी का अतीत बुरा ही हो। लेकिन सवाल यह उठता है की अतीत चाहे अच्छा हो या बुरा हो हम चाह कर भी उस में लौट नहीं सकते अगर बुरा हो तो भी उस में वापस लौट कर सुधार नहीं किया जा सकता और यदि अच्छा हो सुखद हो तो भी उस में लौट कर उस को दुबारा जिया नहीं जा सकता। लोग कहते हैं यादें जिसकी जैसी भी हों होंठों पर मुसकान ले ही आती हैं मगर मेरा मानना है की यादें, यदि मुसकान लाती हैं तो उस के साथ-साथ उस पल के बीत जाने का ग़म भी साथ लाती हैं जिस पल ने उन्हें यादें बना दिया।
यादें एक ऐसा शब्द जिसमें न जाने कितनी गहराई छुपी हुई है। यादें जो खट्टी भी होती हैं और मीठी भी जीवन से जुड़ा सब से अटूट और महत्वपूर्ण रिश्ता होती हैं यह यादें जिसे कभी नहीं झूठलाया जा सकता। कोई साथ निभाये या ना निभाये, मगर हमेशा साथ निभाती हैं, यह यादें। कई बार यूँ भी होता है कि आप अपने जीवन में कुछ यादों से भागना चाहते हो, मगर तब भी आपका साथ नहीं छोड़ती यह यादें सच्चे जीवन साथी की तरह हमेशा साथ निभाती हैं यह यादें। न जाने कितने जज़्बातों का समंदर होती हैं यह यादें, जिसमे यह दिल की कश्ती डूबती, संभालती बस जीवन चक्र की भाति चलती ही चली जाती है। यादों के समंदर में जज़्बातों का सैलाब भी किस क़दर समाया हुआ होता है। जैसे किसी के लंबे इंतज़ार का जज़्बा, मानो यादों मे भी कभी खत्म नहीं हुआ होता। वो किसी खास का इंतज़ार, वो महकता हुआ तो, कभी सुलगता हुआ इंतज़ार,वो बचपन के दिन यहाँ मुझे याद आती हैं (जगजीत सिंग जी) की गाई हुई एक मशहूर गजल यह दौलत भी लेलो, यह शोहरत भी लेलो, मगर मुझ को लौटा दो बचपन की यादें वो कागज की कश्ती वो बारिश का पानी तो कभी पहले प्यार का, पहले मिलन का कुतूहल भरा इंतज़ार जिसमे ऐसा लगता है मानो मिलन कि घड़ी में सदियाँ बीत रही हों। एक पल जैसे एक-एक वर्ष के समान प्रतीत होने लगता है
इसी मिलन से जुड़ा एक वाक़या जो मेरी यादों में बसा है। आज आपको सुनती हूँ।
दो प्रेमी हुआ करते थे एक प्यारा सा लड़का और एक खूबसूरत सी शोख़ लड़की दोनों के नाम आप अपनी पसंद के अनुरूप रख सकते हैं J दोनों में प्यार हुआ प्यार का इज़हार भी हुआ। मिलने का दिन तय हुआ और जब घड़ी मिलन की आई तब जैसे दोनों का वक्त काटे नहीं कट रहा था। लड़का, लड़की के शहर से बहार रहा करता था। जिस दिन दोनों ने मिलने का तय किया उस दिन दोनों के ही मन मे तरह-तरह के सवाल उठ रहे थे। मन ही मन दोनों यह सोच रहे थे कि जब सामना होगा महबूब से तो क्या कहेंगे एक दूसरे से शुरुवात कहाँ से होगी कैसे होगी। इस ही कुतूहल के चलते लड़की का मोबाइल बाजा और लड़के का SMS आया में स्टेशन पहुँच गया हूँ थोड़ी देर में आता हूँ। यह देख लड़की का मन था उछाल गया मारे ख़ुशी के वो बोल पड़ी थोड़ी देर में क्यूँ? जब आही गये हो तो आ भी जाओ ना जैसे भी हो अभी चले आओ लड़का ने कहा नहीं तुम्हारे घर आना है मुझे ऐसे ही नहीं आ सकता थोड़ा समय लगेगा खुद को ठीक-ठाक तो कर लू, लड़की ने जैसे तैसे खुद का दिल थाम लिया और घर के बाहर जाकर उसका इंतज़ार करने लगी तभी थोड़ी देर में पास आता एक आटो देख कर लड़की का दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगा। और जब उस में से उसका राजकुमार उतरा तो दोनों का चहरा देखने लायक था। मारे ख़ुशी के लड़की का मन किया कि गले लगा ले अपने राजकुमार को ताकि उसे यक़ीन आ जाये की यह सपना नहीं हक़ीक़त है।
मगर मुहौले वालों के डर ने उसे ऐसा करने न दिया और लड़के का मन किया की वो बस एक बार लड़की को छु भर ले ताकि उसे भी यह यक़ीन आ सके की यह भ्रम नहीं हक़ीक़त है लड़का लड़की को बस पूरे समय अपनी आँखों के सामने देखना चाहता था उसे छु कर महसूस करना चाहता था। दोनों घर के अंदर गए मुहब्बत् के इक़रार के बाद भी दोनों की हालत ऐसी थी मानो अभी तक इज़हार ही न हुआ हो लड़की ने लड़के दिल की बात समझते हुए लड़के से एक बे मतलब की शर्त लगाई ताकि लड़का लड़की का हाथ थाम सके उसे छु सके, महसूस कर सके और जैसे ही लड़की का हाथ लड़के हाथों मे आया तो लड़की ने कहा इतनी घबराहट क्यूँ हो रही है तुमको की तुम्हारी धड़कने चल नहीं दौड़ रही है। लड़के ने अचंभित होकर पूछा तुम को कैसे पता की मेरी धड़कन बहुत तेज़ है। लड़की ने कहा मैंने प्यार किया है तुम से तुम्हारे हाथों से भी मैं तुम्हारी दिल की धड़कन को महसूस कर सकती हूँ और तभी लड़के ने लड़की से कहा की मैं भी एक बार अपने प्यार को महसूस करना चाहता हूँ और दूजे ही पल दोनों एक दूसरे के आग़ोश में ऐसे खो गये जैसे पानी में रंग, हवा में ख़ुशबू, लहरों में समंदर।
आज भी जब यह किसा यादों में याद आता है। होठों पर एक शरारत भरी मुसकान उभर कर आती है यादों में भी यादों की कश्ती दूर तलक ले जाति है।.....                     
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To LoVe 2015: ब्लॉग पहेली-३ आने वाली है कुछ ही घंटों में - सबसे पहले आप सभी को ''ईद मुबारक ''

सबसे  पहले आप सभी को ''ईद मुबारक ''


                   Eid Mubarak Wallpaper
ब्लॉग पहेली-३ आने वाली है कुछ ही घंटों में .आप रहें   तैयार और जिस भी ब्लॉग पर जाएँ देख लें उस ब्लोगर का चेहरा ध्यान से .टिप्पणीकारों के चेहरों पर ध्यान दें क्योंकि चेहरा पहचान कर  ही बन पायेंगें आप ''विजेता ''
अब ये मत  कहियेगा की मुझे  ये ब्लॉग अच्छा नहीं लगता या वो ब्लॉग अच्छा नहीं लगता.भाई सब  ब्लॉग अच्छे  है.शुभकामनाओं के साथ 
                                                        शिखा कौशिक 
                             http://blogpaheli.blogspot.com

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आधी जीत के मायने....




सच कहूं तो ये एक बड़ा सवाल है। आधी जीत की परिभाषा क्या है। मेरी नजर में तो जीत सिर्फ जीत होती है, आधी या फिर चौथाई कहकर खुद को खुश करने का ये बहाना भर है। मैने पिछले लेख में आपको संसदीय प्रक्रिया की जानकारी देने की कोशिश की थी, जिसमें बताया था कि संसद में किसी विषय पर कैसे चर्चो होती है। पहले तो आप यही जान लें कि शनिवार को जो चर्चा हुई, वो बेमानी है, उसका कोई मतलब ही नहीं है। क्योंकि केंद्रीय वित्तमंत्री प्रणव मुखर्जी ने संसद में कोई प्रस्ताव नहीं रखा, सिर्फ एक बयान दिया, जिस पर चर्चा तो हुई, पर संसद के किसी नियम के तहत नहीं। लिहाजा चर्चा खत्म होने पर कोई प्रस्ताव स्थाई समिति को नहीं भेजा गया, बल्कि ये कहा गया कि नेताओं ने जो भाषण दिए हैं, वही स्थाई समिति को भेज दी जाए। इसमें कौन सी जीत आपको दिखाई दे रही है।
लोकपाल का बिल ड्राप्ट करना है स्थाई समिति को। उस स्थाई समिति को जिसमें लालू यादव जैसे सांसद भी इसके सदस्य हैं। लालू खुलेआम सिविल सोसाइटी का विरोध कर रहे हैं। इसके अलावा मायावती की पार्टी बहुजन समाज पार्टी ने भी इसका विरोध किया। कई राजनीतिक दलों ने मंत्री के वक्तव्य पर टिप्पणी की और उसमें कई तरह के संशोधन का जिक्र किया। इसके बावजूद सरकार की ओर से कहा गया कि प्रस्ताव सर्वसम्मति से पास हुआ। मित्रों आप खुद समझ सकते हैं कि सरकार की मंशा क्या है। सच सिर्फ इतना है कि अन्ना के आंदोलन से सरकार ही नहीं विपक्ष की भी मुश्किलें बढ गई थीं और वो किसी भी सूरत में अन्ना का अनशन समाप्त कराना चाहते थे, जिसमें वो कामयाब हो गए।
अन्ना क्या मांग कर रहे थे। वो कह रहे थे कि संसद में जनलोकपाल बिल पेश किया जाए और उसे पास कर 30 अगस्त तक कानून बनाया जाए। उनकी ये बात पूरी नहीं हुई। फिर अन्ना ने 30 अगस्त तक कानून बनाने की बात छोड दी और कहा कि उनके बिल पर संसद में चर्चा की जाए और उस पर मतदान कराया जाए। लेकिन सरकार ने बिना किसी नियम के संसद में महज एक बयान देकर चर्चा की और कोई प्रस्ताव पास नहीं किया। अन्ना ने कहा कि संसद मे सर्वसम्मति से बिल पास हो जाने पर वो अनशन तो तोड़ देगें लेकिन रामलीला मैदान में धरना जारी रहेगा। लेकिन हुआ क्या.. संसद में चर्चा के बाद अन्ना के पास कोई प्रस्ताव भेजने के बजाए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का पत्र लेकर विलासराव देशमुख पहुंचे और अन्ना को अनशन खत्म करना पड़ गया।
सवाल ये है कि अन्ना खुद अपना जनलोकपाल बिल संसद की स्थाई समिति को सौंप आए थे। बाद में प्रधानमंत्री ने भी इसे स्थाई समिति को भेज दिया था। उस दौरान टीम अन्ना से कहा गया कि अब वो अपनी बात स्थाई समिति से करें। लेकिन टीम अन्ना ने उस समय ऐसा नहीं किया। अब नई बात क्या हुई, क्या टीम अन्ना स्थाई समिति से बात नहीं कर रही है। मित्रों संसद में पेश किए जाने वाले किसी भी बिल को स्थाई समिति ही ड्राप्ट करती है। ऐसे में टीम अन्ना किस जीत की बात कर रही है। ये कम से कम मेरे समझ से परे है।
हां इस बात के लिए मैं अन्ना जी को जरूर क्रेडिट देना चाहूंगा कि भ्रष्टाचार जो आज एक गंभीर मुद्दा है, लेकिन इस पर आम जनता खामोश थी, उसमें जान फूंकने का काम किया अन्ना ने। आज जिस तरह से लोग भ्रष्टाचार के खिलाफ एकजुट हैं, वो आने वाले समय में सिर्फ नेताओं के लिए नहीं, बेईमान अफसरों और कर्मचारियों पर भी लगाम लगाने मे जरूर कामयाब होगा।
इस दौरान एक चौंकाने वाला आरोप लगा अन्ना के अनशन पर। अगर टीम अन्ना ने सरकारी डाक्टरों को अन्ना के चेकअप करने से ना रोका होता तो ये आरोप को सिरे से खारिज किया जा सकता था। लेकिन लालू यादव ने अन्ना और उनके चिकित्सक डा. नरेश त्रेहन को बातों बातों में संदेह के घेरे में खडा कर दिया। उन्होंने यहां तक कहा कि इस पर दुनिया भर के डाक्टरों को रिसर्च करना चाहिए कि 74 साल का बुजुर्ग 12 दिन भूखे रहने के बावजूद किस तरह टनाटन बोल रहा है। वैसे अन्ना इसका जवाब ना देते तो बेहतर था, लेकिन उन्होंने लालू यादव की बात का जवाब दिया कि जिसने 12 बच्चे पैदा किए हों, वो ब्रह्मचर्य जीवन जीने वालों की ताकत को क्या जानेगें। हालाकि इसके बाद जो बात हुई, इससे ये विवाद और गहरा गया। कहा गया कि तो क्या बाबा रामदेव जो छह दिन में ही ढीले पड गए थे, वो ब्रह्मचर्य का जीवन नहीं जी रहे हैं। बहरहाल इस विवाद को यहीं छोड देता हूं, लेकिन इतना सही है कि अन्ना के अनशन पर तो उंगली उठ ही रही है।
इस पूरे प्रकरण में मीडिया की भूमिका पर सवाल खडे़ हो रहे हैं। ये सही है कि मीडिया को अन्ना और उनकी टीम ने खूब सराहा। आम जनता को भी मजा आ रहा था, वो जो कुछ कहना चाहती थी, मीडिया ने उन्हें भरपूर मौका दिया। लेकिन मुझे लगता है कि मीडिया को मंथन करना होगा कि ऐसे मौकों पर क्या जनभावना के साथ उन्हें भी बह जाना चाहिए, या फिर किसी तरह का नियंत्रण जरूरी है। मित्रों आपको बताना चाहता हूं कि मुंबई में जब ताज होटल पर हमला हुआ तो यहां मीडिया ने जिस तरह रिपोर्टिंग की, उससे ताज होटल में मौजूद आतंकी टीवी पर बाहर की सभी गतिविधियों को देख रहे थे, उन्हें पता चल रहा था कि उन्हें घेरने के लिए किस तरह कमांडो कार्रवाई की जा रही है। बाद में मीडिया ने यह कह कर पीछा छुडाने की कोशिश की कि ऐसा हमला पहली बार हुआ है, और हमें जो सतर्कता बरतनी थी वो नहीं बरत सके। देश की इलेक्ट्रानिक मीडिया अभी अपरिपक्व है, लेकिन प्रिंट से बेहतर की उम्मीद थी, पर जनभावना के आगे उन्होंने भी घुटने टेक दिए। दूसरे देशों में इस आंदोलन की तुलना सीरिया, लीबिया और मिश्र के आंदोलनों से की जाने लगी। दुनिया में देश के सम्मान को चोट पहुंचा। मुझे लगता है कि मीडिया आंदोलन की रिपोर्ट देने के बजाए इस आंदोलन की एक महत्वपूर्ण कड़ी बन गई थी। सच ये है कि सरकारी चाल की जानकारी अगर मीडिया ने लोगों को दी होती तो सबको सच्चाई का पता चलता।
इस आंदोलन की सबसे बडी ताकत थी गांधीवादी तरीके से आंदोलन का संचालन। हजारों की भीड लेकिन सब अनुशासन में। लेकिन इस अनुशासन को मंच पर तार तार किया ओमपुरी और किरन बेदी ने। सस्ती लोकप्रियता के लिए किरन बेदी भले ही अपने कृत्य को जायज ठहराएं, लेकिन मैं इसे कत्तई गांधीवादी आंदोलन का हिस्सा नहीं कह सकता। मंच पर इससे फूहड कुछ भी नहीं हो सकता। इसने आंदोलन की गंभीरता को कम किया। बाकी कसर स्वामी अग्निवेश ने पूरी कर दी।
सामाजिक संगठनो ने भी इसमें सही भूमिका नहीं निभाई। सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा राय ने जब मीडिया के सामने लोकपाल पर जब एक अलग बिल आगे बढाया तो ऐसा लगा कि अन्ना के खिलाफ ये एक साजिश है। लोग इसे सरकारी हथकंडा तक बताने लगे। बहरहाल अब स्थाई समिति के सामने ये मेरा बिल ये तेरा बिल करके लोकपाल को लेकर इतने मसौदे आ चुके हैं कि सभी का निस्तारण करने में समिति के हाथ पांव फूल रहे हैं। संवैधानिक मर्यादाओं में बंधी समिति को सभी मसौदों पर चर्चा करना जरूरी है। ऐसे में जाहिर है कि उसे और समय देना हो होगा।
जनलोकपाल बिल में कई ऐसे मुद्दे हैं, जिनका सीधा संबंध राज्य सरकारों से है। ऐसे में बिल पास करने के पहले समिति को ये भी ध्यान रखना होगा कि कहीं राज्य सरकारों की स्वायत्तता का अधिग्रहण ना हो जाए। अगर ऐसा हुआ तो बिल पास हो जाने के बाद राज्य सरकारों को इस बिल पर विधानसभा में भी सहमति बनानी पडेगी। इससे ये खतरा भी बढ सकता है कि कुछ राज्यों में ये कानून लागू हो जाए और कुछ स्थानों पर इसे लागू ना किया जाए।
बहरहाल सच ये है कि भ्रष्टाचार से देशवासी परेशान हैं और इसके लिए सख्त कानून बनना ही चाहिए। लेकिन कहते हैं ना कि वीणा के तार को इतना ना कसें कि तार ही टूट जाए और ना ही इतना ढीला कर दें कि उसमें सुर ही ना निकले। आपको पता है कि कानून से अपराध रुकते नहीं हैं, बल्कि इससे अपराधियों को सजा मिलती है। महात्मा गांधी जी का ही कहना था कि हमारी कोशिश ऐसी होनी चाहिए 99 गुनाहगार भले ही छूट जाएं, पर एक भी बेगुनाह को सजा नहीं मिलनी चाहिए। मुझे लगता है कि दहेज के मामले में बहुत सख्त कानून जरूर बना, पर इसका दुरुपयोग भी सबसे ज्यादा हो रहा है। ऐसे में मुझे भरोसा है कि कानून में गांधी जी की भावना का ध्यान रखा जाएगा और भ्रष्टाचार पर एक सख्त कानून जरूर पास होगा।
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सोमवार, 29 अगस्त 2011

To LoVe 2015: A very good news for DTH Buyer

Now watch Dish TV on Tata Sky, Sun Direct, Big TV with new CAM module

Now TRAI with you DTH customer don't Panic 

Now Insert CAM module with your any set top box and Use any DTH Sun, Airtel, TATA sky,Videocon connection

  • Dish TV, India's first DTH operator and part of the Essel Zee group of Subash Chandra, has finally come out with its 'cam module' that allows consumers of other DTH operators to also watch Dish TV channels on their existing equipment.

  • The Cam Module (see picture) is inserted into the 'cam slot' located just above or below the slot where the smart-card is inserted.

  • The Cam module, called Dish Freedom, is basically a authentication system. Once the user is authenticated by the Cam module, it sends the signal to the existing set top box (of other companies) which then process the signal and send it to the TV.

  • The release of the product is likely to stir up a lot of controversy because most of the current operators force subscribers to continuously recharge by disabling their set top box once the validity of the existing recharge amount expires.

  • Now, customers can avoid recharging their existing subscription and choose to watch Dish channels only, by inserting the CAM module. In most cases, however, subscribers may have to get their existing Dish re-aligned (turned) towards the Dish TV satellites to get the signal reception.

  • However, in some cases, they can watch both the existing service as well as Dish TV through the CAM module.

  • The use of CAM module (Dish Freedom) is not illegal, as India's DTH laws make it obligatory for DTH operators to sell only 're-usable' equipment to their subscribers. The DTH boxes must have a Cam module as well.

  • During the early days, when the subscriber did not recharge on time, the set top box was not disabled. In other words, he could continue to watch the 'free' channels. Later, as competition became rampant, many DTH operators started disabling or locking up the set top box when the subscription expired.

  • As a result, it is not clear if the insertion of Dish TV's cam module will prevent the box from being locked up by the locking signal from the satellite. However, in case the dish is re-aligned away from the original provider's satellite and turned towards Dish TV's, the original provider will not be able to send the 'locking signal' either.

  • The downside of Dish Freedom offer is that it costs as much as getting a new connection, Rs 990. However, it offers much more than a typical new connection. For example, one year's subscription to the basic package 'Freedom Pack' is included.

  • The Cam market is inherently favorable to Dish TV and Tata Sky, both of which use the older MPEG-2 standard of transmission. All other players use the MPEG-4 standard. As a result, an MPEG2-based Cam service can work on the boxes of Reliance Big TV, Airtel Digital, Sun Direct, Videocon (all of which use MPEG-4), but the reverse is not true.

  • In other words, if Reliance or Airtel wants to sell their own Cams, they will have to sell it to other MPEG-4 players as the ordinary boxes provided by Dish and Tata Sky do not have the ability to decode MPEG-4 signals.

  • “TRAI mandates interoperability in the DTH licencing norms and it is obligatory for all operators to offer interoperable set top boxes. Being the trend setters in the industry, we are proud to launch the country’s first CAM device that will be a momentous landmark in the Indian DTH chapter.” said Jawahar Goel, Managing Director, Dish TV India.

  • It is estimated that around 20% of the 33 million DTH subscribers in the country (almost as big as any DTH operator) are 'inactive', with their boxes lying idle.

  • "This is a substantial dormant market segment that we will target as our customer base for ‘Dish Freedom’. Being the only player offering CAM services, we aim to add the inactive base in metros and smaller cities to our over 11 million strong family," said Salil Kapoor, COO, Dish TV India.

 

 

Source from:   Click here

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To LoVe 2015: New Karbonn Android Mobile called A1




Karbonn Mobiles has launched its first Android smartphone, A1. Karbonn A1 comes with a 2.8 inch touchscreen and is based on Android 2.2 OS.
 Features are:

  • A1 has a 2.8 inch touch screen along with WiFi.

  • 3G and Bluetooth. 

  • Karbonn A1 supports WiFi Hotspot and ability to store application in external memory.

  • Other features of the A1 include Adobe Flash 10.1 version, 600MHz processor.

  • 7.2 Mbps support (3G).

  • a 3.2 MP camera.(But No Flash)

  • 1100mAh battery.(Good One)

  • expandable memory (up to 32GB)

  • GPS.

  • Google Map(Installed Apps)

  • G-sensor come 

  • Ability to download applications from the Android Market

Main Gossip:(About Its Bad Features)

This Android handset houses the 1100 mAh Li-ion battery which can fully charge in just 18 minutes. On a full charge you can expect a standby time of about 250 hours and talktime of about 250 minutes.  :)

There is no dual camera so no video calls Possible :(



Price: Current price Rs. 6,699 to  Rs. 6,500

 Enjoy the low cost Android



Source(Karbonn.com and gogi.com)


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To LoVe 2015: What is Frill=acount in Bank INDIA

from the source of  IDBI  Bank website i tells you the pro-n-cons of Frill Account.


Frill account definition:


Sabka Account -No Frill account

  IDBI Bank introduces Sabka Account- a savings account that’s literally meant for everyone; absolutely elementary in its approach and Zero Balance for Financial inclusions.

Salient features of Sabka Account– NO Frill Account
  • Debit cum ATM Card and Cheque Book
    Get an ATM cum Debit Card and cheque book on request. The card allows you to transact at IDBI Bank ATMs and shop at retail outlets. The cheque book however, will help you carry out other banking transactions

  • Multiple ways to access your account
    Now you don’t need to visit the bank time and again. Our unique services like Phone Banking, SMS Banking and Internet Banking will allow you to access your account from anywhere, anytime

  • Recurring Deposits
    This account offers you a recurring fixed deposits service wherein you can earn a higher rate of interest just by investing a small amount (as low as Rs 100) every month. There will be no charges for standing instruction for credit to Recurring Deposits account from the Savings Account.

  • Relaxation in Documentation for opening Sabka account In case a person wants to open a Sabka account, but is not able to furnish all the documents as required by the bank, an account can be opened with
  • Introduction from another account holder who has been subjected to full KYC procedure as required by the bank. (The introducer's account with the bank should be at least six month old and should show satisfactory transactions. Photograph of the customer who proposes to open the account and also his address needs to be certified by the introducer)

  • Any other evidence as to the Identity and Address of the customer as required by the bank

  • For all accounts opened with such relaxed documentation, if, at any point of time, the total balance in all the customers' accounts with the bank (taken together) exceeds rupees fifty thousand (Rs. 50,000/-) or total credit in the account exceeds rupees one lakh (Rs. 1,00,000/-), no further transactions will be permitted by the bank, until the full KYC procedure is completed.

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