रविवार, 29 मई 2011

Apple IPod Price IN INDIA: 34000 approx.

Apple's  smart phone also called i-phone ,the i-Phone 4 was launched  in India on Month of May 2011.
It is the  Aircel " known for mobile carrier"  launched the iPhone 4 with a new pricing model.
Aircel will charge Rs 34,500 for iPhones with a 16 GB memory. SO enjoy all top class.

Yes i am agree with you all middle class in Indian But Apple Soon comes with very low cost I-phone keep in mind local people.
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शनिवार, 28 मई 2011

अंग्रेजों को गांधी ने नहीं गर्मी ने भगाया



आजकल ऑफिस का माहौल ही बदला हुआ है। आमतौर पर जो लोग देर से ऑफिस आते थे और जल्दी चले जाते थे, आजकल समय से पहले आते हैं और ऑफिस का समय खत्म हो जाने के भी काफी देर बाद जाते हैं। ये सब वो लोग हैं, जिन्हें समय से ऑफिस आने और जाने के लिए प्रबंधन ने कई हथकंडे अपनाए, पर वो कामयाब नहीं हो पाए। लेकिन अचानक ये बदलाव देख प्रबंधन के साथ हम सब भी हैरत में है। सच कहूं तो अंदरखाने ये कवायद भी चल रही है कि पता किया जाए कि आखिर ऐसा क्या हो गया जो ऑफिस पूरे दिन ही भरा भरा रहता है।
अचानक एक दिन सुबह सुबह बॉस का मैसेज मिला, ऑफिस आते ही चैंबर में मुझसे मुलाकात करें। मैं घबरा गया, दो दिन पहले ही तो बॉस से मुलाकात हुई थी, उन्होंने ठीक-ठाक बात की, अब दो दिनों में ऐसा क्या हो गया कि ऑफिस आते ही काम शुरू करने के बजाए पहले उनसे बात करने जाना है। वैसे भी ब्लड प्रेशर का मरीज रहा हूं, काफी मार्निंग वॉक वगैरह करके किसी तरह सबकुछ पटरी पर लाया हूं  अब ये नया बवाल क्या है। कार ड्राइव करने के दौरान तरह तरह के ख्याल दिमाग में आते रहे। खैर जो होगा देखा जाएगा कह कर मन को दिलासा दिलाया और कुछ देर में मैं ऑफिस आ गया। जल्दबाजी में लंच बॉक्स गाडी़ में ही छूट गया।
ऑफिस के अंदर देखा बॉस अपने लैपटाप पर बिजी हैं, बॉडी लैंग्वेज पढ़ने की कोशिश की, सब कुछ सामान्य लग रहा था, खैर मैं उनके चैंबर में घुसा और बोला जी आपने बुलाया था। हां, हां...बैठिए। वो बोले, अरे मुझे कुछ जानना था आपसे, ये आजकल लोगों को क्या हो गया है, समय से पहले ऑफिस आ रहे हैं और समय के बाद भी ऑफिस में काम करते दिखाई दे रहे हैं। मैने कहा कुछ नहीं सालाना इन्क्रींमेंट का समय है, जाहिर है आपकी नजर में थोड़ा नंबर बढा़ना चाहते होंगे। वो बोले, ना ना ऐसा नहीं है। आप पता करके बताइये।
खैर मैं वापस आया और मित्रों से बातचीत शुरू हो गई। अब क्या बताऊं कि, मुझे बॉस ने क्या काम सौंपा है, और किससे पूछें कि भाई आप ऑफिस जल्दी क्यों आते हैं और देर तक क्यों रहते हैं। बॉस का ये सवाल मेरे मन में घूमता रहा। इस बीच लंच टाइम हो गया, हम सभी कैंटीन की ओर रवाना हुए। मुझे ध्यान आया कि मेरा लंच बॉक्स तो गाडी़ में ही रह गया है। गाड़ी से लंच बॉक्स लेकर आया, लेकिन गर्मी की वजह से ये खाना खराब हो चुका था। मित्रों को बताया भाई खाना गर्मी की वजह से खराब हो गया।
लोगों ने ऑफर किया, आइये यहीं बैठिए, हमारे साथ शेयर कीजिए ना। खाना खाने के दौरान बात गर्मी की शुरू हो गई। एक ने कहा गर्मी ने जान निकाल दिया है, मैं तो इसीलिए जल्दी ऑफिस आ जाता हूं और शाम को भी देर तक रहता हूं। सभी मित्रों ने उसकी हां में हां मिलाया और कहा सच है, मैं भी धूप निकलने के पहले ही ऑफिस पहुंच जाता हूं और जब तक मौसम ठीक नहीं हो जाता तब तक घर के लिए नहीं निकलता। हद तब हो गई जब एक मित्र ने ठंडा पानी पीने के बाद कहा कि भाई मुझे तो लगता है कि अंग्रेजों को गांधी ने नहीं गर्मी ने यहां से भगाया। वरना वो कहां दिल्ली छोड़ने वाले थे। सभी ने जोर का ठहाका लगाया और सहमति भी जताई।
लंच के साथ मेरा काम भी बन गया था। आप जानते ही हैं कि बॉस आपको कोई काम दे और आप उसे बिना देरी के कर दें तो आपके नंबर उनकी नजर में बढ़ेंगे ही। बस फिर क्या था लंच के तुरंत बाद उन्हें बताया कि सर दिल्ली की गर्मी से सब बेचैन हैं और इसी लिए जल्दी आते हैं और देर तक ऑफिस में बने रहते हैं। बॉस को सही बात बता तो दिया हूं, लेकिन डरा हुआ मैं भी हूं पता नहीं अब वो कैसे हंटर चलाएं, पता चला लपेटे में मैं भी आ गया। 

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शुक्रवार, 27 मई 2011

Indian Prime MInister Visit to: Tanzania

Another Important GK question:


Indian Prime Minister Manmohan Singh Says:

  • $190 million credit line to support water supply and education projects in Tanzania.
  •  $180 million (126 million euros) to improve water supply in the commercial capital Dar es Salaam
  • $10 million in support of human resources development and education programmes.
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बुधवार, 25 मई 2011

तेल पीती है ये सरकार

चलिए आज बात पेट्रोल और डीजल की कर लेते हैं। वैसे तो मैं इस विषय पर पहले ही सरकार का ध्यान आकृष्ट कराना चाहता था, पर क्या करुं राहुल गांधी के चक्कर में समय खराब हो गया। वैसे ये एक ऐसा विषय है कि तमाम आंकेडबाजी के जरिए भी आपको समझाने की कोशिश की जा सकती है, लेकिन मैं आपको ज्यादा बोर नहीं करना चाहता। सिर्फ वितरण प्रणाली पर मेरे मन मे कुछ सवाल हैं, जो आपके सामने उठाता हूं।

रसोई गैस

पहले बात रसोई गैस की। मुझे लगता है कि ये बात आप समझ लेगें तो आगे के विषय खुद बखुद आसान हो जाएंगे। आपको पता है कि घरेलू उपयोग की रसोई गैस की कीमत व्यावसायिक इस्तेमाल करने वालों के मुकाबले कम है। मतलब होटल और रेस्टोरेंट में जो गैस सिलेंडर इस्तेमाल होते हैं, वो घरेलू गैस सिलिंडर के मुकाबले मंहगे हैं। सरकार का मानना है चूंकि होटल और रेस्टोरेंट के लोग गैस का व्यावसायिक इस्तेमाल करते हैं, इसलिए उन्हें सब्सिडी से अलग रखा गया है। ये अच्छी बात है, मैं क्या आप भी सहमत होंगे।

डीजल

लेकिन यही बात डीजल पर क्यों नहीं। व्यावसायिक पंजीकरण वाले वाहनों को बिना सब्सिडी के डीजल क्यों नहीं दी जानी चाहिए। आज खेतों की सिंचाई के लिए गरीब किसानों को जिस कीमत पर डीजल मिल रहा है, वही कीमत ट्रकों, बसों और अन्य व्यावसायिक इस्तेमाल वाले वाहनो को भी मिल रहा है। वैसे तो केंद्र की सरकार गरीबों की बात करती है, कमजोर तपकों को राहत देने का संकल्प दोहराती है, लेकिन डीजल के मामले में ऐसा भेदभाव क्यों कर रही है।

पेट्रोल

यही बात पेट्रोल पर भी लागू हो सकती है। लग्जरी कार इस्तेमाल करने वाले धनपशुओं को क्यों सब्सिडी वाला पेट्रोल दिया जाना चाहिए। स्कूटी और मोटर साइकिल इस्तेमाल करने वाले स्टूडैट भी 60 रुपये प्रति लीटर पेट्रोल लेते हैं और अंबानी भी यही कीमत चुकाते हैं। छोटी कार इस्तेमाल करने वाले महीने में जितने पैसे का पेट्रोल इस्तेमाल करते हैं, उससे कई गुना तथाकथित बडे लोग ड्राईवर को वेतन देते हैं। जिनके लिए एक से बढ़कर एक मंहगी कार दरवाजे पर खड़ा करना उनके लिए स्टेट्स सिम्बल है, तो उन्हें सब्सिडी क्यों दी जा रही है।

सुझाव

-मुझे लगता है कि वेतनभोगी जो छोटी कार भी लेने के लिए लोन का सहारा लेते हैं, उनकी गाड़ी का पंजीकरण और लग्जरी गाड़ियों के पंजीकरण से अलग होनी चाहिए, और उन्हें सब्सिडी के साथ पेट्रोल और डीजल देना चाहिए।


-एक से अधिक कार वालों को सब्सिडी से तो मुक्त रखना ही चाहिए, बल्कि उनसे अतिरिक्त टैक्स भी लेना चाहिए।


-देश में पेट्रोल और डीजल पर एजूकेशन टैक्स की वसूली होती है। ये टैक्स बच्चों से क्यों लिया जाना चाहिए। मुझे लगता है स्कूटी और अन्य हल्के दुपहिया वाहन को स्टूडैंट वाहन मानकर बच्चों को आधे दाम पर पेट्रोल दिया जाना चाहिए।


-एबूलेंस और अन्य जरूरी वाहनों को भी आधे दाम पर डीजल और पेट्रोल देने का प्रावधान होना चाहिए। अगर गंभीर मरीजों को ट्रेन और सरकारी बसों में रियायत दी जाती है तो एंबूलेंस को क्यों नहीं।

मुझे लगता है कि वितरण प्रणाली में सुधार के जरिए सरकार गरीबों को राहत दे सकती है, पर सच्चाई ये है कि सरकार चुनावों में बड़े लोगों से चंदा वसूलती है, तो भला वो ऐसा कदम कैसे उठा सकते हैं। आइये राहुल गांधी जी गरीबों की इस मुहिम की अगुवाई कीजिए, पार्टी वार्टी, सभी विचारधारा को छोड़ देश का एक बड़ा वर्ग आपकी अगुवाई स्वीकार करेगा। भट्टा परसौल में कुछ लोगों की लड़ाई लड़ने से वो कद नहीं बढ सकता जितना इस मुहिम से जुड़ने से आपका कद बढेगा। लेकिन मुझे पता है आप ऐसा नहीं कर सकते, क्योंकि सरकार ही तेल पीती है।

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Manmohan Singh: 2nd South Africa Summit in Addis Ababa

In Addis Ababa:

Africa and India sign a trade and co-operation deals after two-day summit also to provide $5-billion credit line for Africa.


South africa and India Sign some big deal in the area of infrastructure.

Indian Prime Minister Manmohan Singh and around 10 African leaders opened Tuesday 24 may 2011, It is the second India-Africa summit.

Some facts:
  • $5 Billion credit line for the next three years.
  • $400 million to build institutions and training programmes in different African regions. 
  • 10,000 scholarships for African student.
  • Set up a virtual university
  • Ethiopia Train Line Set Up.  
  • $300 million for an Ethiopia-Djibouti railway line
  • $700 is the total estimate.
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मंगलवार, 24 मई 2011

भूख

सिर्फ चार लाइनें.........
भूख ने मजबूर कर दिया होगा,



आचरण बेच कर पेट भर लिया होगा।


अंतिम सांसो पर आ गया होगा संयम,


बेबसी में कोई गुनाह कर लिया होगा।
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सोमवार, 23 मई 2011

PAK on Terror : Karachi Naval base

The Biggest Taliban Threat for the Pakistan is about the terror attack in Pakistan Karachi City. The Attack done by 4 Taliban Truck that entered in the army base and started suicide bomber explosive their body with high material of bomb.....Around 12 terrorist was there. They use the bomb-rocket for firing. at least 12billion loss for pakistan from the last 1/2 day....
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शनिवार, 21 मई 2011

कनिमोझी की पेशी, हालत देख रो पड़ी मां

नई दिल्ली.  शुक्रवार को सीबीआई की विशेष अदालत में जमानत याचिका रद्द होने के बाद तिहाड़ जेल में रात बिताकर डीएमके सांसद कनिमोझी शनिवार सुबह सीबीआई की अदालत में पेश हुईं।
अदालत ने कनिमोझी पर लगाए गए आरोपों को बेहद संगीन बताते हुए कहा कि स्वान टेलीकॉम को लाइसेंस दिलवाने के षडयंत्र में कनिमोझी भी घोटाले के मुख्य आरोपी ए राजा के साथ शामिल थीं।
आज कोर्ट में कनिमोझी के साथ पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा भी पेश हुए। कनिमोझी की मां और डीएमके के नेता टीआर बालू भी कोर्ट में मौजूद थे।

बेटी को जेल से आकर कोर्ट में पेश होतो हुए देखकर कनिमोझी की मां रजाथी अम्माल पटियाला हाउस कोर्ट में रो पड़ी।
गौरतलब है कि शुक्रवार को मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने कनिमोझी की जमानत याचिका रद्द कर दी थी जिसके बाद उन्हें कल जेल भेज दिया गया था। कनिमोझी को आज फिर अदालत में पेश किया गया।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आरोपियों पर लगे आरोप की गंभीरता को देखते हुए माना जा सकता है कि गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश की जा सकती है। और इसीलिए अदालत को जमानत याचिका निरस्त करने में कोई हिचक नहीं है। ए राजा की पत्नी ने फैसले के बाद जाकर उन्हें संभाला। इसके बाद कनिमोझी ने अदालत से उनका चश्मा, पुस्तकें और दवाएं उपलब्ध कराने का निवेदन किया। 

डीएमके को हाल ही में तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में बड़ी हार का सामना करना पड़ा है। सीबीआई की विशेष अदालत ने शनिवार को कनिमोझी की जमानत याचिका पर फैसला 20 मई तक के लिए टाल दिया था। सीबीआई के विशेष न्यायाधीश ओपी सैनी ने सह-आरोपी कलैग्नार टीवी के प्रमुख शरद कुमार की जमानत याचिका पर भी फैसला 20 मई तक टाल दिया था। इससे पूर्व, अदालत ने वरिष्ठ अधिवक्ता राम जेठमलानी की दलील सुनने के बाद सात मई को कनिमोझी और शरद कुमार की जमानत याचिका पर आदेश सुरक्षित रखा था।

क्या हैं आरोप

कनिमोझी पर कलैग्नार टीवी के लिए पूर्व दूरसंचार मंत्री ए. राजा की मार्फत 200 करोड़ रुपए रिश्वत लेने का आरोप है। कनिमोझी के टीवी में करीब २० फीसदी शेयर हैं। कनिमोझी २जी स्पेक्ट्रम घोटाले में भी सह-आरोपी हैं। इसके अलावा उन पर ए राजा के साथ मिलकर संदिग्ध कंपनियों को लाभ पहुंचाने का आरोप है। कनिमोझी पर संदिग्ध जमीन सौदों में भी बड़े व्यावसायिक घरानों से बड़ी रकम लेने के आरोप हैं।



जेठमलानी ने कहा, हाई कोर्ट में कर सकते हैं अपील

कनिमोझी के वकील राम जेठमलानी ने कहा है कि इस फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील की जा सकती है। उन्होंने कहा कि अभी उन्होंने फैसला पढ़ा नहीं है। हालांकि उनके बेटे महेश जेठमलानी ने कहा कि उन्हें इस फैसले की उम्मीद नहीं थी। उन्होंने कहा कि सभी आरोपी जांच प्रक्रिया में पूरा सहयोग करेंगे। वरिष्ठ अधिवक्ता केटीएस तुलसी ने कहा कि उन्हें आश्चर्य है कि कनिमोझी को पहले क्यों गिरफ्तार नहीं किया गया।

बीजेपी ने कहा, बाकी जांच भी अदालत की निगरानी में हों
कनिमोझी को जेल भेजने के बाद बीजेपी ने मांग की है कि कॉमनवेल्थ घोटाले सहित देश में हुए बड़े घोटालों की जांच कोर्ट की निगरानी में होना चाहिए। पार्टी प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि जब तक सरकार की निगरानी में जांच होगी, दोषियों पर कोई कार्रवाई नहीं हो सकेगी। उन्होंने कहा कि सीडब्ल्यूजी घोटाले में भी शुंगलू कमेटी ने अपनी जांच रिपोर्ट में कई व्यक्तियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं, लेकिन आरोपियों पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। 



source:
 http://www.bhaskar.com/article/NAT-decision-on-kanimojhi-bail-petition-today-2120037.html?HT1=
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Astra (air to air missile) successfully test fired for second day

This file photo shows a replica of the Astra air-to-air missile (foreground) at the Defence Research and Development Laboratory, Hyderabad. Astra was successfully test-fired for the second consecutive day at Chandipur in Orissa on Saturday.
The missile was test-fired at 1032 hrs and the trial was successful,” Defence Research and Development Organisation (DRDO) sources said.Astra, which uses solid propellant, can carry a conventional warhead of 15 kg. It is the smallest of the missiles developed by the DRDO in terms of size and weight.
It is 3.8-metre long and has a diameter of 178 mm with an overall launch weight of 160 kg. The missile could be launched from different altitudes-it can cover 110 km when launched from an altitude of 15 km, 44 km when fired from an altitude of eight km and 21 km when the altitude is sea-level.
DRDO officials said it was more advanced than the similar class of missiles of the U.S., Russia and France.
The missile’s captive flight tests from Su-30MKI were carried out near Pune in November 2009 when seven sorties were conducted.
Astra’s first flight trial took place on May 9, 2003 from the ITR at Chandipur.

source from: "thehindu news site"
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Launches New Communications Satellite: India

India's geostationary satellite GSAT-8 was successfully put into orbit in the early hours of Saturday, 21st May, 2011. It was launched aboard the Ariane-VA-202 rocket from Kourou space port in French Guiana in South America. The rocket belonging to European Space Agency (ESA) consortium's Arianespace, lifted off with two other payloads aboard.

The 3.1 tonne satellite lifted off at 2:11 am IST and successfully separated from the rocket's upper stage after 31 minutes, putting it in an elliptical equatorial geosynchronous transfer orbit (GTO) at 1,800 km above the Earth. Now under control of ISRO's (Indian Space Research Organisation) Master Control Facility (MCF) facility at Hasan, about 180 km from Bangalore, the satellite will gradually be boosted to its final geostationary orbit at an altitude of about 36,000 km above the Earth in the next couple of days and its solar power panels will be deployed.

ISRO Director, S. Satish said, "The MCF will test and monitor the health parameters of the payloads by June 1. It will be available for DTH services from July 1". As reported earlier, the GSAT-8 carries 24 high-power Ku-band transpoders for Direct-To-Home (DTH) services run by private and government operators. The satellite also has a global position system (GPS) aided geo-augmented navigation (Gagan) as an additional payload. This seeks to improve the accuracy of the widely popular U.S.A.-owned GPS global positioning and navigational system.


source: http://www.techtree.com/India/News/India_Launches_New_Communications_Satellite/551-115240-547.html
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शुक्रवार, 20 मई 2011

China, Pakistan more closer as Gilani visits..





China signalled its intent to deepen strategic ties with Pakistan and back the country’s counterterrorism efforts against international pressure, with the “all-weather” allies signing a number of defence agreements to mark the conclusion of Prime Minister Syed Yousuf Raza Gilani’s four-day visit.
Pakistani officials confirmed on Friday that China agreed to speed up the delivery of 50 JF-17 fighter jets to the country, a deal analysts said underscored the importance of Chinese assistance to Islamabad at a time when relations with Washington have come under strains, with some U.S. legislators calling for a scaling back support.
A joint statement issued on Friday said China believed that Pakistan’s “efforts for promoting peace and stability in South Asia should be recognised and supported.”
It also reiterated Chinese support to Pakistan in the wake of criticism following the May 2 killing of Osama bin Laden, repeating Beijing’s displeasure at the United States for violating Pakistan’s sovereignty by conducting the raid in Abbottabad.
China believed “Pakistan’s sovereignty, independence and territorial integrity should be respected,” the statement said, adding that China “recognised the tremendous efforts and the great sacrifice that Pakistan has made in fighting terrorism,”
On Friday, Chinese President Hu Jintao also voiced strong support for Pakistan’s counterterrorism strategy in talks with Mr. Gilani, pushing back against recent international criticism.
In talks earlier this week, Chinese officials told Mr. Gilani they had taken up the country’s concerns over the May 2 raid in meetings with U.S. officials, calling on them to respect Pakistan’s sovereignty.
Chinese officials said “there should be no harm to the Pakistani sovereignty and the US should understand and appreciate concerns of Pakistan,” Mr. Gilani told reporters.
While his visit has been seen as underscoring the deepening ties between the two countries, Chinese analysts downplayed its significance on the rest of the region, and particularly on the two countries’ relations with the U.S.
“The focus of this visit was the sixtieth anniversary of ties between the two countries, and to deepen economic and trade ties” and not defence or terrorism, Rong Ying, vice president of the China Institute for International Studies (CIIS), told The Hindu.
He, however, added that “China has made clear that Pakistan’s policy on counterterrorism is based on national conditions and interests.”
“This,” he said, “has to be respected by relevant countries.”

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Indian schoolboy rewrites history on the Himalayas

Kathmandu IANS: A 17-year-old schoolboy from a New Delhi suburb, who became a climbing sensation last year by becoming the youngest Indian to conquer Mt Everest, created a new record Friday by becoming the youngest in the world to ascent Mt Lhotse, the fourth highest peak.

After an aborted attempt last week due to bad weather, Arjun Vajpai, from Noida near the Indian capital, finally stood on the 8,516 m summit at 8.15 a.m., reported Asian Trekking, the Kathmandu-based mountaineering agency that had been handling the teen's climbing expeditions since last year.
Mt Lhotse, the third highest peak in the world after Mt Everest, K2 and Kangchenjunga, had never been climbed solo by any Indian.
First summited by Swiss Ernst Reiss and Fritz Luchsinger in 1956, three years after Mt Everest was tamed for the first time by Sir Edmund Hillary and Tenzing Norgay Sherpa, Mt Lhotse has been climbed only by the Indian Army from the subcontinent.
In 2003, a joint India-Nepal Army Expedition led by Col Ashok Abbey from the Indian side saw the first Indian ascent of the mountain that has claimed over 20 lives.
Arjun, who becomes the youngest climber in the world to conquer the technically difficult Lhotse, had set a mountaineering record last year when he scaled Mt Everest, 332m higher than Lhotse, at the age of 16 and became the youngest Indian to accomplish the feat.
'Jai Hind,' said his exultant mother Priya Vajpai, whose image Arjun has been carrying with him for inspiration through his gruelling climbs through Death Zone - the region above 8,000 m where breathing becomes difficult due to the diminishing level of oxygen.
Going off to conquer Mt Lhotse after just having finished his Class XII board exams, Arjun is now set on a career of adventure.
In winter, he is seeking to go on an expedition to the South Pole.
Last year, getting sponsors for the expensive Everest expedition - that costs about $35,000 - proved tougher than summiting the peak.
But the recognition Mt Everest brought him made the Lhotse ascent easier with his school, Ryan International, and two corporate houses - the Aditya Birla Group and ShivVani - coming forward to make the expedition possible.
Besides the Poles, Arjun has a second dream to chase. He wants to follow in the footsteps of his hero, the legendary Italian climber Reinhold Messner, who became the first mountaineer to climb all the 14 peaks worldwide towering over 8,000m.
No Indian has emulated the feat, partly due to two of the peaks - Nanga Parbat and K2 - being located in Pakistan and Indians finding it difficult to obtain visas due to the traditional rivalry between the two nuclear-armed neighbours.
'After this I would like to attempt K2,' Arjun told IANS. 'It is one of the most challenging peaks and I would love to fly the Indian flag on its top.'
(Sudeshna Sarkar can be contacted at sudeshna.s@ians.in) Content courtesy: IANS

Source from:http://in.education.yahoo.com/news/yeduyahooindia/indian-schoolboy-rewrites-history-himalayas-20110520
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गुरुवार, 19 मई 2011

Sec 16 HOSPITAL STAFF Face NO Salaries Problem

IN Chandigarh The employees of Government Multi-Specialty Hospital (GMSH), Sector 16, started a protest outside the medical superintendent's office(SMO) demanding that their salaries for the month of April and arrears pending from June 2010 be released at the earliest. The employees included ward attendants, security staff and class four employees..


The Govt. Misery is that if they are Permanent Employees then they will sure to get everything but, they are contractual, govt totally use them without any appraisal...


Wah India Wah.....
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इस गांधी की जुबान फिसलती है !

वैसे तो राहुल गांधी पर बात करने से ज्यादा जरूरी और मुद्दे भी हैं, जिस पर लिखने की इच्छा हो रही थी, और इन मसलों से लोग सीधे जुड़े भी हैं। मेरा हमेशा से ये मानना भी रहा है कि ब्लाग सिर्फ लिखने के लिए ना लिखूं, बल्कि यहां मैं अपने सामाजिक दायित्वों को भी ईमानदारी से पूरा करुं। आम धारणा है कि मीडिया वाले कुछ भी लिख सकते हैं, कुछ भी बोल सकते हैं, लेकिन हकीकत में ऐसा नहीं है। मीडिया की लक्ष्मण रेखा का अंदाजा आप मीडिया में रहकर ही लगा सकते हैं। पहले अखबारों में रिपोर्टर खबरें लिखते थे और सब एडीटर उस पर हैडिंग लगाकर खबरों को प्रकाशित कर देते थे, अब हालात बदल गए हैं। रिपोर्टर को सुबह हैडिंग थमा दी जाती है और शाम को हैडिंग के अनुरूप खबर लिखनी होती है। इलैक्ट्रानिक मीडिया की बंदिशे तो कुछ और भी ज्यादा है। वैसे तो यहां खबरों से ही कुछ लेना देना नहीं है। टीवी में वही दिखता है, जो बिकता है। इलैक्ट्रानिक मीडिया में राहुल दिख रहे हैं, जाहिर है इस समय वो बिक रहे हैं। बिक रहे हैं कि आशय कुछ और नहीं बल्कि ये कि उनके बारे में लोग रिपोर्ट देखना चाहते हैं। बस इसीलिए मैं भी मजबूर हुआ और सोचा चलो आज फिर एक घंटा खराब कर लेते हैं राहुल के नाम पर।
दरअसल राहुल के चंपुओं की नींद उड़ी रहती है, क्योंकि उनकी जिम्मेदारी है कि राहुल को बड़ा बनाने का कोई भी मौका चूकना नहीं चाहिए। इनके करीबियों को लगा कि दिल्ली से सटे गांव भट्टा परसौल में किसान इस समय आग बबूला हैं, यहां राहुल को फिट किया जा सकता है। बस योजना बनी कि भट्टा गांव जाना है, एसपीजी ने चोर रास्ते का मुआयना किया और अगले दिन राहुल को बाइक से लेकर गांव पहुंच गए। इधर चंपुओं ने मीडिया में खबर उड़ाई कि राहुल यूपी पुलिस की आंख में धूल झोंक कर गांव पहुंचे। खैर ये बात सही है कि और दलों के नेता वहां नहीं पहुंच पाए जबकि राहुल पहुंच गए।
आइये अब मुद्दे की बात करते हैं, राहुल कहते हैं कि हम इस मसले पर सियासत नहीं कर रहे हैं बल्कि किसानों को उनका हक दिलाना चाहते हैं। भाई राजनीति में कोई किसी का दुश्मन नहीं होता है। ऐसे में अगर राहुल सही मायनों में किसानों की समस्या का हल चाहते तो वो इसके लिए यूपी की मुख्यमंत्री मायावती से मिलने का समय मांगते और किसानों के साथ लखनऊ जाते। लेकिन राहुल कहां गए, प्रधानमंत्री मनमोहन के पास। अब प्रधानमंत्री ने यूपी सरकार से रिपोर्ट मांगी है। अब अगर राहुल को प्रधानमंत्री से न्याय नहीं मिला, फिर क्या करेंगे वो, क्या यूएनओ चले जाएंगे।

चलिए राहुल गांधी प्रधानमंत्री से मिल लिए अच्छी बात थी, लेकिन उन्हें मीडिया के सामने किसने कर दिया। जब उन्हें ये नहीं पता कि मीडिया से कितनी और क्या बात करनी है तो फिर उन्हें कैमरे के सामने क्यों लाया गया। ये बात मैं आज तक नहीं समझ पाया। राहुल ने कैमरे पर कहा कि भट्टा परसौल गांव में किसानों को जिंदा जला दिया गया और महिलाओं के साथ बलात्कार किया गया। ये दोनों बातें उतनी ही गलत हैं, जैसे मैं ये कहूं कि देश के प्रधानमंत्री राहुल गांधी हैं। फिर भी राहुल और उनके चंपू नेता जब कहते हैं, इस मुद्दे पर वो राजनीति नहीं किसानों को न्याय दिलाना चाहते हैं, तो हंसी आती है। अब हालत ये है कि कांग्रेस के बडे नेताओं को डैमेज कंट्रोल के लिए आगे आना पड़ा है।
मुख्यमंत्री मायावती को भी ये कहने का मौका मिल गया कि राहुल ड्रामेबाजी कर रहे हैं। सच तो ये हैं कि अब लगने भी लगा है कि वो ड्रामेबाजी कर रहे हैं। कांग्रेस के दिमागी दिवालियेपन की हालत ये हो गई है कि यूपी कांग्रेस के अधिवेशन में भी वो पूरे समय तक भट्टा परसौल गांव की मुश्किलों पर चर्चा करने तक सिमट कर रह गए। अरे कांग्रेसी मित्रों, यूपी में हाशिए पर हो, कुछ ठोस पहल करो, जिससे विधानसभा में आपकी संख्या कुछ सम्मानजनक हो जाए। पूरे दिन इस अधिवेशन में इतनी झूठ और फरेब की बातें हुई कि भगवान को भी खफा हो गए। इसलिए दिन में तो पांडाल में आग लगी और रात में ऐसा आंधी तूफान आया कि पांडाल ही उड़ गया, और दो दिन के अधिवेशन को एक दिन में समेटना पड़ गया।

राहुल के चंपुओं को एक बात और समझ में आनी चाहिए कि जब वो सरकार पर आरोप लगाते हैं कि अगड़ों के साथ मारपीट की गई, किसानों को जिंदा जलाया गया, महिलाओं के साथ बलात्कार की घटना हुई, तो मायावती के मतदाता और संगठित हो जाते हैं। उन्हें लगता है कि बहन जी जब कानून का डंडा चलाती हैं तो ये नेता लोग बेवजह चीखते हैं। ऐसे में अगर मैं ये कहूं कि राहुल कांग्रेस के लिए कम मायावती के लिए ज्यादा काम कर रहे है तो गलत नहीं है। बहरहाल राहुल जिस तरह के आरोप लगाया करते हैं वो किसी पार्टी के ब्लाक स्तर का नेता लगाए तो बात समझ में आती है, राहुल के मुंह से तो कत्तई अच्छी नहीं लगती।
राहुल ने भट्टा परसौल के मामले में जो कुछ भी किया उससे वरुण गांधी की याद आ गई। वरुण ने अल्पसंख्यकों को लेकर जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया था उससे उनकी न सिर्फ थू थू हुई, बल्कि उन्हें जेल तक जाना पड़ा। अब राहुल गांधी को ले लीजिए, पहले गांव वालों के बीच में उन्होंने कहा कि उन्हें तो भारतीय होने पर ही शर्म आ रही है, और अब जिंदा जलाने और बलात्कार की जो बातें उन्होंने की उसे तो भट्टा गांव के लोग ही सही नहीं मानते। लगता है कि इन दोनों गांधियों को जुबान फिसलने की बीमारी है।

चलते चलते..
मेरे कहने का तरीका गलत हो सकता है, पर आप वो ही समझें जो मैं आपके साथ शेयर करना चाहता हूं। कांग्रेस में चमचागिरी की हालत ये हो गई है कि पार्टी के एक ठीक ठाक नेता ने बातचीत में मुझसे कहा कि मैं राहुल गांधी का बायां हाथ बनना चाहता हूं। मैं परेशान कि लोग तो दाहिना हाथ बनने की बात करते हैं, ये बायां क्यों। मुझसे रहा नहीं गया और मैने पूछ लिया.. भाई आप बाया हाथ क्यों बनना चाहते हैं। उन्होंने बड़ी मासूमियत से जवाब दिया कि श्रीवास्तव जी बाएं हाथ की पहुंच कहां कहां होती है, आप नहीं जानते। खैर सियासत है..कुछ भी संभव है।
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बुधवार, 18 मई 2011

Now, access Facebook without internet

Love chatting with your friends on facebook and want to stay connected on social networking? Now you can do all this and not even worry about spending money on internet usage. Singapore-based software applications developer, U2opia Mobile, has developed a new application for mobile phones that will
allow them to access Facebook on all kinds of handsets, without paying for a data connection. Unstructured Supplementary Data (USSD) is the technology used by telecom players to send alerts to their users. The technology will help users send and view updates on their friends’ Facebook walls. U2opia launched this application on Tuesday with telecom major Bharti Airtel.
While Airtel customers can update their Facebook status through this USSD service free of cost, Rs1 per day will be applicable for accessing the full-feature application, which enables viewing news feeds, commenting on or liking news feed stories, posting on friends’ walls, confirming friend requests, viewing notifications and adding friends.
 'In India, where the penetration of smart phones is relatively low and the use of internet on mobiles is limited to key cities, many users are excluded from accessing their Facebook accounts via mobile phones,' said Shireesh Joshi, Bharti Airtel, director of marketing, Mobile Services, in a statement.


Source:Today HTmedia
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Dominique Strauss-Kahn's resignation IMF 's as MD

Shamed NEWS towards the World Wide that the IMF International Monetary Fund MD Mr. Dominique Strauss-Kahn has resign from his post due to the pressure of international community.




The Statement of The Stupid Person of the Week is here: 
all sources are form Routers:


"
Mr. Strauss-Kahn made the following statement in a formal letter of resignation to the Board: Ladies and Gentlemen of the Board: It is with infinite sadness that I feel compelled today to present to the Executive Board my resignation from my post of Managing Director of the IMF. I think at this time first of my wife-whom I love more than anything-of my children, of my family, of my friends. I think also of my colleagues at the Fund; together we have accomplished such great things over the last three years and more. To all, I want to say that I deny with the greatest possible firmness all of the allegations that have been made against me. I want to protect this institution which I have served with honor and devotion, and especially-especially-I want to devote all my strength, all my time, and all my energy to proving my innocence. Dominique Strauss-Kahn The Fund will communicate in the near future on the Executive Board's process of selecting a new Managing Director. Meanwhile, Mr. John Lipsky remains Acting Managing Director
"


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मंगलवार, 17 मई 2011

first Indian woman pistol shooter to make Olympic grade:Annu Raj From Haryana




 27-year-old Haryana shooter names Annu Raj Singh from Haryana bagged her first World Cup medal, finishing second behind Ukraine’s Olena Kostevych on the other side of the planet.
Dr Singh (Her Father) was the first to realise, and did not need to be informed as is the custom, that his daughter had bagged another quota place for the 2012 London Olympics.
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Pakistan has sacrificed to fight terror, is a victim: China Latest

Facing growing international scrutiny after world's top terrorist Osama bin Laden was killed on its soil, China today came to the rescue of its ally Pakistan, saying that Beijing "unswervingly" supports Islamabad's counterterrorism efforts.
"Pakistan has made very important contribution to international counter terrorism cooperation as well as great sacrifices," Chinese Foreign Ministry spokesperson, Jiang Yu said, as Pakistan Prime Minister Yusuf Raza Gilani, began a key visit to the country, declaring China as his country's best friend.
Brushing aside criticisms against Pakistan in the aftermath of the killing of bin Laden, China said it "unswervingly" backed Islamabad's counterterrorism efforts and asked US to strengthen anti-terror cooperation with Pak by providing more aid.
"Indeed Pakistan is the victim of terrorism," Jiang said


From :Indian Express Router's
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सियासी गलियारे की हकीकत

सत्ता के गलियारे में पिछला 15 दिन काफी उतार चढाव वाला रहा। आइये हर मामले में आपको छोटी छोटी जानकारी देता हूं। बात करेंगे पश्चिम बंगाल से लेकर तमिलानाडु और कर्नाटक तक की। पेट्रोल की कीमतों के बारे में भी। सबसे पहले बात पश्चिम बंगाल के लाल किले को ढहाने वाली ममता बनर्जी की।

चलिए छोटी सी बात कर ली जाए ममता बनर्जी को लेकर, क्योंकि अब उन्हें देनी है अग्निपरीक्षा। ममता तेज तर्रार नेता हैं, अगर उन्हें आयरन लेडी कहें तो गलत नहीं होगा। लेकिन मेरा मानना है कि वो सत्ता के खिलाफ संघर्ष को तो कुशल नेतृत्व दे सकती हैं, सरकार का नेतृत्व करना उनके लिए किसी चुनौती से कम नहीं हैं। सियासत मे तरह तरह के समझौते करने पड़ते हैं, लेकिन ममता किसी तरह का समझौता कर पाएंगी, उनके व्यक्तित्व से तो नहीं लगता है। इतना ही नहीं वो अपनी पार्टी के नेताओं पर आंख मूंद कर भरोसा भी तो नहीं करतीं हैं।

केंद्र की सरकार में जब ममता बनर्जी ने शामिल होने का फैसला किया तो उनके सांसदों की संख्या के हिसाब से कम से कम छह लोगों को कैबिनेट मंत्री बनाया जा सकता था, लेकिन पार्टी नेताओं पर भरोसा ना करने वाली ममता ने अपनी पार्टी के किसी भी नेता को कैबिनेट मंत्री नहीं बनाया। केंद्र में वो अकेले कैबिनेट मंत्री रहीं। पार्टी के बाकी नेताओं को मन मसोस कर राज्यमंत्री पर ही संतोष करना पड़ा। टीएमसी के नेता ममता के खिलाफ मुखर होकर बोले तो नहीं, लेकिन ये पीड़ा उनकी पार्टी के कई नेताओं में देखी गई।

अब ममता को पश्चिम बंगाल में पूरा मंत्रिमंडल बनाना है। ये काम उनके लिए एक बड़ी चुनौती होगी। ममता की ईमानदारी की बात होती है तो लोग उन्हें पूरे नंबर देते हैं। सूती साड़ी और हवाई चप्पल को वो सादगी से कहीं ज्यादा हथियार के रूप में इस्तेमाल करती हैं। बड़ी बात ये है कि क्या ममता अपने मंत्रिमंडल में शामिल लोगों को भी यही सलाह देगी कि वो सादगी से रहें। तड़क भड़क में ना पड़ें। मुझे लगता है कि ऐसा वो नहीं कर पाएंगी, क्योंकि उनकी पार्टी में शामिल 80 फीसदी से ज्यादा लोग डिजाइनर ड्रेस में भरोसा करते हैं। ममता बनर्जी को अब दिखावे से ज्यादा प्रैक्टिकल होना पडेगा। चलिए अभी से कुछ कहना जल्दबाजी होगी, जल्दी ही सब सामने आ जाएगा। पहले तो मंत्रिमंडल का गठन होने दें, देखते हैं वो अपने छवि वाले नेता कहां से लाती हैं। वैसे ममता जी...

राजनीति में अक्सर जूते खाने पड़ते हैं,

कदम कदम पर सौ सौ बाप बनाने पड़ते हैं।

और आपसे ऐसा कम से कम हमें उम्मीद नहीं है। इसलिए ना जाने क्यों मुझे शक है कि आप सरकार का नेतृत्व कैसे कर पाएंगी।

तमिलनाडु में डीएमके और एआईएडीएमके कहने को तो राजनीतिक दल हैं, लेकिन इनका एक दूसरे से व्यवहार सांप और नेवले जैसा है। दोनों एक दूसरे को फूटी आंख नहीं देखना चाहते। ये राजनीतिक लड़ाई को व्यक्तिगत लड़ाई की तरह लड़ते हैं, जिसे जब मौका मिलता है वो एक दूसरे को नीचा दिखाने, यहां तक की उसे जेल भेजने से भी पीछे नहीं रहते।

टू जी स्पेक्ट्रम घोटाले में ए राजा को जेल हो जाने के बाद डीएमके की तमिलनाडु में काफी थू थू हुई। इसके साथ ही विधानसभा चुनाव में पार्टी हाशिए पर पहुंच गई। मुख्यमंत्री पद का शपथ लेने के बाद जयललिता पूरी तरह फार्म में आ चुकी हैं, अभी वो उन वादों को पूरा कर रही हैं, जो उन्होंने जनता से किए थे। उसके बाद उनका अपना एजेंडा शुरू होगा, एजेंडा साफ है ना सिर्फ करुणानिधि बल्कि पूरे परिवार को सबक सिखाना। वैसे टू जी स्पेक्ट्रम घोटाले की जांच कर रही सीबीआई करुणानिधि के घर तक दस्तक देने को तैयार बैठी है। ऐसे में हो सकता है कि जयललिता कुछ इंतजार कर लें कि जब सीबीआई ही इनकी दुर्गत करने में लगी है तो वो क्यों अपने हाथ गंदे करें। वैसे इतना धैर्य देखा तो नहीं गया है जयललिता में।

छूटल घाट धोबनिया पइलस,

अब त पटक-पटक के धोई,

कहो फलाने अब का होई..    हाहाहाहा चचा करुणानिधि


कर्नाटक की अगर बात करें तो समझ में नहीं आता कि वहां सरकार बीजेपी नेता युदुरप्पा की है या फिर कांग्रेसी राज्यपाल हंसराज भारद्वाज की। हंसराज की छवि एक ऐसे नेता की रही है जो हमेशा विवादों में रहना पसंद करते हैं। केंद्र में कानून मंत्री रहने के दौरान भी वो हमेशा सुर्खियों में रहे। भारद्वाज जब से कर्नाटक पहुंचे है, वहां की सरकार को अस्थिर करने मे लगे हुए हैं। ये सही बात है कि कर्नाटक में बीजेपी नेताओं के बीच आपस में ही कुछ अनबन है, जिसके चलते उठा पटक होती रहती है। लेकिन इसका ये मतलब कत्तई नहीं कि कांग्रेसी राज्यपाल राजभवन में ही सियासी खेल शुरू कर दें।

सरकार बहुमत में है या नहीं इसका फैसला विधानसभा में ही होना चाहिए। अगर ये राजभवन में तय होने लगा तो हमारा संघीय ढांचा चरमरा जाएगा। आपको याद होगा तीन चार महीने पहले भी हंसराज भारद्वाज सरकार को बर्खास्त करने और यहां राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश कर चुके हैं और तमाम विचार विमर्श के बाद गृहमंत्रालय ने हंसराज की सिफारिश को खारिज कर दिया। अब एक बार फिर उन्होंने सरकार को बर्खास्त करने की सिफारिश की है। इस बार तो वो सिफारिश करने के पहले दिल्ली में भी जोड़ तोड़ करके कर्नाटक पहुचे। पहले यहां उन्होंने गृहमंत्री पी चिदंबरम से बात की फिर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मिले। वो दोनों नेताओं का समर्थन चाहते थे। हालाकि बीजेपी जिस आक्रामक मुद्रा मे है, उससे कर्नाटक की सरकार को बर्खास्त करने की हिम्मत केंद्र सरकार जुटा पाएगी, लगता नहीं है। वैसे भी सरकार के इस फैसले को संसद में भी पास कराना होगा और सरकार को पता है उच्च सदन यानि राज्यसभा में उनकी संख्या कम है, ऐसे मे उनका ये कदम आत्मघाती साबित हो सकता है। लेकिन इस पूरे एपीसोड में राज्यपाल हंसराज भारद्वाज का काला और गंदा चेहता जरूर सामने आ गया है।

हां अगर चलते चलते पेट्रोल की बात ना करुं तो सियासी गलियारे की गतिविधिया अधूरी रह जाएंगी। ये सही है कि अंतर्रराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमते आग उगल रही हैं, लेकिन सिर्फ ये कह कर सरकार अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकती। आपको ये जानकार हैरत होगी कि जब पेट्रोल के दाम बढ़ रहे हैं तो जेट फ्यूल (हवाई जहाज में भरा जाने वाला ईधन) के दाम कम हो रहे हैं। जब हम कहते हैं कि सरकार बडे़ लोगों के मुनाफे की बात करती है तो गलत थोड़े कहते हैं। ये उसका उदाहरण है। वैसे तेल में लगी आग के लिए केंद्र और राज्य सरकारें दोनों जिम्मेदार हैं। आपको बता है कि 60 रुपये लीटर पेट्रोल बेचने पर आयल कंपनियों के खाते में सिर्फ 28 रुपये आते हैं और बाकी के 32 रुपये हम केंद्र और राज्य सरकार के विभिन्न प्रकार के टैक्स भरते हैं। गरीबों और मध्यम श्रेणी के लोगों को कैसे राहत दी जा सकती है, इस पर हम अलग से फिर चर्चा करेंगे।
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गुरुवार, 12 मई 2011

राहुल तब शर्म क्यों नहीं आई..

आज बात खालिस सियासत की। दिल्ली से सटे ग्रेटर नोएडा के किसान उत्तर प्रदेश सरकार से खफा हैं, वजह है उनकी कीमती जमीन का औने पौने दाम में मायावती सरकार अधिग्रहण कर रही है। किसानों की मांग है कि उनकी जमीन का उन्हें वाजिब दाम मिलना चाहिए। किसानों की मांग जायज है, उन्हें उनका हक मिलना ही चाहिए।

अपने हक की लड़ाई किसान महीनों से लड़ रहे हैं, पर तब राहुल ही नहीं किसी भी सियासी दल ने उनका साथ नहीं दिया। सप्ताह भर पहले जब यहां माहौल बिगड़ा, पुलिस और किसानों के बीच फायरिंग में चार लोगों की मौत हो गई और डीएम एसपी भी घायल हो गए तो राजनेताओं ने किसानों के गांव की ओर रुख किया। माहौल ना बिगड़े इसके लिए सूबे की सरकार ने धारा 144 लगा दी, इसका मतलब पांच व्यक्ति से ज्यादा लोग गांव के आसपास जमा नहीं हो सकते। इसके बावजूद यहां चौधरी अजित सिंह ने जाने की कोशिश की तो पुलिस ने उनका रास्ता रोक लिया। इसी तरह बीजेपी नेता राजनाथ सिंह और समाजवादी पार्टी के नेता शिवपाल यादव को भी वहां नहीं जाने दिया गया। राहुल गांव के चोर रास्ते से होते हुए वहां पहुंचने में कामयाब हो गए।

राहुल गांधी का लड़कपन

जी हां इसे तो राहुल का लड़कपन ही कहा जाएगा, क्योंकि वो एसपीजी प्रोटेक्टेड नेता हैं और उन्हें कहीं भी जाने के पहले वहां की सूबे की सरकार को बताना चाहिए, जिससे उनकी सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम किया जा सके। लेकिन राहुल ने ऐसा नहीं किया। बात काल्पनिक हो सकती है, लेकिन अहम है कि अगर यहां राहुल के साथ कुछ भी हो जाता तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होती। जाहिर है यूपी की सरकार तो हाथ खड़े कर देती और एसपीजी को जवाब देते नहीं बनता। वैसे तो गांव में मीडिया से बात करने की जिम्मेदारी कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने संभाल रखी थी, लेकिन गांव वालों से बात करते हुए राहुल ने कहा कि इस गांव में आकर जो हालात हमने देखा है, उससे हमें भारतीय होने पर शर्म आ रही है। मैं राहुल की बात से इत्तेफाक नहीं रखता हूं। क्योंकि मैं जानता हूं कि कई ऐसे मौके आए जब राहुल को भारतीय होने पर नहीं उस पार्टी का नेता होने पर शर्म आनी चाहिए थी जो उन्हें नहीं आई।

तब शर्म क्यों नहीं आई राहुल

1. जी मैं बताता हूं राहुल को उस समय शर्म क्यों नहीं आई, जब कारगिल के शहीदों की विधवाओं के लिए मुंबई में बने आदर्श सोसायटी के फ्लैट कांग्रेस नेताओं ने हथिया लिए। इसमें कांग्रेस के एक दो नाम नहीं कई नामचीन नेता हैं। यानि पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण, विलासराव देशमुख, सुशील कुमार शिंदे और अभी के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज सिंह चव्हाण शामिल हैं। इतने कांग्रेसियों ने जब विधवाओं के फ्लैट कब्जाए तो कांग्रेसी होने पर शर्म क्यों नहीं आई।

2. कॉमनवेल्थ घोटाले में कांग्रेस नेता सुरेश कलमाडी को जेल जाना पड़ा। करोड़ों रुपयों की हेराफेरी में कलमाडी के बाद अब दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को भी नोटिस हो चुका है। गवर्नर पर भी इस गोरखधंधे में शामिल होने की बात की जा रही है। इसके अलावा जांच अधिकारी जयपाल रेड्डी के मंत्रालय की भूमिका को भी खंगाल रहे हैं। तब राहुल को शर्म क्यों नहीं आई।

3.टू जी स्पेक्ट्रम के आवंटन में कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार के एक मंत्री ए राजा जेल में हैं। उन पर हजारों करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप है। इस पर उन्हें शर्म क्यों नहीं आई।

4. देश का लाखों करोड़ रुपया देश के धनपशुओं ने विदेशी बैंकों में जमा कर रखे हैं। बीजेपी के साथ ही तमाम सामाजिक संगठन कालेधन को वापस लाने की मांग कर रहे हैं और वित्तमंत्री ऐसा करने से हाथ खड़े कर रहे हैं। इस पर भी तो उन्हें शर्म आ सकती है। क्यों नहीं शर्म आई?

5. राहुल जी हालत ये हो गई कि सरकार के भ्रष्टाचार के खिलाफ सामाजिक संगठनों के साथ पूरा देश खड़ा हो गया। तब कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार घुटने टेकते हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ कानून का मसौदा बनाने को तैयार हुई। देश भर में आपकी पार्टी की थू थू हुई, फिर भी आपको शर्म नहीं आई।

मैं मानता हूं कि आप संवेदनशील है, आप गरीबों के दुख दर्द को समझने की कोशिश करते हैं। रामराज्य की परिकल्पना आपके दिमाग में है। अगर यूपी के किसानों को उनकी जमीन का वाजिब हक ना मिलने पर आपको भारतीय होने पर ही शर्म आ रही है तो महाराष्ट्र में जहां आपकी सरकार है वहां विदर्भ में तमाम किसान आत्महत्या कर रहे हैं। विदर्भ में भी यही बात आपने क्यों नहीं कहा कि यहां की हालत देख आपको शर्म आ रही है। ये कुछ ऐसे सवाल हैं जिसका जवाब देश की जनता आप से जानता चाहती है।

राहुल भारतीय होने पर शर्म नहीं गर्व कीजिए

अगर मैं ये कहूं की आजाद भारत की ये सबसे भ्रष्ट सरकार है तो गलत नहीं होगा। मुझे लगता है कि आप मेरी बात से सहमत होंगे और राहुल भारतीय होने पर शर्म की बजाए गर्व कीजिए। जहां खामियां है वो दूर होनी चाहिए, ना कि शर्म से पीछे हटना चाहिए।





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बुधवार, 11 मई 2011

Civil services 2010 result out

S. Divyadharshini  a Law graduate of Chennai grab the  national Civil Services Examination 2010. The Union Public Service Commission announced the results on Wednesday and released the merit list of 920 candidates who made it to the Civil Services.
Ms. Divyadharshini (24) said she wanted to join the civil services to contribute significantly to the development of the country. Cracking the examination in her second attempt, she said, “This success is a reward for hard work and perseverance. My parents, my mentor Prabhakaran and friends played a significant role in my success. I will serve society better as an IAS officer.”

here is a list of top 50 toppers.

1 014421 S DIVYADHARSHINI
2 316736 SWETA MOHANTY
3 021490 R V VARUN KUMAR
4 051340 ABHIRAM G SANKAR
5 336365 PULKIT KHARE
6 005226 RAVI DHAWAN
7 014401 KARTHIK GURUNATHAN IYER
8 082001 M ARVIND
9 002040 AJAY PRAKASH
10 006951 ALOK RANJAN GHOSH
11 026015 AMIT KHATRI
12 163781 K V N CHAKRADHARA BABU
13 100420 ANIRUDH SRAVAN P
14 004750 VINAY PRATAP SINGH
15 000491 REKHAWAR RAHUL ASHOK
16 090829 SHRUTI
17 028302 SINDHU B
18 006267 POMMALA SUNIL KUMAR
19 003036 GOKUL G R
20 068310 HEPHSIBA RANI KORLAPATI
21 045530 ADITYA DAHIYA
22 016405 K VIJAYAKARTHIKEYAN
23 153872 KURMA RAO M
24 307471 CHANDRA SEKHAR SAKHAMURI
25 004372 V JAYA CHANDRA BHANU REDDY
26 002264 V S CHOUDARY KOLASANI
27 174780 HARI NARAYANAN M
28 286894 RAGAPRIYA R
29 169840 R MENAKA
30 067018 DEEPA S MUDHOL
31 006427 MANTRI GOVINDA RAO
32 001251 ARINDAM DAKUA
33 322760 HAULIANLAL GUITE
34 111521 SHIV SAHAY AWASTHI
35 033523 TARIQ THOMAS
36 039417 RAHUL KUMAR
37 121961 MAHENDRA KUMAR
38 039089 SHIVANGI SWARNKAR
39 295369 SHUCHITA KISHORE
40 182667 PARDHI SOURABH ZAMSINGH
41 249221 LALIT JAIN
42 005916 OAK AAYUSH SANJEEV
43 001984 ISHA KHOSLA
44 321817 PATIL PRASHANT JEEVAN
45 022706 AMIT KISHORE
46 326435 MITHILESH MISHRA
47 214498 RAVI JHA
48 061308 ANEESH SEKHAR S
49 000641 HIMANSHU SHARMA
50 069753 RUCHIKA DIWAKAR
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New Verna Launched Starts 6.99Lacs

 In  India Hyundai  finally launched the New Exiting Verna saloon in a in New Delhi today. With prices of the Verna starting at Rs 6.99 lakh for the base petrol version, going all the way up to Rs 10.74 lakh for the 1.6 diesel automatic,  Here I explain the prices of all the variants are:



How  you feel about this tell me..
















ALL PRICES EX-SHOWROOM, DELHI Hyundai Verna 1.4 petrol - Rs 699,000
1.6 petrol mid-variant - Rs 764,500
1.6 petrol SX - Rs 824,500
1.6 petrol SX (O) - Rs 894,500
1.6 petrol SX (O) AT - Rs 964,500

Hyundai Verna 1.4 diesel - Rs 809,000
1.6 diesel - Rs 874,500
1.6 diesel SX - Rs 934,500
1.6 diesel SX (O) - Rs 10,04,000
1.6 diesel SX (O) AT - Rs 10,74,500






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मंगलवार, 10 मई 2011

पायलटों ने कोर्ट को दिखाया ठेंगा




जाटों ने आरक्षण के लिए ट्रेनों को बंधक बनाया तो एयर इंडिया के पायलटों ने लगभग 10 दिन तक हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों को बंधक बनाए रखा। उत्तर प्रदेश और हरियाणा की सरकार ने जाटों के खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई करने से साफ इनकार कर दिया। वजह और कुछ नहीं सिर्फ जाट वोट नाराज ना हो जाएं कि अगले साल विधानसभा चुनाव में वो सरकार के खिलाफ बिगुल बजा दें। इसलिए प्रदेश की सरकारों ने जाटों से अंदरखाने समझौता किया कि वो ट्रेन रोकेंगे, सड़कों पर वे कोई उपद्रव नहीं करेंगे। अब ट्रेन तो केंद्र की और ममता की है, लिहाजा सूबे की सरकार ने इस आंदोलन से आंख मूंद लिया।

हालत ये हो गई रोजाना दर्जनों ट्रेन रद्द होने लगी, लेकिन केंद्र और राज्य की सरकारें खामोश रहीं। आखिरकार इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बैंच ने जाटों के आंदोलन को गंभीरता से लिया और केंद्र के साथ राज्य सरकार को फटकार लगाने के साथ ही आंदोलनकारियों से सख्ती से निपटने के आदेश दिए। कोर्ट के आदेश के बाद अगले ही दिन जाटों ने रेल पटरी को खाली कर दिया।

अब बात एयर इंडिया के पायलटों की। इंडियन एयर लाइंस और एयर इंडिया के विलय के बाद पायलटों की मांग थी जब दोनों कंपनियों का विलय हो गया है तो वेतन में भेदभाव क्यों है। इस महत्वपूर्ण मांग को लेकर वो लंबे समय से प्रबंधन को हड़ताल की नोटिस दे रहे थे। इसके बाद भी प्रबंधन ने बातचीत से मसले को सुलझाने का प्रयास नहीं किया। ऐसे में मजबूर होकर एयर इंडिया के पायलट हड़ताल पर चले गए। इससे बड़ी संख्या में हवाई सेवाएं प्रभावित हुई। रोजाना 90 फीसदी फ्लाइट रद्द की जाने लगी। एयर इंडिया को करोडों का नुकसान हुआ, बाद में सख्ती दिखाते हुए पहले सरकार ने सात पायलटों को बर्खास्त किया, यूनियन की मान्यता खत्म की और हड़ताल को अवैध घोषित कर दिया। इतना ही नहीं हड़ताली पायलटों पर एस्मा लगाने की बात हुई तो पायलटों ने साफ कर दिया कि वो काम पर नहीं लौटेगें भले जेल चले जाएं।


दिल्ली हाईकोर्ट को लगा कि अब इस मामले में उसे हस्तक्षेप करना चाहिए और कोर्ट ने तत्काल हड़ताल खत्म करने आदेश दिया। पर पायलटों का दिमाग सातवें आसमान पर था, लिहाजा उन्होंने कोर्ट का आदेश मानने से साफ इनकार कर दिया।
पहले तो सरकार सख्त दिखने की कोशिश करती रही ओर कहा कि हड़ताल खत्म किए बगैर कोई बातचीत नहीं होगी। लेकिन जब कोर्ट का आदेश पायलटों ने मानने से इनकार कर दिया और उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई भी शुरू हो गई तो सरकार बैक फुट पर आ गई। उसे लगा कि एयर इंडिया के साथ ही बेवजह सरकार की भी फजीहत होगी। इसलिए हड़ताली पायलटों से अचानक बातचीत शुरू कर दी गई और उन्हें भरोसा दिलाया गया कि उनकी मांगों पर ना सिर्फ गंभीरता से विचार होगा बल्कि उसे पूरा भी किया जाएगा। इतना ही नहीं यूनियन की मान्यता बहाल करने और बर्खास्त पायलटों को भी सेवा में लेने का भरोसा दिया गया।

सरकार के झुकने के बाद पायलटों की हड़ताल खत्म हो गई। हड़ताल भले खत्म हो गई, लेकिन बड़ा सवाल ये कि हड़ताल के दौरान यात्रियों को जो मुश्किल हुई उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा, एयर इंडिया को करोडों की चपत लगी इसकी जिम्मेदारी किसकी है। अगर पायलटों की बात माननी ही थी तो जब हड़ताल की नोटिस दी गई उस समय बातचीत क्यों नहीं की गईं। और सबसे बड़ा सवाल ये कि पायलटों ने जो कोर्ट के आदेश को ठेंगा दिखाया इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

जहां तक मुझे याद है कि पहली बार किसी संगठन ने कोर्ट के आदेश को ठुकराया है और अपनी जिद्द पर अडे रहे। फिर भी केंद्र सरकार कोशिश कर रही है कि हड़ताली पायलटों पर अवमानना की कार्रवाई को किसी तरह रोका जाए। सच ये है कि अगर पायलटों को अवमानना की कार्रवाई से मुक्त किया गया तो ये एक नजीर बन जाएगी और आने वाले समय में इसी तरह लोग कोर्ट के आदेश को ठेंगा दिखाते रहेंगे, इसलिए कोर्ट के काम में किसी तरह की दखलअंदाजी नहीं होनी चाहिए।





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शुक्रवार, 6 मई 2011

प्लीज... इस कविता को पूरा कीजिए..


जी, हां मुझे आपकी मदद चाहिए। मैं आगे नहीं सोच पा रहा हूं। मैं चाहता हूं आप सभी मित्रों की मदद से इसे आगे बढ़ाऊं। मुझे भरोसा के आप सभी मित्र कम से कम दो दो लाइन जरूर सुझाएंगे।



कौन सुनेगा कविता मेरी,

किसको है अवकाश।

चला जा रहा हूं धरती पर,

देख रहा आकाश ।



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आपके सहयोग की अपेक्षा है।
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गुरुवार, 5 मई 2011

To LoVe 2015: Osama Bin Laden Biography



Born 1957 for Syrian mother, Osama bin Laden was the seventh son among fifty brothers and sisters.










His father Mohammed Awad bin Laden came to the kingdom from Hadramout (South Yemen) sometime around 1930. The father started his life as a very poor laborer (porter in Jeddah port), to end up as owner of the biggest construction company in the kingdom. During the reign of King Saud, bin Laden the father became very close to the royal family when he took the risk of building King Saud's palaces much cheaper than the cheapest bid. He impressed King Saud with his performance but he also built good relations with other members of the royal family, especially Faisal. During the Saud-Faisal conflict in the early sixties, bin Laden the father had a big role in convincing King Saud to step down in favor of Faisal. After Saud's departure the treasury was empty and bin Laden was so supportive to King Faisal that he literally paid the civil servants' wages of the whole kingdom for six months. King Faisal then issued a decree that all construction projects should go to bin Laden. Indeed, he was appointed for a period as the minister of public works.




Read more: http://www.pbs.org/wgbh/pages/frontline/shows/binladen/who/bio.html#ixzz1LYCz3Xwp
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बुधवार, 4 मई 2011

वाह रे दिल्ली वालों......



अक्सर महानगर वाले यूपी और बिहार को कोसते नजर आते हैं। दिल्ली में गंदगी क्यों है, जवाब मिलता है ये यूपी और बिहार वालों की वजह से। मंहगाई क्यों बढ़ती जा रही है जवाब मिलता है यूपी और बिहार वाले बहुत ज्यादा खाते हैं, इसलिए मंहगाई है। महानगर में मकानों का किराया बहुत ज्यादा बढ रहा है, इसके लिए भी जवाब मिलता है कि यूपी और बिहार वाले अपना घर छोड़ कर महानगरों का रुख कर रहे हैं, इसलिए किराये बढ़ रहे हैं। महानगरों में अपराध बढ रहे हैं, फिर रटा रटाया जवाब यूपी और बिहार की वजह से। जनसंख्या बढने के लिए भी यूपी और बिहार वाले जिम्मेदार। कहने का मतलब ये कि महानगरों में जितनी भी बुराइयां और खामियां है सबके लिए यही यूपी और बिहार वाले जिम्मेदार हैं। चूंकि दिल्ली की सियासत में यूपी और बिहार के लिए आपत्तिजनक टिप्पणी करके किसी भी नेता के लिए चैन की नींद लेना संभव नहीं है, इसलिए यहां तो फिर भी सियासी कुछ बोलने के पहले सौ बार सोचते हैं, लेकिन मुंबई में तो लोग यूपी और बिहार के लोगों पर हमला करने से भी पीछे नहीं रहते।

पर महानगर में रहने वाले कभी ये भी सोचते हैं कि उनके बारे में लोगों की राय क्या है। पिछले दिनों मुझे उत्तराखंड में मसूरी से करीब सौ किलोमीटर और ऊपर चकराता जाना पड़ा। वापसी शनिवार को हो रही थी। वीकेंड होने की वजह से पूरी दिल्ली मसूरी में कैंम्पटीफाल में डेरा डाले हुए थी। इन दिल्ली वालों ने लगभग 1500 से ज्यादा कारों को बेतरतीब जहां तहां खड़ी करके पहाड़ के पूरे रास्ते को जाम कर दिया। यकीन मानिये 8 घंटे से भी ज्यादा समय इस जाम में और लोगों के साथ मैं भी फंसा रहा।

इन गाड़ियों में दिल्ली का नंबर देख हर आदमी दिल्ली वालों को सिर्फ कोस ही नहीं रहा था, बल्कि वो ऐसी गालियां दे रहे थे, जिसे मैं यहां लिख भी नहीं सकता। मैं पूछता हूं दिल्ली वालों, दिल्ली में लेन तोड़ने पर जुर्माना भरते हो, रेड लाइट तोड़ने पर जुर्माना भरते हो, चलती गाड़ी में मोबाइल से बात करने में जुर्माना भरते हो। इसलिए दिल्ली में तो ट्रैफिक नियमों का पालन बखूबी करते हो। लेकिन दिल्ली से बाहर निकलते ही आखिर हो क्या जाता है जो लोगों की गाली सुनते हो। शर्म करो....

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सोमवार, 2 मई 2011

To LoVe 2015: 'कल' 'आज' और 'कल'

कान से चिपके हुए रेडियो से लेकर काऊच से चिपकी हुई तशरीफ़ तक,छिलके वाली मूँगफली से लेकर पॉपकॉर्न तक,चर्चा से लेकर ऐनालिसिस तक, विगत बीस-पच्चीस वर्षों में ही क्रिकेट के स्वरुप में क्रांतिकारी परिवर्तन आए हैं।फक्क सफेद कपङों में खेला जाने वाला पाँच दिवसीय खेल रंग बिरंगी पोशाकों में खेले जाने वाले 180 मिनट के मुकाबले में बदल गया,कलात्मक शॉट्स आक्रामक शॉट्स में तब्दील हो गये,समय के साथ क्रिकेट ने अपना स्वरुप बदला किंतु लोकप्रियता का़यम रखी।
यदि क्रिकेट के बदलते स्वरुप को कालखण्ड में बाँटने का प्रयास किया जाये तो 'कल' 'आज' और 'कल' मे वर्गीक्रत कर सकते हैं,
Maharaja Ranjeet Singh Jee and Team: Image Courtesy : Wikipedia
कलः क्रिकेट का इतिहास या बीता हुआ कल 350 वर्ष से भी पुराना है,भारत में भी इस खेल को ब्रिटिश ही लेकर आए सबसे पुराने क्रिकेट क्लब का श्रेय 'कलकत्ता क्रिकेट क्लब' को प्राप्त है जो 1792 AD में बना,उन्नीसवीं शताब्दी में 'मद्रास''बॉम्बे' और कलकत्ता ही क्रिकेट की प्रमुख शक्तियाँ रहीं, ज़ाहिर है दासता और निर्धनता से पीङित आम जनमानस का खेल न होकर ये श्रेष्ठी वर्ग का खेल था प्रमुख तौर पर अंग्रेज़ों के मनोरंजन का साधन।भारतीय क्रिकेट के पितामह कहे जाने वाले माहाराजा रणजीत सिंह जी के नाम पर 1934 AD में रणजी ट्रॉफी प्रारंभ की गई जो भारत के विभिन्न प्रांतो के बीच खेला जाने वाला वार्षिक आयोजन था, एकतरफा तौर पर 1970 AD तक बॉम्बे ही इस ट्रॉफी को जीतता रहा,इस दौरान एक बङा परिवर्तन यह हुआ कि क्रिकेट भारतीयों का खेल बन गया हालांकि लोकप्रियता में कमी बनी रही।
The 1932 All-India side which toured England. 
Back: Lall Singh, Phiroze Palia, Jahangir Khan, Mohammad Nissar, Amar Singh, Bahadur Kapadia, Shankarrao Godambe, Ghulam Mohammad, Janardan Navle.  Seated: Syed Wazir Ali, C.K.Nayudu, Maharaja of Porbandar (captain), KS Limbdi (vice-captain), Nazir Ali, XX. 
Front: Naoomal Jaoomal, Sorabji Colah, Nariman Marshall.

आजः
1983 cricket world cup winners:Indian Team
क्रिकेट के आज को यदि 1983 AD से प्रारंभ किया जाये तो बहुतों को आश्चर्य होगा, किंतु भारत में क्रिकेट की लोकप्रियता के चरम की कालावधि यही रही,एक अदनी टीम के रुप में भारत ने एकदिवसीय विश्चकप में शिरकत की और कपिल देव की कप्तानी में दो बार की विश्वविजेता वेस्टइंडीज़ को हराकर रातों रात क्रिकेट को 'क्लास' से 'मास' तक पहुँचा दिया,भारत में क्रिकेट के दीवानेपन के सारे उदाहरण उसके बाद के ही मिलेंगे,यहाँ तक कि क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले 'सचिन' भी 1983 की जीत को ही अपने सपने का आधार मानते हैं, उसके बाद भारतीय क्रिकेट ने कई उतार-चढाव देखे,पोशाकें रंगीन हो गईं, नियमों में अभूतपूर्व बदलाव आए, भारत संघर्ष करता और कभी हारता कभी जीतता रहा किंतु विश्वशक्ति बनने से वंचित रहा, फिर आया क्रिकेट में समर्थ कप्तानी का दौर 'सौरभ गांगुली' ने भारतीय क्रिकेटरों की सोच में महत्वपूर्ण बदलाव किया,अब भारतीय खिलाङी भी ऑस्ट्रिलिया जैसी टीम के सामने दब्बू न रहकर दबंग बन गये और उनके ही देश में जाकर श्रंखला पर क़ब्ज़ा किया,धोनी ने इसी परंपरा को जारी रखा और अपने शातिर दिमाग़ से खेल को और सँवार दिया,बेशक प्रतिभाशाली खिलाङी कप्तान के विश्वास पर खरे उतरे और 1983  को दोहराते हुए 2011 में वापस इतिहास रच डाला।
2011 Cricket World Cup Winners: India Team(Image Courtesy: ESPNcricinfo.com)
कलः 
Image Courtesy: iplphotos.com
आज की ही भाँति यदि क्रिकेट के कल का कुछ हिस्सा आज से उठाया जाये तो पाठक प्रश्न कर सकते हैं कि ये आने वाला कल है क्या? बात T20 की हो रही है,क्रिकेट कितना भी लोकप्रिय क्यों न हो अब भी फुटबॉल,बॉक्सिंग जैसे खेलों से कम ही है,क्योंकि ये विश्व के बहुत सीमित देशों में खेला जाने वाला लंबे समय का खेल है,इसी बात को ध्यान में रखते हुए 2003 AD में इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड ने साढे तीन घण्टे के क्रिकेट के छोटे रुप पर प्रयोग करना चाहा,प्रतिसाद काफी अच्छा रहा और ज्लदी ही फटाफट क्रिकेट लोकप्रिय हो गया, हालांकि विवाद उठते रहे कि यह क्रिकेट की मौलिकता के लिये खतरा है किंतु जब धन कुबेर बरसने लगा तो सब साथ हो लिये, भारत लंबे समय तक T20 का विरोधी रहा किंतु पहला T20 विश्वकप जीतते ही ख़ज़ाने की चाभी BCCI के हाथ आ गयी, अब I.P.L. का तमाशा सब देख ही रहे हैं,क्रिकेट खेल न रहकर मनोरंजन का साधन बनता जा रहा है, यह भी एक लाईव रियेलिटी शो है जो दिन भर काम करके थके माँदे लोगों की चक्षु-क्षुधा शांत करता है, 
Image Courtesy: iplphotos.com

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न देश का भाव है न खिलाङी का, किसको सपोर्ट करें कुछ पता नहीं किंतु फिर भी आँखे गङी रहती हैं, खेल ख़त्म हुआ तो लगता है  'क्यों देखा?' 'कौन जीता?' 'क्या आनंद?' 'कब तक याद रखेंगे?' किंतु यही है क्रिकेट का आने वाला कल, शायद ओवर 15 कर दिये जायें या दस, चीयर लीडर बढा दी जायें, खिलाङी और रंग बिरंगी पोशाकों में आयें,या क्रिकेट के अलावा बाकि प्रतिभाओं के आधार पर चयन हो ,जैसे छक्का मारने के बाद बैट्समैन कितना अच्छा नाच सकता है?कौन सा गेंदबाज़ कितनी गालियाँ दे सकता है?ताकि उन्हें 'बीप' 'बीप' करके सुनाया जा सके और TRP बढायी जा सके,कुछ भी संभव है कम से कम श्रीसंत का भविष्य मुझे उज्जवल दिख रहा है, बाकि टेस्ट क्रिकेट बचा रहे यही कामना है,तथास्तु।
रूपक
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