रविवार, 27 मार्च 2011

To LoVe 2015: कहानी पूरी फ़िल्मी है

Image Courtesy: castrolcricket.com
पिछले सैंतीस दिनों से चला आ रहा लंबा महाकुंभ आखिरकार अपने निर्णायक मोङ पर आ चुका है,पिछले आलेख की समाप्ति हुई थी लीग मैचों की समाप्ति के साथ और हमने चर्चा की थी कि पहली बार ऐसा हो रहा है कि सारी मुख्य धारा की टीमें अगले दौर में पहुँची हैं और मुकाबला रोचक होने वाला है,क्वार्टरफईनल की शुरुआत हुई सबको अपने प्रदर्शन से चौंका देने वाले पाकिस्तान और गिरते पङते अगले दौर में स्थान पाने वाले वेस्टइंडीज़ के मुका़बले के साथ,उम्मीद थी कि गेल,पोलार्ड,ब्रावो और रोच जैसे खिलाङियों से सजी यह टीम पाकिस्तान को कङी टक्कर दे पायेगी किंतु मैच इतना एकतरफा और नीरस हो गया कि वेस्टइंडीज़ पर तरस आने लगा,
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चंद्रपाल और सरवन ने शायद विश्वकप की सबसे धीमी पारी का रिकॉर्ड बना डाला और 112 रन पर पूरी टीम सिमट गयी,अफ़रीदी का शानदार प्रदर्शन जारी रहा,कमज़ोर बैटिंग का ठप्पा हटाते हुये बिना विकट गँवाये पाकिस्तान ने शानदार विजय हासिल कर ली,आलरांउंडर खिलाङियों से सजी न्यूज़ीलैंड ने बङा उलटफेर किया और विश्वकप की प्रबल दावेदार दक्षिणअफ्रीका को विश्वकप से बाहर कर दिया,जैसा कि पिछले एक आलेख में उल्लेख किया गया  था दक्षिणअफ्रीका की साढेसाती का या यूँ कहा जाये कि सौ वर्ष का कोई श्राप भोग रही दक्षिणअफ्रीकी टीम फिर बङे मुकाबले में आकर हार गयी,इस हार के बाद अटकलें लगने लगीं कि विश्वकप में अब तक की सबसे मनोरंजक टीम इंग्लैंड भी क्या कोई कमाल कर देगी? हालांकि श्रीलंका को श्रीलंका में परास्त करना बहुत मुश्किल है, इतिहास और आँकङे श्रीलंका के विरुद्ध जाते दिखे और पहली पारी के बाद कयास लगने लगा कि क्या आज फिर कोई उलटफेर होगा,किंतु अपने शानदार प्रदर्शन से प्रतिद्वंदी टीम को जङ से उखाङ फेंकने की आदी श्रीलंका ने दस विकेट से विजय प्राप्त कर ली, 
image Cortesy:espncricinfo.com
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इन सब मुकाबलों से बङा और शानदार था भारत का ऑस्ट्रेलिया से मुकाबला,कयास लगाये जा रहे थे कि ऑस्ट्रेलिया अब पहले वाला ऑस्ट्रेलिया नहीं रहा किंतु फिर भी विश्वविजेता से पार पाना इतना आसान नहीं था, मिनी-फाईनल के नाम से जाने जाने वाली इस टक्कर पर सबकी नज़र थी,
ऑफिस और सङकों पर कर्फ्यू जैसा माहौल बन गया था,सब चाहते थे कि 2003 का बदला ले लिया जाये किंतु मन में कहीं डर भी समाया था,मन में वैसा ही भाव आ रहा था जैसा वार्षिक परीक्षा के समय आता है, डर,बैचेनी,अनिश्चितता,घबराहट,क्या सब ख़त्म हो जायेगा ? क्या पोंटिग की टीम फिर भारत का सपना तोङ देगी? क्या फिरसे हम वहीं वापस आ जायेंगे जहाँ के लिये चार साल पहले चले थे,क्या दक्षिण अफ्रीका को हर बार ऐसा ही लगता होगा? क्या सचिन के सिर का ताज बिना विश्वकप के कोहिनूर के अधूरा रह जायेगा?हज़ारों अटकलें, अपनी टीम पर भरोसा था किंतु पिछले अनुभव बहुत सुखद नहीं थे,बहरहाल मैच शुरु हुआ और भारतीय गेंदबाज़ों ने अपना काम किया, युवराज ने एक बार फिर शानदार गेंदबाज़ी की और दो विकेट चटखा दिये, डर अभी भी हावी था, कोई अपनी जगह से हिलना नहीं चाह रहा था,कोई छक्के,चौके की माँग नहीं कर रहा था,एक अदद जीत की दरकार थी, बहुत सँभल कर खेला भारतीय टीम ने और एक बङी टीम के सामने बङा खेल दिखाया,कई उतार-चढाव आए और हर बार लगा "अब गये क्या?" लेकिन युवराज ने फिर तारणहार की भूमिका निभाई और इस बार रैना के साथ मिलकर,सुईपटक सन्नाटे को चीरता युवराज के बल्ले से निकला वो विजयी स्ट्रोक जिसने विश्वक्रिकेट का इतिहास बदल डाला,
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किसने सोचा होगा कि बैडब्वाय के नाम से कुख्यात हो चुके और सन्यास लेने की तैयारी कर रहे खिलाङी का जीवन यकायक इतना बदल जायेगा कि वो भारतीय खेल का इतिहास लिखने वालों में शुमार हो जायेगा,विश्व क्रिकेट का शक्ति केंद्र बदल डालेगा,पोंटिग के चेहरे पर निराशा साफ़ देखी जा सकती थी,और भारतीय टीम और प्रशंसकों को तो अब तक यकीन नहीं हो पा रहा है,1983 में भारत एक अदनी टीम के रुप में विश्वकप में शामिल हुआ था,किसी ने नहीं सोचा था कि ये विश्चविजेता बन जायेंगे,कपिल देव के लङाकों का वो पौरूष 28 वर्ष तक याद किया जाता रहा उस दौरान और उसके बाद भारत में क्रिकेट के प्रति जो भी पागलपन आया वो उसी विजय की देन था,एक विजय जिसने एक पूरी पीढी की सोच बदल डाली , जिसने सचिन,युवराज,गांगुली,सेहवाग और न जाने कितने बच्चों के करियर की दिशा बदल दी, अब भारत फिरसे उस इतिहास को दोहराने से दो कदम दूर है,इस बार भारतीय टीम अदनी नहीं,उम्मीदों का सबसे ज़्यादा बोझ लिये हुये है।
पिछले एक सप्तताह में जो हुआ वो किसी ब्लॉकबस्टर फिल्म की कहानी से कम नहीं लगता,कहानी जिसका क्लाईमैक्स भारत-पाकिस्तान के बहुप्रतीक्षित मुका़बले से लिखा जायेगा,मुंबई हमलों के बाद से दोनों देशों ने आपस में क्रिकेट नहीं खेला,पाकिस्तान के अंदरुनी हालात भयावाह हैं और अपने देश में हो रही क्रिकेट की उपेक्षा से वहाँ के खिलाङी क्षुब्ध भी होंगे,उनके लिये जीत खोये हुए आत्मसम्मान को वापस पाने की एक कोशिश है और भारत के लिए ये जीत क्रिकेट के युगपुरुष सचिन को दी जाने वाली श्रद्धांजली,कहते सुना गया कि "क्रिकेट इससे अधिक मनोरंजक नहीं हो सकता" ट्वेंटी- ट्वेंटी विश्वकप की उस जीत के बाद भी ऐसा ही कहा गया था.
तटस्थ होकर सोचा जाये तो मन में न चाहते हुए भी ये भाव आ जाता है कि क्या ये सब एक पूर्वनियोजित पटकथा का हिस्सा है? क्या ये सब होना ही था? क्यों न आए ये विचार,जहाँ भारतीय उपमहाद्वीप में खेल के कारण अरबों रुपया कमाया जा सकता हो,बाज़ारवाद है,45 दिनों का अनवरत मानोरंजन है,सब खु़श हैं और नोट बरस रहे हैं, सोच कर भी डर लगता है,काश कि ये कुछ भी सच न हो,क्योंकि हो सकता है खेल के दीवानेपन में फिर किसी के घर गोली चल जाए,फिर कोई शर्त में हज़ारों हारकर जाए,फिर देशों के बीच तनाव की स्थिती बन जाए, और बाज़ार फलता-फूलता रहे, हे विकीलीक्स के जासूसों! यदि ऐसा कुछ हो भी तो भी परदा मत उठाना,फिल्म की तरह लोगों को मज़ा लेने दो, ये कहानी बङी रोचक है, और पूरी फिल्मी है।
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चतुर की चटाईः
चतुर दे रहे हैं लेखा-जोखा क्रिकेट के ब्राज़ील-अर्जेंटीना यानि की भारत-पाकिस्तान के बीच हुए मुका़बलों काः



रोमांचक क्षणः
ये क्षण न केवल इस सप्ताह का वरन आने वाले कई सालों का सबसे रोमांचक क्षण हैः

रुपक


Castrol Cricket Index: तेज़ी से आगे बढ रही पाकिस्तान ने Castrol Cricket Index में भी अपनी अच्छी पकङ बना ली है और भारत से लगभग बराबर के अंक प्राप्त कर चुकी है,सेमीफाईनल का मुक़बला कङी टक्कर देने वाला होगा और बहुत रोचक होगा।आप भी टीमों की तुलना कर सकते हैं:
http://www.castrolcricket.com/performance-zone/team-profile.php?Team_Id=5&cmp=cmp 
Disclaimer
Castrol Cricket Index खिलाङियों के प्रदर्शन को मापने का कारगर तरीका है और इसके पहले उपयोग किये जाने वाले कई विश्लेषणों से इस मायने में पृथक है कि इसमें हर खिलाङी का प्रदर्शन खेल के तीनों पैमानों बल्लेबाज़ी,गेंदबाज़ी और क्षेत्ररक्षण में परखा जाता है किंतु खिलाङी की मूल प्रतिभा(core competence) को ध्यान में रखते हुए,गहन अध्ययन के बाद तैयार की गई यह रैंकिग प्रणाली ICC रैंकिग से भी ज़्यादा कारगर सिद्ध हुई है और क्रिकेट प्रेमी अब भावनाओं और उत्साह के साथ अब विश्वसनीय आँकङों की सहायता से भी अपने वाद-विवाद को मज़ेदार बना सकते हैं,ब्लॉगर Castrol Cricket Index का अनुयायी है और अपने आलेखों में Castrol Cricket Index की सहायता से रोचक तथ्य प्रस्तुत करता है,Castrol Cricket Index द्वारा ब्लॉगर को संपर्क किया गया और अध्ययन के बाद ब्लॉगर को Index विश्वसनीय लगा,किंतु आलेख किसी भी प्रकार से कंपनी का प्रचार नहीं करते और Blogger की राय किसी भी उत्पाद से सर्वथा विलग और निष्पक्ष है)
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रविवार, 20 मार्च 2011

To LoVe 2015: हाथी की पूँछ

Cortesy:espncricinfo.com
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विश्व कप के ग्रुप चरण के मुकाबलों का अंतिम सप्ताह भारत की वेस्टइंडीज़ पर आसान विजय के साथ समाप्त हो गया।पिछले आलेख में हम चर्चा कर रहे थे कि यह अब तक का सबसे खुला विश्वकप है और सभी टीमें कहीं न कहीं कमज़ोर पङी हैं,गत सप्ताह कुछ मुकाबले निर्णायक थे इस लिहाज़ से कि क्वार्टरफाईनल में कौन सी टीम जायेंगी,अंततः कई विश्व कप के बाद ऐसा हुआ है कि आठों टीमें किसी न किसी क्षेत्र मे मज़बूत हैं और जीतने का माद्दा रखती हैं, कोई भी मैच एकतरफा होने की उम्मीद कम है और खेल के लिये यह बङी धनात्मक बात है।
इस विश्वकप की सबसे मनोरंजक या रोमांचक टीम का कोई ख़िताब होता तो अवश्य इंग्लैंड को ही जाता,हारे हुए मैच को अंतिम एक घण्टे मे अपने पक्ष में करके इंग्लैंड ने क्वार्टर फाईनल की उम्मींदे बनाये रखीं और दक्षिण अफ्रीका ने बंग्लादेश को बुरी तरह परास्त कर सारी अटकलों पर विराम लगा दिया,ग्रुप "A" के वर्चस्व की लङाई और भारत में क्वार्टरफाईनल न खेलने की बेचैनी मे पाकिस्तान ने अजेय ऑस्ट्रेलिया के अश्वमेघ  का अश्व रोक लिया और ३४वें मैच मे पराजय का स्वाद चखा दिया,हालांकि ऑस्ट्रेलिया में पहले वाली धार दिखाई नहीं दे रही है,और अब समय है कि क्रिकेट की विश्वशक्ति की धुरी भारतीय उपमहाद्वीप की और स्थानांतरित हो।

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लीग मैच के अंतिम मुकाबले तक अगर-मगर की स्थिती बनी रही और अंततः भारत की विजय से सारे मुकाबले तय हो गये, भारत को अब तीन बार के विश्वविजेता से भिङना है और तैयारियाँ पूरी नहीं लग रही हैं,भारतीय टीम ने ताश के पत्तों के प्रति निष्ठा बनाये रखी और इस बार भी एक बङा स्कोर बनते बनते रह गया,फिर हम पचास ओवर नहीं खेल पाये और फिरसे विकटों का पतझङ जारी रहा, फिर पठान फेल हो गये और फिर भज्जी के आलराउंडर होने का दावा गलत सिद्ध हुआ,फिर कप्तान कोई बङा क़माल करके टीम का मनोबल न बढा सके और फिर सातवाँ बल्लेबाज़ बेफ़ज़ूल ही लगा।ग़ल्तियाँ जारी रहीं और पहले से भारी रहीं,क्षेत्ररक्षण जो पिछले मैच में सुधर गया था फिरसे कमज़ोर लगा और गेंदबाज़ी में नये प्रयोंगों ने वेस्टइंडीज़ को पारी सँभालने का मौका दे दिया, 
Source:http://www.castrolcricket.com/WC-2011/matchreview

हालांकि बहुत कुछ अच्छा भी हुआ जैसे अश्विन का आना और सफल होना,युवराज की मेहनत का प्रतिसाद विश्व कप शतक के रुप में मिलना और सचिन का दो रन बनाकर भी इतिहास रच देना (इस बार बल्ले से नहीं चरित्र की द्रढता से,अंपायर द्वारा आऊट न दिये जाने पर भी सचिन वॉक आऊट कर गये,और फिरसे बिना खेले ही दर्शकों को नतमस्तक होने पर विवश कर दिया,याद आ गया कि शनिवार को कैसे आऊट होने पर भी पोंटिग बेशर्मी से खङे रहे और पाकिस्तानी खिलाङियों द्वारा ताना दिये जाने पर उनसे लङने पर उतारु भी हो गये)।
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कुल मिलाकर अब तक एक भी बार भारत पूरे आत्मविश्वास के साथ कोई जीत दर्ज नहीं कर पाया है,किंतु सीखने कि प्रक्रिया चलती रही,अब सीखने का समय समाप्त हुआ और सबक सिखाने का समय आ गया है।ग़ल्ती की गुंजाईश नहीं बची है और अब एक ही ध्येय है तीन और विजय और विश्वकप पर क़ब्ज़ा। हाथी तो निकल रहा है पूँछ रह जाती है,सब सही होते होते कुछ न कुछ बिगङ जाता है,खैर बङे मुकाबलों मे जो कम गल्तियाँ करेगा और अधिक संयम रखेगा वही हो पायेगा विश्व विजेता।
क्रिकेट का कर्मवीरः 
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 इस सप्ताह निश्चित रुप से तीन बार मैन ऑफ द मैच का खि़ताब जीत चुके और 'मैन ऑफ द सीरीज़' के प्रबल दावेदार हरफनमौला युवराज ही इस श्रेणी के हकदार हैं, बहुत महीने पहले किसी ज्योतिषी ने भविष्यवाणी की थी कि युवराज ही विश्वकप दिलायेंगे और तब युवराज का टीम में  आना भी संदिग्ध लग रहा था किंतु क्या कमाल का खेल दिखाया है,लगातार संघर्षरत इस खिलाङी को अंततः विजय प्राप्त हुई और अपने तीसरे विश्वकप में सैकङा जमाने का सौभाग्य भी पा गये,गेंदबाज़ी में ये भारत के शाहिद अफरीदी बनते जा रहे हैं,और बल्लेबाज़ी भी निखर रही है,वाह युवराज वाह क़माल कर दिया।
चतुर की चटाईः
विश्व कप समापन की ओर है,लीग मैचों के मेराथन के बाद फटाफट तीन चरण होंगे और 2 अप्रैल को वानखेङे के मैदान में विश्व-विजेता का निर्धारण हो जायेगा,इस बार चतुर बता रहे हैं कि आज तक के विश्वकप में कौन-कौन सी टीमें सेमीफाईनल में भिङी हैं,दो बार भारत और पाकिस्तान सेमीफईनल में साथ पहुँचे किंतु एक दूसरे से मुकाबला न हो सका,शायद विश्वकप २०११ में यह शानदार मुकाबला देखने को मिल जायेः


https://spreadsheets.google.com/pub?hl=en&hl=en&key=0AgR1rEkTu-WrdEdBY3pWZzJ1ME9vTlJQRVJRUThxVnc&single=true&gid=0&output=html
रोमांचक क्षणः
युवराज की यह पारी वाकई रोमांचक रहीः

रुपक
(Disclaimer: Castrol Cricket Index खिलाङियों के प्रदर्शन को मापने का कारगर तरीका है और इसके पहले उपयोग किये जाने वाले कई विश्लेषणों से इस मायने में पृथक है कि इसमें हर खिलाङी का प्रदर्शन खेल के तीनों पैमानों बल्लेबाज़ी,गेंदबाज़ी और क्षेत्ररक्षण में परखा जाता है किंतु खिलाङी की मूल प्रतिभा(core competence) को ध्यान में रखते हुए,गहन अध्ययन के बाद तैयार की गई यह रैंकिग प्रणाली ICC रैंकिग से भी ज़्यादा कारगर सिद्ध हुई है और क्रिकेट प्रेमी अब भावनाओं और उत्साह के साथ अब विश्वसनीय आँकङों की सहायता से भी अपने वाद-विवाद को मज़ेदार बना सकते हैं,ब्लॉगर Castrol Cricket Index का अनुयायी है और अपने आलेखों में Castrol Cricket Index की सहायता से रोचक तथ्य प्रस्तुत करता है,Castrol Cricket Index द्वारा ब्लॉगर को संपर्क किया गया और अध्ययन के बाद ब्लॉगर को Index विश्वसनीय लगा,किंतु आलेख किसी भी प्रकार से कंपनी का प्रचार नहीं करते और Blogger की राय किसी भी उत्पाद से सर्वथा विलग और निष्पक्ष है)
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शनिवार, 19 मार्च 2011

विज्ञापन में नारी देह का भौंडा प्रदर्शन

मेने एक सीमेंट का विज्ञापन देखा ..उसमे एक सुडोल शरीर की मालकिन अर्धनग्न कन्या जो सुन्दरता के कथित सभी मापदंडों को पूरा करती प्रतीत हो रही थी ..(जेसा की उसके तन से उजागर हो रहा था) ..
वो विज्ञापन के उस विशाल होर्डिंग में खड़ी हुई दर्शाई गई थी वहीँ दूसरी और उक्त सीमेंट से बनी बिल्डिंग ...और उस बोर्ड पर लिखा था ..
'''''एक अटूट विश्वास,, सोलिड माल,, जिन्दगी भर साथ निभाने का वादा ..एक बार जरुर उपयोग करें .......''
मेरी समझ में ये नहीं आया की सोलिड क्या है ...? में इस पर ज्यादा टिप्पणी नहीं करूँगा ...
विह्यापन सड़क के ऐसे मोड़ पर लगाया गया की उस पर नज़र पड़े बिना रह ही नहीं सकती ..

एक विज्ञापन और जो ..किसी कार का था ...
उसमे एक अति सुंदर अल्प वस्त्रधारिणी कन्या ..उसके शरीर पर कपडे इस प्रकार थे की जो अंग छिपाने थे वे तो नहीं छिप रहे थे.. और जो नहीं छिपाने थे उनको छिपाने की जरुरत ही नहीं होने के कारण नहीं छिपाया गया ..वो उस कार के बोनट पर झुकी हुई थी ..बोर्ड पर लिखा हुआ था ..
''''''क्या बाडी है..कितनी आरामदायक .और स्पीड के तो कहने ही क्या ..इसका माइलेज गज़ब ..सबसे अलग...''''''
में कनफुज्य की बेचा किसको जा रहा है ...मानव बिक्री पर तो क़ानूनी रोक है ..और विज्ञापन से तो ऐसा ही लग रहा था की कार को नहीं ..बेच के ..
अब में आगे नहीं कहूँगा ,,,,,,,,

एक गोरी बनाने की क्रीम का विज्ञापन ...लड़की की शादी नहीं हो पा रही है ..जो भी लड़का आया उसने उसे रिजेक्ट किया ..लड़की ने तत्काल गोरी होने का नुस्खा आजमाया ..
इस क्रम में लड़की को पहले दिन काली बताया ...सातवें दिन ..वो फुलमून नज़र आने लगी .. उसके पुरे मुहल्ले के लड़के उसके घर के सामने शादी का प्रस्ताव लेकर लाइन में खड़े थे ..अब लड़की तय करेगी की उसे किसके साथ शादी करनी है .. जो लड़का देखने आया है ..वो लड़की की असीम सुन्दरता के आगे गद गद है ..

प्रेशर कुकर का विज्ञापन ...............''''
पतिदेव का प्रमोशन रुका हुआ है ..
शाम को बोस को खाने पर बुलाया ..पत्नी ने फलां प्रेशर कुकर में खाना पकाया.. बोस को खिलाया ..बोस ने खाने की तारीफ की (छुपे तौर पर उसकी पत्नी की) पत्नी मुस्कराई बोस ने उसी वक्त प्रमोशन कर दिया ,,पति बोला जय हो फलां कुकर देव की ...अब प्रमोशन कुकर ने करवाया या उसकी पत्नी की कातिल मुस्कराहट ने ..ये तो विज्ञापन बनानेवाले ही जाने ..

पुरुष के अंडर गारमेंट ..का विज्ञापन ..
पुरुष एक चड्डी में आता है ..और चड्डी में ही 7 - 8 गुंडों से लड़ता है ..और लड़की को बचा लेता है ...लड़की उसका शुक्रिया अदा करने के भावों से उसे निहारती है ...और उसकी तरफ बड़े ही कातिलाना अंदाज़ से बढती है ...अब बचो ...तुम्हें कौन बचाएगा ..पर बचना भी कौन चाहता है ...बढ़िया ..

एक विज्ञापन परफ्यूम स्प्रे का ..
एक शादीशुदा सधस्नाता सुंदर पतिव्रता भारतीय नारी ..सामने दूसरी और की बालकनी में एक मेट्रोसेक्सुअल इंडियन यंगबोय जो फलां परफ्यूम स्प्रे लगाये हुए हुए है ..उसकी खुशबु ज्योंही स्त्री तक पहुँचती है उसके पग पथभ्रष्ट होने लगे है ..वो परफ्यूम लगाये युवक की और आकर्षित होने लगती है ..
में सोच रहा हूँ ये कौनसा सन्देश है देश वासियों को ..
इसके एक दुसरे विज्ञापन में पुरे शहर की लड़कियां उस युवक के पीछे भाग रही है जिसने उक्त स्प्रे लगा रखी है ..जेसे मक्खियाँ गुड के पीछे हो ..
लिफ्ट में एक लड़का और लड़की साथ में है लड़का लिफ्ट से बाहर आता है तो उसे ऐसा दिखाया जाता है जेसे उसकी इज्ज़त लुट चुकी हो ..मानों उसने वो परफ्यूम लगा कर ही गलती कर दी और उधर लड़की ऐसे संतोष के भाव चहेरे पर लाकर लिफ्ट से निकलती है मानों बिल्ली मलाई चाट कर निकली हो ,,परम संतोष के भाव ..
महिलाओं का इतना घटिया और भौंडा प्रदर्शन इन विज्ञापनों में ..बर्दास्त के बाहर है ..मुझे पूरा विश्वास है भारत की महिला अभी इतनी आगे नहीं है की उनकी वजह से पुरुषों की इज्ज़त खतरे में हो ..भारत क्या दुनिया में भी ऐसा नहीं है ..महिला का ये चित्रण पूरी तरह से नकली है .

एक टायर का विज्ञापन .........''
लड़की और टायर दोनों खड़े हैं बोर्ड में ....टायर काला कलूटा है,, अकेले टायर को कौन देखेगा और किसी को भी जरुरत है तो वेसे ही खरीद लेगा ..पर विज्ञापन है ..काले कलूटे टायर के साथ में एक गोरी षोडशी खड़ी है ...काला कुरूप टायर अपने नसीब पर रश्क कर रहा है ..की उसे एक शानदार खुबसूरत लड़की का साथ प्राप्त है ..मेने सोचा इस बार में भी यही टायर खरीदूंगा और जब तक पहले वाले टायर घिस नहीं जाते में रोज इस विज्ञापन के दर्शन करूँगा तथा साथ ही प्रार्थना करूँगा की मेरे टायर जल्दी घिसे ..

एक मोटर साइकल का विज्ञापन ...........'''
लड़की मोटर साइकल के पास में खड़ी है ...........बोर्ड पर लिखा है ,,..'' गज़ब का दम..शानदार पिकप ...एक शानदार सवारी ..फ्री ट्रायल के लिए हमारे शोरुम पर पधारें ....मेरे साथ चल रहे साथी ने कहा आज ही जाता हूँ ...लड़का मोटर साइकल पर सवार है और स्पीड से बढ़ा जा रहा है ..क्या सवारी है ..कल्पना में लड़की दिखाई जा रही है ....

एक चाकलेट का विज्ञापन ......''
लड़का स्वादिस्ट चाकलेट का रेपर उतार रहा है ...और कल्पना में एक लड़की है ...'''
मेने अपना माथा ठोक लिया ...हद हो गई ....
एक और विज्ञापन में लड़की रात को गाडी खराब होने के कारण रास्ते में एक लड़के के यहाँ रुकना चाह रही है ..लड़का गोली खा कर तरकीब लडाता है की लड़की उसके कमरे में रुक जाए ...यानि चाकलेट खाते ही दिमाग में शैतान जाग गया ...

कोल्ड ड्रिंक का विज्ञापन ....'''''
लड़का कोल्ड ड्रिंक घटक रहा है ..और लड़की के मुहँ से लार टपक रही है ....


एक वाशिंग पाउडर का विज्ञापन ....
विज्ञापन में महिला को महिला का विरोधी बताया है क्योंकि ..उसकी साड़ी उससे ज्यादा सफेद है ..जो उसे बर्दास्त नहीं है ..''

में ये कह रहा हूँ की ..महिलाओं के उपयोग की वस्तुओं का विज्ञापन कोई लड़की करे तो समझ में आता है ..पर पुरुषों के उपयोग की वस्तुओं का विज्ञापन लड़की करे ...ये मेरी तो समझ के बाहर है ..असल में महिला आज भी बिकाऊ है उसे पुराने ज़माने की तरह सीधे तौर पर जबरिया नहीं बेचा जा रहा है पर उसकी देह के खरीदार आज के सभ्य समाज में भी है ..बस तरीके बदल दिए गए है ..अन्यथा स्त्री आज भी बाज़ार में बिक रही है किसी वस्तु या मवेशी की तरह ...
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मंगलवार, 15 मार्च 2011

मुन्नी बदनाम हुई डार्लिंग तेरे लिए ....

मुन्नी ही बदनाम क्यों होती है , ये मुन्ना क्यों नहीं होता ..

मेरे पड़ोस की मुन्नी ..पड़ोस के मुन्ने के साथ पिछली रात को मां बाप को सोते छोड़ खिड़की से कूद कर भाग गई .. शंका पहले से रही होगी क्योंकि उनकी मुहब्बत का चर्चा आम था ..पर जो होना था वही हुआ ..जेसे भेंस चोरी होने के बाद खाली तबेले में अपने सर पिटते मुन्नी के माँ बाप घर में मातम मना रहे थे ...

वहीँ बाहर मुझे बाजु वाले महाशय ...मुहल्ले की चाय की पटरी पर मिले ..लोकल अख़बार में झांकते हुए... और मुझे आता देख वो चेहरे पर नकली दुःख का आवरण चढ़ा कर मुझसे मुखातिब होकर बड़े चुटीले अंदाज़ में बोले ..हें भई..जानते हो .?.अपनी गली के लास्ट घर के पहले वाले घर में जो छोकरी नहीं थी ..मेने जान बुज कर कहा कौनसी ...?

वो बोले अरे आप नहीं जानते वो जींस पहने स्कूटी चलाती थी और लटर पटर करती रहती थी ..चश्मा लगाती थी और मुहँ पर पूरा कपड़ा ढंक के निकलती थी .. मेने कहा अच्छा..वो लड़की जो जब भी राह में मिलते प्रणाम करती थी ..वो ..?

अरे हाँ वो मुन्नी .. वही पर.. वो मुझे प्रणाम नहीं करती थी ....वो उसके घर के ऐन सामने वाले घर में रहने वाले मुन्ने के साथ भाग गई ...

उनका ड्रामा इस कदर का था मानों इनकी लड़की भाग गई हो .. मेने सोचा इनको प्रणाम नहीं करती थी क्या इसलिए कसर निकल रहे हैं ..

अब में पूर्वाग्रहों से ग्रसित इस सामाजिक व्यवस्था के बारे सोच रहा था की ..लोग लड़की के भागने को ही इश्यु क्यों बनाते है ..अरे भई मुन्ना भी तो भागा है ..उसके लिए इस प्रकार टिप्पणी कर क्यों नहीं कहा जा रहा है ..

मेने यही बात निन्दारत निंदक महाशय से कही ..वो बोले ..अरे भई लड़के का क्या है ...उसके क्या फर्क पड़ेगा ..जिंदगी तो लड़की की बर्बाद होगी ना ..

मेने सोचा ...हमेशा लड़की की जिंदगी खराब होगी ये रट्टा सबके सामने मार मार के ही उसकी बदनामी कर देते है ..फिर तो जिन्दगी बर्बाद होनी ही है .

मुन्ने के माँ बाप कह रहे थे ..अरे छोरी का क्या है ..उसके माँ बाप का तो शादी का खर्चा बचा ..जीवन तो हमारे मुन्ने का ख़राब हुआ हमारा हुआ हाय रे......!!!! बिरादरी में नाक कटवा दी.. कमाने लायक छोरा हाथ से निकल गया ..अरे ना जाने क्या जादू कर दिया उस छोकरी ने हमारे मुन्ने पर ..सत्यानाश जाए उसका ..और उसको पैदा करने वालों का ..

कुल मिला कर सारा दोष लड़की का ...लड़की सुंदर हो तो ये आरोप की उसने लड़के पर जादू कर दिया और भगा ले गई

गरीब हो तो ये आरोप की लड़की के माँ बाप का शादी का खर्चा बचा ..

प्रगतिशील हो तो ये आरोप की ..अरे भई कोई जात बिरादरी भी कोई चीज होती है या नहीं ..पता नहीं किस खानदान से हैं .

पुलिस में जाओ तो थानेदार बड़े चुटीले अंदाज़ में कहेगा ,,,,हैं भई किसी के साथ चक्कर होगा ..आपने टाइम से शादी क्यों नहीं करवा दी ..होती तो आज ये नौबत नहीं आती ..और पुलिस वाले ..हमदर्दी की बजाय अपना इस बारे में ज्ञान बांटने लग जाते है ...मेरी गारंटी है ..इनका पुराना चक्कर होगा ..

अरे में सब जानता हूँ ..आजकल की लड़कियों को ..और कुछ करे नहीं करे पर बॉयफ्रेंड पहली फुर्सत में बना लेती है ..शाम को झील किनारे चले जाओ ..पता लग जाएगा ..की शहर से कितनी लड़कियां भगने वाली है ..

मेने सोचा ,,अरे क्यों मुन्नी के पीछे पड़े हो ..क्यों उसे ही बदनाम करते हो ..मुन्नी बेचारी सदियों से बदनाम होती आ रही है इन सब मुन्नों के लिए ..मुन्ने के साथ भागने से मुन्नी को मिलता क्या है ..केवल जिल्लत, रुसवाई, बदनामी ..पर मुन्नी इसलिए बदनाम होती है क्योंकि वो अपने मुन्ने को दिल की गहराईयों से टूट कर बेइन्तहा चाहती है ..कोई मुन्नी की भावनाओं को कोई समझेगा ,,क्या ..?
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रविवार, 13 मार्च 2011

To LoVe 2015: क्षमा बङेन को चाहिए,छोटन को उत्पात

Courtesy:espncricinfo.com
"संभावनाओं का खेल" आलेख में हम कयास लगा रहे थे कि क्वार्टरफाईनल की शक्ल कैसी हो सकती है,और चर्चा हुई थी कि ग्रुप 'बी' सबसे दुष्कर और संभावनाओं से भरा प्रतीत हो रहा है,पिछले आठ दिनों में काफी चमत्कार हुए,अजेय पाकिस्तान को पराजय का मुँह देखना पङा,सबसे मज़बूत समझी जा रही दक्षिण अफ्रीका इंग्लैंड द्वारा दिये गये छोटे से लक्ष्य का पीछा नहीं कर पाई,और दक्षिण अफ्रीका को हराने वाला इंग्लैंड दूसरी बार एक कमज़ोर टीम बंग्लादेश से हार गया। श्रीलंका ने ज़िम्बाब्वे के विरूद्ध ताबङतोङ साझेदारी की किंतु फिर भी अनुमान के मुताबिक स्कोर खङा नहीं कर सका और अंतिम दस ओवरों में धराशायी हो गया,बशर्ते दिलशान ने क़माल का खेल दिखाया और 144 रन मारने के बाद 4/4 का गेंदबाज़ी प्रदर्शन किया,आयरलैंड ने सम्मानजनक खेल दिखाना जारी रखा और वेस्टइंडीज़ को भी कङी टक्कर दी.........अब यदि आप झल्लाकर ये पेज बंद करना चाह रहे हैं कि हमारी प्यारी भारतीय टीम के बारे में कोई बात क्यों नहीं की जा रही ...तो क्या कहा जाये?? .....
निराशा से ध्यान हटाने का ये प्रयास एक सप्ताह से जारी था,क्रिकेट से प्रेम दिखाने का किंतु पागलपन से बचने का.....घोर निराशा में बंग्लादेशी व्यवहार न कर बैठने का प्रयास,अफसोस कि उम्मीद के सारे महलों को ध्वस्त करते भारतीय टीम ने वही प्रदर्शन जारी रखा और अपने खाते में पहली हार दर्ज कर ली,कप्तान धोनी बेतुके बयाने देते रहे और मीडिया में उनकी 'स्ट्रेटिजी' का मखौल बनता रहा,बात सिर्फ खेल की होती तो भी स्वीकार्य थी क्योंकि हार-जीत तो लगी रहती है, किंतु विषय है 'विश्वकप' का ,सारी दुनिया की नज़र है,सारा मीडिया एकत्र है, बंग्लादेश के दर्शकों की बचकाना हरकत से देश की भद पिट गयी,ऐसे में कभी बोलना कि "चावला को प्रैक्टिस करायी जा रही है",कभी कहना कि "हमारी किस्मत में एक हार लिखी है",कभी कहना कि "ये हार भारतीय टीम के लिये नहीं भारतीय दर्शकों के लिये "वेक-अप कॉल" है (इसका तात्पर्य अब तक समझ नहीं आया,क्या धोनी कहना चाह रहे थे कि दर्शकों!! अब जाग जाओ और बेमतलब की उम्मीद रखना बंद करो?)
कभी-कभी लगता है राशिद लतीफ़ और इंज़माम जैसे कप्तान ही अच्छे थे अंग्रेज़ी नहीं बोल पाते थे और कम बोलते थे,मैदान में ही खेल बोला करता था,वैसे अंग्रेज़ी तो सचिन को भी आती है किंतु उनकी ज़बान फिसलते कदाचित ही देखी गयी है, किंतु क्या वो भारतीय मीडिया के शिकार नहीं? खेल तो खेल है हार-जीत लगी रहेगी दर्शक तो दर्शक हैं आज निराश होंगे कल फिर उम्मीद करेंगे,करोङो फैन ने ही आपको सर पर चढाया है तो आप उन्हें नकार नहीं सकते,खेल यदि सिर्फ ग्यारह खिलाङियों की बपौती होता तो ज़िम्बाब्वे और केन्या भी अच्छी टीम बन जाती,बहुत कुछ खेल से जुङा है,पैसा ,नाम ,ग्लैमर ....फिर बयानबाज़ी होती है " मेरी टीम के सब खिलाङी स्टार हैं,उन्हें नायक की तरह खेलना पसंद है ( Flamboyant cricketers) और उस चक्कर में बङे शॉट खेलकर आऊट हो जाते हैं" ...अब बस भी करो धोनी,मैदान में बोलो,जितना बोलोगे उतने विवाद होंगे,स्मिथ ने खेल के पहले कहा "ये फाईनल नहीं,हम अपना खेल खेलेंगे और बेस्ट देंगे" संतुलित बात समाप्त, पोंटिग तो बिल्कुल ही विनम्र बनकर भारत की तारीफ करने लगा ( हालांकि सब उनके दोगले व्यवहार को जानते हैं) किंतु संयमित बात की गई ( और विश्वकप में लगातार बत्तीस जीत का रिकॉर्ड रखने वाली  टीम का कप्तान बङबोला भी हो जाये तो भी बनता है),लगता है धोनी साहब ने समाजवादी पार्टी के पूर्व प्रवक्ता 'अमर सिंह' को या कांग्रेस के बङबोले 'राजीव शुक्ला' को अपना मीडिया सलाहकार नियुक्त कर लिया है जो वाणी पर नियंत्रण नहीं रख पा रहे हैं।
भारतीय क्रिकेट प्रेमियों को तीन श्रेणियों मे वर्गीक्रत किया जा सकता हैः (
१) क्रिकेट के दीवानेःजो पागलपन की हद तक क्रिकेट और खिलाङियों को चाहते हैं,जो बेडरुम में धोनी,रैना और मंदिर में सचिन की तस्वीर लगाकर रखते हैं,ये वही हैं जो टिकट की कतार में पुलिस के डण्डे खाते हैं और रात रात भर लाईन में लगे रहते हैं, जो शर्त में हज़ार दो हज़ार हार जाते हैं और जीत पर सङकों में मिठाई बाँटते हैं,और हार जाने पर घर का कोई समान या किसी का सर फोङ देते हैं,क्रिकेटरों को हीरो यही बनाते हैं,और हार जाने पर धोनी और उनके जैसे कप्तान इन्हीं को पागल संबोधित करते हैं।

(२)क्रिकेट के प्रेमीः 

ये खेल से प्रेम करते हैं, किंतु प्रदर्शित करने में संतुलित रहते हैं, ये वही हैं जो ऑफिस में क्रिकेट की वेबसाईट खोलकर रखते हैं और हर पाँच मिनट में स्कोर देख लेते हैं,भारत का मैच हो तो सिक लीव लेने से परहेज़ नहीं करते और बहुधा सीरियस दिखने वाले ये लोग क्रिकेट की चर्चा होने पर उछल पङते हैं,खेल की थोङी खिचङी जानकरी भी रखते हैं, हार इन्हें भी पसंद नहीं,हाँ पत्थरबाज़ी नहीं करते ज़्यादा गुस्सा आया तो अंग्रेज़ी में गालियाँ दे लेते हैं,क्रिकेट के सितारों को देखकर सोचते हैं "काश मैं क्रिकेटर होता!"
(३)क्रिकेट के विशेषज्ञः  

ये उच्च द्रर्जे के बुद्धिजीवी हैं,टी॰वी॰ में चल रही चर्चा को बङे ध्यान से सुनते हैं, गणित लगाते हैं,सारे खिलाङियों (भारत के अतिरिक्त भी) का बायो डाटा ज़ुबानी याद रखते हैं,अक्सर कोई ऑस्ट्रेलिया का खिलाङी ही इनका आदर्श होता है (सचिन के अलावा) , इनमें से ही कुछ क्रिकेटर तो कुछ क्रिकेट एक्सपर्ट बन जाते हैं,हार इनसे भी नहीं पचती और जब ये बिफरते हैं तो सोचते हैं कि-"काश धोनी मेरे सामने आ जाये और अभी उसको बता दूँ कि वो क्या गल्ती कर रहा है"
पराजय से निराश होने की आवश्यकता नहीं है, ये विश्वकप इतिहास का सबसे खुला विश्वकप है, सारी टीमों ने ग़ल्तियाँ की हैं,सब हारे हैं ( सिवाय ऑस्ट्रेलिया के) किंतु ऑस्ट्रेलिया भी छोटी टीमों के आगे असहज हुआ है, मुकाबला अभी बाकि है,भारत संघर्ष करके हारा है और बेहतर टीम से हारा है,नॉकआऊट चरण से पहले कमज़ोरियाँ उजागर हो गई है और सुधार का विकल्प खुला है,जो त्रुटियों से सबक लेगा वही होगा विश्वविजेता।
बहरहाल न तो क्रिकेट के प्रति लोगों का प्रेम कम होगा न पागलपन,बस देश की छवि धूमिल न होने पाए,और भारत की छवि एक अच्छे मेज़बान के रुप में बनी रहे वरना एक बुरा उदाहरण हमारे पङोसी पाकिस्तान के रुप में ही मौजूद है,हार को भूल जाईए कारणों को याद रखिए,बुज़ुर्गों ने कहा भी है "क्षमा बङेन को चाहिए,छोटन को उत्पात"

क्रिकेट का कर्मवीरः
जैसे-जैसे खेल ज़ोर पकङ रहा है,बङे खिलाङी रंग मे आ रहे हैं, दिलशान ने क़माल का हरफनमौला खेल दिखाया, युवराज भी तीन अर्धशतक और सात विकेट लेकर मैच विनर वाली लय में आ गये, रॉस टेलर ने पाकिस्तानी गेंदबाज़ी की बखिया उधेढकर फिक्सिंग के विवादों को हवा दे दी, किंतु क्रिकेट के भगवान की अविस्मरणीय पारी सबसे अलग है,मज़बूत टीम के आगे लगाया गया शतक,विश्व ले श्रेष्ठतम गेंदबाज़ों की लय बिगाङ देने वाला शतक, सचिन का 99 th शतक, शतक जिसने पविलियन में बैठे खिलाङियों को इतना अंधा कर दिया कि वो समझ बैठे पिच और गेंदबाज़ी बङी सरल है और उसी मुगा़लते में 29 रन पर 9 विकेट गँवा बैठे,प्रयास रहता है कि गॉड की चर्चा इस कॉलम में न हो क्योंकि वो तो हैं ही महान किंतु यहाँ बात 38 वर्ष के युवा सचिन की है,जो मैदान पर मुनफ से कहीं ज़्यादा फुर्तीला,विराट से कहीं ज़्यादा संतुलित,सहवाग से कहीं ज़्यादा विस्फोटक और धोनी से कहीं ज़्यादा जोशीला है,क्रिकेट बदला,नियम बदले,खेल बदला ,नहीं बदला तो बस भारत का सच "भारतीय टीम=सचिन तेंदुलकर"।
Courtesy:espncricinfo.com

सचिन के लिये कुछ भी कहा जाना कम है किंतु फिर भी समर्पित हैं कुछ पंक्तियाँ
ख़ामोशी को ,सन्नाटे को नया नाम देने वाले,
गेंदबाज़ को धूल गेंद को आसमान देने वाले,
कुछ कहने को नहीं बचा तो बोलेंगे है सचिन-समय,
सब के सब स्तब्ध,खुशी को ये ज़बान देने वाले,
नतमस्तक थे,दण्डवत हुए,सभी विरोधी भूमिगत हुए,
शत शत नमन तुम्हें भारत को इतना मान देने वाले।
एक बार फिर टीम इस महानायक के प्रयास का सम्मान नहीं कर सकी और एक और ईमानदार कोशिश व्यर्थ जाती रही।
रोमांचक क्षणः
इससे ज़्यादा रोमांचक क्या होगा इस सप्ताहः

Courtesy:Youtube

'रुपक'
Castrol Cricket Index Analysis:
Other than that little battle, the other six spots are a virtual lock with Australia, Sri Lanka, New Zealand and Pakistan looking good in group A and India and South Africa coasting in group B. The way things play out might lead to a mouth-watering India-Pakistan quarter-final in Ahmedabad which should really kick things into high gear. At this stage of the tournament, it’s worth looking at what’s working and what’s not for the top sides as they get set for the knockout stages. For instance, people sense that India has some issues with their bowling, while Pakistan’s batting has been a bit shaky. To actually measure the performances of these teams, we use the Castrol Index, and specifically the batting momentum (BM) and bowling efficiency (BE) for each team. The graph below plots these numbers for the top eight teams in the tournament.
(Disclaimer: Castrol Cricket Index खिलाङियों के प्रदर्शन को मापने का कारगर तरीका है और इसके पहले उपयोग किये जाने वाले कई विश्लेषणों से इस मायने में पृथक है कि इसमें हर खिलाङी का प्रदर्शन खेल के तीनों पैमानों बल्लेबाज़ी,गेंदबाज़ी और क्षेत्ररक्षण में परखा जाता है किंतु खिलाङी की मूल प्रतिभा(core competence) को ध्यान में रखते हुए,गहन अध्ययन के बाद तैयार की गई यह रैंकिग प्रणाली ICC रैंकिग से भी ज़्यादा कारगर सिद्ध हुई है और क्रिकेट प्रेमी अब भावनाओं और उत्साह के साथ अब विश्वसनीय आँकङों की सहायता से भी अपने वाद-विवाद को मज़ेदार बना सकते हैं,ब्लॉगर Castrol Cricket Index का अनुयायी है और अपने आलेखों में Castrol Cricket Index की सहायता से रोचक तथ्य प्रस्तुत करता है,Castrol Cricket Index द्वारा ब्लॉगर को संपर्क किया गया और अध्ययन के बाद ब्लॉगर को Index विश्वसनीय लगा,किंतु आलेख किसी भी प्रकार से कंपनी का प्रचार नहीं करते और Blogger की राय किसी भी उत्पाद से सर्वथा विलग और निष्पक्ष है)

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शुक्रवार, 11 मार्च 2011

To LoVe 2015: थिकसे गोम्फा [लेह]


जम्मू और कश्मीर राज्य का एक जिला 'लद्धाख 'सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण स्थल है.

उत्तर में चीन तथा पूर्व में तिब्बत की सीमाएँ हैं.
यह देश के सबसे विरल जनसंख्या वाले भागों में से एक है.कारण साफ है यहाँ की अत्यंत शुष्क एवं कठोरजलवायु !
वार्षिक वृष्टि 3.2 इंच तथा वार्षिक औसत ताप ५ डिग्री सें. है.मुख्य नदी सिंधु है.
कुछ समय पूर्व यहाँ पर्यटन विभाग ने पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 'सिंधु दर्शन'

शनिवार, 5 मार्च 2011

चापलूसी कैसे करें ..आदर्श चापलूस संहिता

चापलूसी का रिवाज हमारे देश में पुराने समय से ही चला आ रहा है .
और आज के इस गला काट प्रतिस्पर्धा के समय में आप अगर कहीं टिक सकते हैं तो वो दो तरीकों से
पहला ये की आप इतने लायक हो की आपके आला अधिकारीयों को यानि बोस को आपकी योग्यता के आगे सभी नालायक लगे .
दूसरा तरीका ये है की आप अपने वरिस्ट जनों की इतनी चापलूसी, चमचागिरी करें की वो इसका लोह...ा मान जाएँ और उनको ये लगने लग जाए की दफ्तर में काम नहीं होगा तो चलेगा पर चापलूसी नहीं हुई तो कम्पनी डूब जायेगी .. यानि सारा नफा नुकसान चापलूसी पर निर्भर हो जाएँ
आपको वफादारी और चापलूसी के वो झंडे गाड़ने होंगे की सभी चापलूस आपकी चापलूसी और वफादारी के आगे मुहँ छुपाते फिरे ..
और

इस बात की आपसे ट्यूशन करने पर मजबूर हो जाएँ..
मेने चापलूसी के बारे में एक बड़ा ही सुन्दर प्रसंग कहीं पढ़ा था जो ...हमारे वर्तमान में सरकारी और गैर सरकारी विभागों में अपने वरिस्ट जनों की चापलूसी करने वालों के लिए प्रेरणा स्रोत है ..
बात अंग्रेजी शासन काल की है जब ..मध्यप्रदेश के किसी जिले में कोई अंग्रेज जिला कलक्टर हुआ करते थे ..सभी कर्मचारी, अधिकारी उनकी जी भर के चापलूसी करके अपनी वफादारी साबित करने के भरपूर प्रयास करते रहते थे.
एक दिन उन्होंने एक थाली में कुछ वस्तुएं रख के उस थाली पर रुमाल ढँक दिया और सभी चापलूसों से पूछा की बताओ इस थाली में क्या है ..सभी चापलूस समवेत बोले ..हजूर इसमें गोल बैंगन हैं ..कलक्टर ने कहा बैंगन तो हैं पर गोल नहीं लम्बे वाले हैं . तो सब चापलूस बोले जी हाँ लम्बे वाले ही हैं ..अब कलक्टर को गुस्सा आया और बोला ..में जो कह रहा हूँ उसकी हाँ में हाँ क्यों मिला रहे हो अपनी भी तो राय दो ..इस पर सभी चापलूस बड़ी ही बेशर्मी से खिसिया कर बोले हजूर हम तो आपके पीछे हैं आप कहेंगे गोल हैं तो गोल ही होंगे और आप कहेंगे लम्बे हैं तो लम्बे ही होंगे ..इसे अंग्रेजी के सायीकोफेंसी कहते हैं ..
चापलूस तो आज के ज़माने की अधिसंख्य आबादी हो गई है ..किसी भी दफ्तर में चापलूसी करना आजकल शिस्टाचार और सदाचार की श्रेणी में आता है.. पर मुद्दे की बात तो ये की कौन सबसे बड़ा चापलूस और वफादार है ..इसको अपने बोस के आगे प्रमाणित करना सबसे अहम् कार्य है .. और आजकल रातदिन इसी की होड़ लगी रहती है ..
कोई अपने बोस के बच्चों को स्कूल छोड़ कर अपने आप को सबसे बड़ा चापलूस साबित करने का प्रयास करता है, तो कोई सब्जी तरकारी ला कर, तो कोई बोस के घर अपने गाँव से शुद्ध घी का डब्बा ला कर, तो कोई बिजली पानी के बिल जमा करवा के ..
में कभी कभी ये सोचता हूँ की अब किसी के माथे पर तो ये नहीं लिखा है की फलाना अपने बोस का सबसे लाडला वाफ्दर चापलूस है या ढिमका है..
और इसका समाधान ढूंढने के लिए में सोचता हूँ की अब ईश्वर को भी नहीं पता था की ग़ुलामी और शुद्रता के कलयुग में मापदंड ही बदल जायेंगे और मानव रूपी चापलूस प्राणी को अपनी चापलूसी और वफादारी को साबित करने के लिए कठिनाई आने लग जायेगी और इस कार्य में भी बनावटीपन और फर्जीवाडा होने की आशंका हो जायेगी ..क्योंकि बोस किसी के मन में क्या है ये तो नहीं जान सकते ..तो फिर असली चापलूस और वफादार कौन है है ये रहस्य आसानी से खुल नहीं पायेगा ..
मेरे मन में इसका समाधान सुझा वो ये था की अगर भगवान सबके पूंछ उगा दे तो इसका हल निकल आएगा ..भगवान नहीं भी उगा सके तो सभी चापलूस सर्जरी करवा कर पूंछ उगवा सकते हैं ..इससे फायदा ये होगा की सभी चापलूसों में पालतू कुत्तों के गुणधर्म विकसित हो जायेंगे.. दफ्तर में कार्य की गुणवत्ता बढ़ाने और अच्छे कर्मयोगी चापलूसों का पता लगाने या उनकी कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए कम्पनी द्वारा पूंछ की सर्जरी के लिए मेडिकल एड भी दिए जाने का प्रावधान हो सकता है ..और पूंछ का घाव भरे तब तक के मेडिकल अवकाश की व्यवस्था भी ..इसके लिए अलग से हेड भी सृजित किया जा सकता है ..
सुबह दस बजे ज्योंही सभी बोस दफ्तर पहुंचेंगे सभी चापलूसों की पूंछे स्वत स्फूर्त यानि जिस प्रकार मालिक को देख कर कुत्ते की पूंछ स्वाभविक तौर पर हिलने लगती है उसी भाव से सभी चापलूसों की पूंछे भी हिलने लग जायेगी ..
इस स्वामिभक्त आचरण से सभी मालिक स्वत ही समझ जायेंगे की उनके समक्ष दूम हिलाने वाले चापलूस वास्तव में चापलूसी कर अपनी वफादारी का परिचय दे रहें हैं या नाटक कर रहें हैं ..
चापलूसी के इस अभिनव उपक्रम में जिसकी पूंछ सतत और तेजी से हिलती दुलती रहेगी वो उच्च स्तर का चापलूस प्रमाणित होगा..जिसे बोस दफ्तर के वार्षिक आयोजन पर अपने उल्लेखनीय कार्यों और नवाचार प्रयासों का उपयोग कर प्रगति कर दफ्तर को नवीनतम ऊँचाइयों पर पहुँचाने के लिए पदोन्नत और सम्मानित कर सकेंगे..और जो सतत पूंछ हिलाने में असफल रहेंगे उनके बारे में ये मान लिया जाएगा की उनका आचरण दफ्तर के अनुशासन के विरुद्ध है इस कारण दफ्तर के कार्यों का नुकसान हुआ है अतः क्यों ना ऐसे कर्मियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाए..
मुझे लगता है की इसके बाद सभी चापलूसों में इस बात की होड़ लग जायेगी की कौन कितनी देर तक अपनी पूंछ हिला कर बोस को अपनी चापलूसी और वफादारी का प्रमाण दे सकता है ..इस क्रम में कई चापलूस इस कार्य में इतने माहिर हो जायेंगे की उनको कई अन्य विभागों के बोस अपनी सरपरस्ती में लेने के लिए तेयार हो जायेंगे .
होगा ये की किसी कम्पनी के छोटे बोस के पास ज्यादा चापलूसी करने वाला चापलूस होगा तो बड़ा बोस अपने छोटे बोस से कहेगा ..यार शर्मा तेरा ये चापलूस तो बड़ी गज़ब की चापलूसी करता है यार ..अब देख ना में आधे घंटे से तेरे केबिन में बैठा हूँ ,,मेरे आते ही चाय नाश्ते का इंतजाम तो इसने किया ही पर इसने मेरे जूते उतार कर अपने रुमाल से चमकाए और तभी से लगातार अपनी पूंछ मेरे सामने हिला रहा है ..भई में तो इसकी चापलूसी का कायल हो गया ..में तेरे प्रमोशन का बंदोबस्त करवा देता हूँ तू मुझे तेरे इस चापलूस को मेरे यहाँ भेज दे ..अरे यार मेरे वाले को कोई तमीज़ ही नहीं है जब आता हु तो एक बार पूंछ हिला कर बेठ जाता है अरे भी कोई बात हुई ..पूंछ है किसलिए अरे भई अपने बोस को देख के हिलाने के लिए ही तो है..
कई चापलूस जो अपनी पत्नियों से थर्राते हैं उनकी तो डबल ड्यूटी हो जायेगी दफ्तर में बोस के आगे पूंछ हिलाओ तो घर जाते ही पत्नी के आगे ..
मुहल्ले की सभी पत्नियाँ जब कभी एक साथ बैठेंगी तो अपने अपने पतियों की पूंछ हिलाने की रफ्तार के बारे में चर्चा कर अभिभूत होंगी तो कोई अपने पति को कोसेगी की उसका पति बराबर पूंछ नहीं हिलाने के कारण टाइम से प्रमोशन नहीं पा सका ../a>
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To LoVe 2015: संभावनाओं का खेल

Courtesy:espncricinfo.com
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पिछले आलेख का समापन हुआ था इस सकारात्मक आशंका के साथ कि निश्चित रुप से भारत-इंग्लैंड का यह मुकाबला रोचकता की पराकाष्ठा थी बशर्ते कि ऐसा कुछ और आगे न हो जाये,किसने सोचा होगा कि चेन्नास्वामी मैदान पर हुई गेंद की मारकाट को मरहम लगने से पहले ही एक और माहयु्द्ध देखने को मिल जाएगा,महायुद्ध भी कैसा जैसे कि माहाबली द ग्रेट खली को राजपाल यादव ने उठाकर पटक दिया हो,"रोमांचक" शब्द उस मुकाबले का अपमान होगा वो तो चमत्कार की हद तक अविश्वसनीय था,जिसने ऊबाऊ समझकर वो मैच छोङा होगा अगले दिन समाचार पत्र का प्रथम प्रष्ठ देखकर  मन मसोस कर रह गया होगा,एक छोटे से देश का बहादुर लङाका "केविन-ओ-ब्रायन" जिसने अकेले अपने दम पर भारत को स्तब्ध कर देने वाले इंग्लैंड को मटियामेट कर दिया,इंगलैंड अब भी सदमे मे होगा,पिछली बार बात हो ही रही थी कि दोनो टीमों भारत और इंग्लैंड की मज़बूती कम और कमज़ोरी ज़्यादा उजागर हुई थी उस मैच से,और परिणामस्वरुप शीघ्र ही इंग्लैंड को सबक मिल गया भारत के लिये अच्छा यह रहा कि अब आयरलैंड को हल्के में नहीं लिया जायेगा और सहवाग एक और रेवेंज गेम खेलेंगे।
Courtesy: castrolcricket.com
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आत्मसंतुष्ट हो जाने की भावना में ही पहले मैच में बंग्लादेश को 289 रन बनाने का मौका दे दिया गया,और पता नहीं किस अभिमान में चकनाचूर बङबोली बंग्लादेश की टीम को उसी मैदान पर वेस्टइंडीज़ ने 58 रन के हास्यास्पद स्कोर पर आऊट कर धूल चटा दी,एशियन देशों में क्रिकेट के प्रति पागलपन उजागर हुआ वेस्टइंडीज़ की टीम पर बरसाए गये पत्थरों के द्वारा,सहसा स्मरण हो आया कि 2003 के विश्वकप में कैसे हॉलैंड के सामने कमज़ोर प्रदर्शन करने के बाद भारत में बवाल मच गया था और क्रिकेटरों के परिजनों पर पत्थर बरसाये गये थे,उसके बाद गांगुली की टीम ने शानदार वापसी की थी और 1983 फाईनल के बाद विश्वकप की सर्वश्रैष्ठ विजय हासिल की थी पाकिस्तान को हराकर तब फिर देश उन्माद में था किंतु अब की बार फूल बरस रहे थे,पत्थरों के शिकार मोहम्मद कैफ़ ने उस समय प्रतिक्रिया दी थी-"ये कैसा दोगला व्यवहार है कभी पत्थर कभी फूल?"उम्मीद है कि भारतीय प्रशंसक बंग्लादेश की किरकिरी से कुछ सबक लेंगे और कुछ अप्रत्याशित हो जाने पर भी खेल भावना बनाये रखेंगे,आशा और प्रार्थना यही है कि वो मौका न आए।
अब विश्वकप मे चमक लौट रही है, और चकित कर देने वाला प्रदर्शन रहा है पाकिस्तान का,हालांकि यह भी अफ़रीदी का 'एकल प्रदर्शन' ही है और कनाडा से खेले गये मैच में पाकिस्तान की कमज़ोरियाँ भी उजागर हुई हैं, 
Courtesy: castrolcricket.com
अब तक के मुकाबलों पर नज़र डाली जाये तो सबसे सुगठित और विश्वसनीय टीम हमेशा की तरह दक्षिण अफ्रीका ही लग रही है,और यदि उसकी साढे साती और राहु-केतु की दशा सुधर गयी हो तो सबसे योग्य और सक्षम टीम भी वही है, यदि भारत ऐसी योग्य टीम से विजय प्राप्त कर अंतिम चुनौती पार करे तो यह विश्व कप कई मायनों में महान बन जायेगा।
फिलहाल ग्रुप चरण के आधे मुकाबले हो चुके हैं और अब कयास लगाया जाने लगा है कि क्वार्टरफाईनल में क्या तस्वीर बन सकती है,पाकिस्तान हमेशा कि तरह बचकाने बयान दे रहा है जैसे कि यदि भारत में क्वार्टरफाईनल खेलना पङा तो वह नहीं जायेंगे,ऐसा कोई भी बयान देने के पहले उन्हें अपने देश के अंदरुनी मामले सुलझा लेने चाहिये,विश्वकप के आयोजन की ज़िम्मेदारी वापस छिनने पर भी पाकिस्तान ऐसे ही बिलबिलाया था और भारत में कोई भी मैच खेलने से मना कर दिया था परिणामस्वरुप उनका कोई भी मुकाबला भारत में नहीं रखा गया,श्रीलंकाई टीम पर आतंकी हमला कराने के बाद और क्रिकेट को शर्मसार करने के बाद इस प्रकार के बयान शोभा नहीं देते।

Courtesy:espncricinfo.com
 
चलिये एक अंदाज़ा लगाते हैं कि क्वार्टरफाईनल की तस्वीर कैसी हो सकती है, हालांकि यह महज़ एक अंदाज़ा है और मेरे पास Castrol Cricket Index Simulation जैसी कोई सटीक तकनीक नहीं जिससे कि मैच का 90% तक सही अनुमान लगाया जा सके,
ग्रुप A- ऑस्ट्रेलिया,पाकिस्तान,न्यूज़ीलैंड,श्रीलंका,कनाडा,केन्या,ज़िम्बाब्वे
अनुमान लगाना सहज है कि टॉप चार टीमें ऑस्ट्रेलिया,पाकिस्तान,न्यूज़ीलैंड,श्रीलंका होने वाली हैं और यह अनुमान 60% सही हो सकता है कि पाकिस्तान या ऑस्ट्रेलिया पहला या दूसरा पायदान पकङेंगी,श्रीलंका के तीसरे और न्यूज़ीलैंड के चौथे स्थान पर रहने के संकेत हैं, कोई बङा उलटफेर संभावित नहीं लग रहा।
ग्रुप B- भारत,दक्षिण अफ्रीका,वेस्ट इंडीज़,इंग्लैंड,बंग्लादेश,आयरलैंड,नीदरलैंड
यह ग्रुप संभावनाओं से भरा पङा है,आयरलैंड,नीदरलैंड दोनों ने ही कमाल की चुनौती पेश कि है,वेस्ट इंडीज़ ने शुरुआती अङचन के बाद छोटी टीमों से शानदार विजय हासिल करके बढिया नेट रन रेट बना लिया है और इस समय ग्रुप में टॉप पर आ गया है,हालांकि उलट फेर की संभावना फिर भी कम है क्योंकि बांग्लादेश को अब इंग्लैंड या दक्षिण अफ्रीका को हराना होगा जो कि मुश्किल लग रहा है,किंतु क्रिकेट में कुछ भी संभव है,यदि कुछ अप्रत्याशित नहीं घटा तो दक्षिण अफ्रीका निश्चित तौर पर प्रथम और भारत द्वितीय रहने वाला है,ऐसे में वेस्ट इंडीज़ को तीसरा और इंग्लैंड को चौथा मान लिया जाये तो क्वार्टर फाईनल की तस्वीर कुछ ऐसी बनती है।
 
क्रिकेट का कर्मवीरः

हालांकि इस बार दो दावेदार हैं अपने दम पर पूरी टीम को विजय दिला देने वाले शाहिद अफरीदी और सबको चौंका देने वाले 'केविन-ओ-ब्रायन' किंतु केविन ने वाकई अदम्य शौर्य दिखाकर कमाल कर दिखाया,अफरीदी से ऐसा अपेक्षित था।
Courtesy:espncricinfo.com

Courage:कमाल का शौर्य एक योजना जिस पर अंत तक यह लङाका डटा रहा और विशाल लक्ष्य को भी बौना सिद्ध कर दिया,इंग्लैंड के नामी गिरामी गेंदबाज़ों की बखिया उधेङ कर विश्वकप का सबसे तेज़ शतक पचास गेंद में ही मार दिया
Rigidity:कई ऐसे अवसर आये जब कोई और खिलाङी होता तो अपना धैर्य खो देता केविन लङता रहा,अपने माता पिता को दिया गया उसका सर्वश्रेष्ठ उपहार जो स्टेडियम में मौजूद पिता की आँखे नम कर गया।
Intelligence:एक निश्चित योजना और उस पर अमल करने की प्रतिबद्धता शातिर दिमाग का ही काम था
Cruelity:बिना किसी परवाह के ब्रायन ने बेदर्दी से हर गेंदबाज़ को पीटा और अपना पौरुष सिद्ध किया
Knowledge:जानकारी पिच की,इंग्लैंड की कमज़ोरी की,और फील्ड की जमावट की।
Energy:इतनी लंबी पारी और चेहरे पर शिकन तक नही.
Talent:सारी बातों का सार प्रतिभा,अनूठी प्रतिभा,हतप्रभ कर देने वाली प्रतिभा,वाह 'केविन-ओ-ब्रावन' वाह कमाल कर दिया।
रोमांचक क्षणः
केविन-ओ-ब्रायन की पारी को फ्रेम करने से बेहतर कौन सा क्षण होगा भला?
रुपक
(Disclaimer: Castrol Cricket Index खिलाङियों के प्रदर्शन को मापने का कारगर तरीका है और इसके पहले उपयोग किये जाने वाले कई विश्लेषणों से इस मायने में पृथक है कि इसमें हर खिलाङी का प्रदर्शन खेल के तीनों पैमानों बल्लेबाज़ी,गेंदबाज़ी और क्षेत्ररक्षण में परखा जाता है किंतु खिलाङी की मूल प्रतिभा(core competence) को ध्यान में रखते हुए,गहन अध्ययन के बाद तैयार की गई यह रैंकिग प्रणाली ICC रैंकिग से भी ज़्यादा कारगर सिद्ध हुई है और क्रिकेट प्रेमी अब भावनाओं और उत्साह के साथ अब विश्वसनीय आँकङों की सहायता से भी अपने वाद-विवाद को मज़ेदार बना सकते हैं,ब्लॉगर Castrol Cricket Index का अनुयायी है और अपने आलेखों में Castrol Cricket Index की सहायता से रोचक तथ्य प्रस्तुत करता है,Castrol Cricket Index द्वारा ब्लॉगर को संपर्क किया गया और अध्ययन के बाद ब्लॉगर को Index विश्वसनीय लगा,किंतु आलेख किसी भी प्रकार से कंपनी का प्रचार नहीं करते और Blogger की राय किसी भी उत्पाद से सर्वथा विलग और निष्पक्ष है)
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बुधवार, 2 मार्च 2011

राजस्थान की जन कल्याणकारी सरकारी की नीति . 87 % माल को 1 % उड़ा रहे हैं ,,, 13 माल आ रहा है 99 % आमजनता के ..वाह रे सामाजिक न्याय

राजस्थान के कुल बजट का 87 % भाग राज्य कर्मचारियों के वेतन, भत्ते, पेंशन या अन्य सुविधाओं में ही खर्च हो जाता है. बचे हुए 13 % भाग से राज्य का विकास कैसे हो. सीधी गणित ये है की एक तरफ राज्य की कुल आबादी के केवल 1 % कर्मचारी, नेता राज्य के सालाना बजट की 87 % राशी डकार रहें है वहीँ 99 % आमजन के हिस्से में केवल 13 % राशी आ रही है..अब इस हालत में कैसे गरीबी बेरोजगारी दूर हो कैसे मजदुर किसान खुश रहे.
राज्य की आबादी लगभग 6 करोड़ है इनमें से कर्मचारियों की संख्या महज 6 लाख है.
ये जनता के साथ धोखा है, ये सरकारी लुट है, हमने जिन्हें राज्य के खजाने की जिम्मेदारी दी वे ही उसमे सेंध लगा रहें हैं .इनको शर्म ही नहीं आ रही है ..
साल के कुल 365 दिनों में से ये कर्मचारी 183 दिन की छुट्टी की मौज भी उड़ा रहे हैं ..दफ्तरों में अधिकांश कर्मचारी काम से जी चुराते हैं और रिश्वत खाते हैं वो और अलग से जनता पर सितम है ../a>
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