शुक्रवार, 26 फ़रवरी 2010

To LoVe 2015: द्वादश ज्योतिर्लिंग -[भाग-8]- भीमशंकर




महाराष्ट्र राज्य में मुंबई से करीब 265 किलोमीटर [via Pune] दूर, पूर्व की ओर भीमा नदी के तट पर भीमशंकर ज्योतिर्लिग स्थित है.
इसके उद्भव की एक कथा इस प्रकार है-

सहमाद्रि पर्वत के शिखर पर स्थित इस ज्योतिर्लिंग का पुराणों में बहुत अधिक महत्व है। आकर्षक हरियाली से घिरे इस तीर्थस्थल तक पहुंचने के लिए बसों का सहारा लेना पड़ता है। पुराणों में वर्णित कथाओं के अनुसार कुंभकरण का बेटा भीम

गुरुवार, 25 फ़रवरी 2010

To LoVe 2015: TIGER 1411??..BIG CAT...1411 ?? 1000 बाघ भी शायद ही हैं...


""""खुदा की कसम मज़ा आ गया
मुझे मार के बेशरम खा गया..""""""

१९७९ में फिल्म मिस्टर नटवरलाल में यह गाना अमिताभ बच्चन ने गाया था बच्चों को कहानी सूनाते हुए..
यह गाना अब बाघ गा रहा है.....
पर किसी को कहानी सुनाते हुए नहीं...
क्योंकि अब खुद उसके ही किस्सों में सिमटने की बारी आ गई है.......

१९७९ में अमिताभ बच्चन की फिल्म मिस्टर नटवरलाल का उपरोक्त गीत था... उसी सत्तर के दशक में स्वर्गीय प्रधानमंत्री इन्धिरा गाँधी ने एक टाइगर प्रोजेक्ट शुरू करवाया था, जिसके कारण बाघ की संख्या में काफी बढोतरी हुई...पर उसके बाद किसी को याद ही नहीं रहा की बाघ भी कोई प्राणी है जिसे बचाने की जरूरत है...शायद खामख्याली थी की देश का रास्ट्रीय पशु जंगल का राजा है खुद ही बच जायेगा ..
पर शायद किसी को यह पता ही नहीं चला की लोगों को डराने वाला बाघ अब खुद ही डरने लगा लगा है.....घटते-घटते बाघ १००० से भी कम रह रह गया है ....
जंगल का राजा पेट की भूख के लिए शिकार करता था. और बहुत ही कम आदमखोर होता था ...
मनुष्य भी भूख के लिए उसका शिकार करता है..पर उसकी यह भूख पेट की नहीं है .. यह भूख है पैसे की, लालच की, अंधविश्वास की ... जिसका कोई इलाज नहीं .

पिछली लोकसभा में जब यह मामला उठा तो प्रधानमंत्री ने अभयारण्य में जाकर बैठक की.. कई युवा सांसदों ने चिंता जताई..पर नतीजा सिफर. लगा जैसे खानापूर्ति हो गई.
कुछ लोगो का कहना है की जंगल नहीं बच रहे तो बाघ की चिंता पहले क्यों हो रही है ...
जरा सोचिये की जो जंगल बचे है उसमे कितने बाघ जिंदा हैं. .
दरअसल हम जिस चीज़ को ज्यादा इज्ज़त देने का ढोंग भरते है उसकी अवहेलना ज्यादा करते है ...
इस देश में देवी की पूजा सबसे ज्यादा होती है. देश को माता का दर्जा देता हैं. मादरे वतन जनम देने वाली माँ से भी ज्यादा ऊँचा दर्ज़ा रखती हैं....
पर हकीकत में बच्ची को पेट में ही मार डालते है. मादा भूर्ण को मारने वाले डॉक्टरों में महिला डॉक्टर भी होतीं हैं ...,,
तो यह हमारी सामाजिक आदत बन चुकी है
ठीक उसी तरह शेर माता दुर्गा की सवारी है. माता की पूजा करते है, पेट में लड़की को मार डालते है,  माता की सवारी शेर को भी पूजते है पर हकीकत में उसे मारने से परहेज नहीं करते ..
यह सही है की ग्लोबल वार्मिंग के कारण भी कुछ बाघों की मौत हुई है, पिछले कुछ महीने में मरे कुछ बाघों के शरीर सही सलामत मिले है . पर जंगल छोटे होते जा रहे है, जिस कारण बाघ को जंगल बदलना पड़ता है...पर अपना ठिकाना बदलते वक़्त बाघ शिकारिओं के चुंगल में फंस जाता हैं... जाहिर है की जंगल को बचाना भी पहली प्राथमिकता है .
अब सवाल उठता है की क्या बाघ को बचाया नहीं जा सकता?....
बचाया जा सकता है .... जब काले हिरन को बचाने के लिए जनता आगे आती है तो बाघ के लिए क्यों नहीं? 
दूसरा सवाल है की क्या जानवरों के अवेध शिकार को रोकने के लिए जो कानून बने हैं उनका पालन सख्ती से होता है .. ?
जानवरों की तस्करी का सबसे बड़ा तस्कर संसारचंद पिछले कई सालो से जेल में है, सालों की मेहनत के बाद पकडे गए तस्कर को आखिर अब तक सजा क्यों नहीं हो सकी है? क्या कोई इसका जवाब देगा.?
सिर्फ कड़े कानून से काम नहीं चलता उसे सही और असरदार तरीके से लागू करवाना होगा.
पर सबसे ज्यादा जरूरी है जनता का जागरूक होना...
जनता का दवाब किस तरह से काम करता है यह काले हिरन का शिकार करने के बाद फंसे सलमान खान को देख के लगाया जा सकता है....
पर इसके लिए समाज के आधार स्तंभों को पूरी ताकत के साथ आगे आना होगा. सिर्फ मोमबती जलाने से यह काम नहीं होने वाला.

वेद वाक्य है . जिधर श्रेष्ठ जन जाते हैं आम लोग उसी रास्ते का अनुसरण करते है

पर क्या हम सुधरेंगे .. क्या हम अपनी बुरी सामाजिक आदत को बदलने के लिए प्रयास करेंगे. क्या सरकार में बेठे लोग और सरकारी बाबु और अधिकारी अपनी ड्यूटी निभाने की कोशिश करेंगे.... सरकारी अधिकारी और बाबु जिस काम की तन्खवाह लेते हैं, क्या वो काम ईमानदारी से करेंगे ?
और क्या नेता क्या ईमानदार अधिकारिओं को काम करने देंगे.?
पूरी जनता, पुरे समाज  की सोच को बदलना होगा. पर हम कब सुधरेंगे? काफी बड़ा सवाल है...पर इतिहास मौन नहीं है .... 

(यह पोस्ट सिर्फ बाघों के लिए लिखने की आखरी तारीख नजदीक आने के कारण लिखी है...जैसा की वादा किया था .. पिछले कई दिनों से पारिवारिक परेशानी  की वजह से ब्लॉग पर नहीं आ पा रहा हूँ .. इसके लिए खेद भी है)
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२८ फरवरी
दोस्तों ...
दरअसल चिट्ठा जगत से एक मेल आई थी..की २८ तारीख से पहले बाघ को लेकर कोई पोस्ट लिखें ....एक प्रतियोगिता थी..मेने उसपर लिखा था की जरूर लिखूंगा ..पर कुछ व्यक्तिगत परेशानी के कारन पोस्ट तो दूर ब्लॉग पर नज़र भी नहीं मार पा रहा था .... लेकिन मेल मिलने पर जो जवाब दिया था ...उसकी याद दिमाग में घूम रही थी..जिस कारण में ब्लॉग पर आया था..और मैं बाघ पर लिखना कई दिन से चाहता था पर लिख नहीं पा रहा था..उस मेल के कारण मैंने वो पोस्ट लिख डाली जो जाने कई दिन से दिमाग में घूम रही थी....यानी चिठाजगत का मेल बहाना बन गया ...और उसपर जो कमीट कर चूका था. वह पूरा हो गया.....यह प्रतियोगिता जितने के लिए नहीं लिखी है.......इसलिए कुछ खास नहीं है २८ तारीख की बात..बस वादा किया था सो पूरा किया और सुकून पाया.../a>
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बुधवार, 24 फ़रवरी 2010

To LoVe 2015: द्वादश ज्योतिर्लिंग -[भाग-७]-ओंकारेश्वर


अपनी इस यात्रा में आज चलते हैं ओंकारेश्वर नगरी .नर्मदा क्षेत्र में यह ओंकारेश्वर सर्वश्रेष्ठ तीर्थ माना जाता है.मध्य प्रदेश के खंडवा जिले को दक्षिण भारत का प्रवेशद्वार कहा जाता है.यह जिला नर्मदा और ताप्‍ती नदी घाटी के मध्य बसा है.इंदौर शहर से ७७ किलोमीटर दूर,खंडवा जिले में स्थित यह स्थान नर्मदा के दो धाराओं में विभक्त हो जाने से बीच में बने एक टापू पर है, इसे मान्धाता पहाड़ी भी कहा जाता है.

मंगलवार, 23 फ़रवरी 2010

To LoVe 2015: द्वादश ज्योतिर्लिंग -[भाग-6]-महाकालेश्वर

‘ऊँ महाकाल महाकाय, महाकाल जगत्पते।
महाकाल महायोगिन्‌ महाकाल नमोऽस्तुते॥
- महाकाल स्त्रोत(महाकाय, जगत्पति, महायोगी महाकाल को नमन)
आज महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन के लिए चलते हैं.मध्यप्रदेश के उज्जैन में स्थित ‘दक्षिणमुखी’ इस ज्योतिर्लिंग को स्वयंभू माना जाता है.

'उज्जैन' भारत के मध्य प्रदेश राज्य के मध्य में शिप्रा नदी के किनारे बसा एक अत्यन्त प्राचीन[ पाँच हजार सालसे भी अधिक पुराना] शहर है

सोमवार, 15 फ़रवरी 2010

To LoVe 2015: द्वादश ज्योतिर्लिंग -[भाग-५]-नागेश्वर

गुजरात के सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन के बाद आज यहीं नज़दीक द्वारकापुरी से लगभग 17 मील की दूरी पर 'नागेश्वर मंदिर'चलते हैं .गुजरात राज्य के बारे में संक्षिप्त जानकारी मेरी पिछली पोस्ट में आप यहाँ पढ़ सकते हैं.
'एतद् यः श्रृणुयान्नित्यं नागेशोद्भवमादरात्‌। सर्वान्‌ कामानियाद् धीमान्‌ महापातकनाशनम्‌॥'
अर्थात जो श्रद्धापूर्वक इसकी उत्पत्ति और माहात्म्य की कथा सुनेगा वह सारे पापों से छुटकारा पाकर

रविवार, 14 फ़रवरी 2010

To LoVe 2015: द्वादश ज्योतिर्लिंग- [भाग-4]- काशी विश्वेश्वर

भारत के उत्तर में जनसँख्या की हिसाब से सब से बड़ा प्रदेश है उत्तर प्रदेश.उत्तर प्रदेश का ज्ञात इतिहास लगभग ४००० वर्ष पुराना है,जब आर्यों ने अपना पहला कदम इस जगह पर रखा तब वेदिक सभ्यता का उत्तर प्रदेश मे जन्म हुआ.इन्ही आर्यों के नाम पर भारत देश का नाम आर्यावर्त या भारतवर्ष पड़ा था.[भरत आर्यों के एक प्रमुख राजा थे].
मथुरा शहर में जन्मे थे भगवान कृष्ण और भगवान राम" का प्राचीन राज्य कौशल इसी क्षेत्र

शुक्रवार, 12 फ़रवरी 2010

To LoVe 2015: द्वादश ज्योतिर्लिंग -[भाग-3]-वैद्यनाथधाम

झारखंड-
अपने नाम के अनुरुप यह मूलत: एक वनप्रदेश है.प्रचुर मात्रा में खनिज की उपलबध्ता के कारण इसे भारत का 'रूर' भी कहा जाता है.
15 नवंबर,2000 [ आदिवासी नायक बिरसा मुंडा के जन्मदिन] के दिन बना यह राज्य भारत का अठ्ठाइसवाँ राज्य है.इसे बिहार के दक्षिणी हिस्से को विभाजित कर के बनाया गया है.इसकी राजधानी रांची है.रांची के अतिरिक्त जमशेदपुर, धनबाद तथा बोकारो जैसे औद्योगिक केन्द्रों के कारण इसे

गुरुवार, 11 फ़रवरी 2010

To LoVe 2015: द्वादश ज्योतिर्लिंग [भाग-2]-सोमनाथ & केदारनाथ

महाशिवरात्रि पर्व की ढेरों शुभकामनाएँ..


जैसा की पिछली पोस्ट में बताया गया था कि भारत देश में बारह ज्योतिर्लिंग हैं.
इनके नाम इस प्रकार हैं-
(1) सोमनाथ, (2) मल्लिकार्जुन, (3) महाकालेश्वर, (4) ओंकारेश्वर (5) वैद्यनाथ, (6) भीमशंकर, (7) रामेश्वर,
(8) नागेश्वर, (9) विश्वनाथजी, (10) त्र्यम्बकेश्वर, (11) केदारनाथ, (12) घृष्णेश्वर[घुश्मेश्वर].
***इनमें से 3 महाराष्ट्र राज्य में[त्रयम्बकेश्वर,भीमशंकर,

To LoVe 2015: द्वादश ज्योतिर्लिंग [भाग-१]

महाशिवरात्रि पर्व की ढेरों शुभकामनाएँ..
भारत देश की यही खूबी है कि यहाँ सभी पर्व धूमधाम से मनाए जाते हैं.
भोले भंडारी भगवान शिव की परम भक्त हूँ इसलिए इच्छा हुई कि भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लींगों की पावन यात्रा
आज से आरंभ की जाए .
इस यात्रा को शुरू करने से पहले जान लें कि आख़िर भगवान शिव की आराधना करते क्यों हैं?शिवलिंग क्या है?

शिव भारतीय धर्म, संस्कृति, दर्शन ज्ञान को

बुधवार, 10 फ़रवरी 2010

To LoVe 2015: 'मेघों का घर'-मेघालय

मेघालय अर्थात 'मेघों का घर'!21 जनवरी, 1972 को मेघालय ,भारत देश के एक पूर्ण राज्‍य के रूप में अस्तित्‍व में आया. जनसंख्या 2,318,822 है.खासी, गारो तथा अंग्रेजी भाषाओं वाले इस राज्य की राजधानी शिलॉंग है. इसे पूर्वोत्तर का स्कॉटलैंड कहा जाता है.इस पहाड़ी राज्य के उत्तरी और पूर्वी सीमाएं असम से और दक्षिणी तथा पश्चिमी सीमाएँ बंगलादेश से मिलती हैं.लगभग ८० प्रतिशत जनसंख्‍या आजीविका के लिए मुख्‍य रूप

मंगलवार, 9 फ़रवरी 2010

To LoVe 2015: मैं लाल चौक हूं..........रोहित

आज की पोस्ट दरअसल पुरानी पोस्ट है . जो पिछले महीने सात जनुअरी को लिखी थी डायरी के पन्ने मैं .. जब कश्मीर का लाल चौक दहला था कई दिन की शांति के बाद..उस दिन पोस्ट नहीं कर सका था..आज उसे ही पोस्ट कर रहा हूँ..


मैं लाल चौक हूँ
आज फिर
गोलियों से बिधा,
राहत की चंद ही
सांसे ली थी अभी
फिर गोलियों की
बौछार में घिरा
मैं लाल चौक हूँ..

आसपास अमन की बयार
जब भी बहती है
फिजां में बारूद की
गंध घुल-मिल जाती है...

कभी अपने ही थे जो
अब बन पराये
अक्सर जख्म देते है....
आसपास की चोटीयों से
अब ठंडी हवा के झोंकें
नहीं आते,
गोलियों की बौछार आती है....

कभी छह रास्ते आकर
मुझमे मिलते थे
अब छह रास्ते
अलग-अलग दिशा में
खुलते हैं....

किस्मत में क्या बदा
विकल खड़ा सोचता
मैं लाल चौक हूँ.....

खबरों का कारवां रोज ही चलता रहता है अनवरत, उसी में कभी अचानक कोई शब्द, दिर्श्य, या दोनों मिलकर खटक जाते हैं. अनजाने में आपको कही छेद देते है, ठहरे पानी में हलचल सी पैदा कर देते हैं...यह दृश्य ऐसे होते हैं जो कल्पनाओं को हकीकत की सख्त जमीं से टकरा देते हैं,  एसा ही आज था...जयपुर हादसे के बाद. ...सामने चारो और गोलियन चल रहीं थीं कही आपके अंतर्मन से भी टकरा रही थी..गोलियो के बीच खड़ा लाल चौक, हैरान -परेशां, भौचंका सा , हताशा सवाल करता ...एक ही बात कहता की मैं लाल चौक हूँ ..
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दोस्तों आप सब की दुआ और डॉक्टर के पास न जाने के बाद जल्दी से ठीक हो रहा हूँ .. क्योंकि डॉक्टर के अनुसार हेन्गोवर है कुछ दिन रहेगा (हाहा)  ..बसंत का मौसम भी है..और कुछ दिन में ओघरदानी बाबा भोलेनाथ का विवाह है....तो ठीक होने का क्या फिर भंग खा के मस्त अलंग तो होना ही है. /a>
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शनिवार, 6 फ़रवरी 2010

बीमारी में हाय रे यादों की ये परछाईंयां..रोहित

२ दिन से तबियत नासाज़ है .. न कहीं आना न कहीं जाना.... सच में क्या मुसीबत है ... घर में पड़े रहना और बुखार में ... लगता है जैसे किसी ने रवानगी रोक दी हो, बिस्तर में पड़े रहना किसी सजा से कम नहीं होता,  सारे काम बंद  और आप बिस्तर के हवाले..उस पर माताश्री की बंदिश, यह न करो, वो न करो, चुपचाप पड़े रहो...वगैरह वगैरह .. पर यह खाली होना कम मुसीबत नहीं... .बिस्तर पर पड़े रहना किसी तनाव से कम नहीं.. घर में खाली पड़े नहीं की यादों के साये चारों तरफ से घेर लेते हैं.....जाने कहाँ -कहाँ  से आके यादें सिर पर सवार होने लगती हैं, जैसे मौका तलाश रहीं  थीं.... मौका मिला नहीं की एक साथ मिलकर हमला बोल  देती हैं...और लेने लगती हैं बदला उन्हें याद न करने का....न चाह कर भी  आप इन यादों के साये में फिर घिर जाते है..
और इन सायों में कुछ ऐसे साये होते है जिनसे सिर्फ और सिर्फ चुभन ही होती है..
आज कुछ चुभन वाली ही यादों ने लगता है हमला बोला था...वह भी ख़ास कर उन यादों ने जो कुछ ज्यादा तंग करती हैं ..इन्होंने हमला बोला वो भी तब...खासकर जब अपनी ही परछाईं से भी लंबी होने लगी इनकी परछाईंयां...
धुप और छांव की तरह यादें जिंदगी का हिस्सा बन जाती हैं.और हमेशा आपको तंग करती है जब आप खाली होते हैं....लेकिन कभी-कभी सर्दी की गुनगुनी धुप की तरह इनके साये में बैठना अच्छा भी लगता है ...

कभी-कभी अच्छा लगता है
पुरानी यादों के साये में खोना ...
दिल चाहता है ये
यादें कसकर इतना भींच लें
अपनी बाहों में की
अपनी सुध-बुध खो बैठूं ...

पर कभी-कभी लगता है उन यादों को याद ही क्यों करें ....जो गुजर जाये उसे भूल ही जाना बेहतर है, आखिर गया दिन लौटता नहीं, न ही नदी कभी उल्टी बहती है. पर हम इन्सान हैं.....रिवर्स मैं जाने और फॉरवर्ड में सोचने की सुविधा हमें ही है... 

बुखार में कुछ खाना अच्छा नहीं लगता है...यहाँ तक की दवाई भी नहीं .... डॉक्टर के पास जाना भी अच्छा नहीं लगता....ऐसे में यादों का सिलसिला परेशां करे यह और अखरता है, मानसिक उलझन होने लगे तो परेशानी तो होगी ही....वैसे चारों तःरफ गुलाबी सर्दी का मौसम है, बसन्त की बयार है, और कुछ दिन में प्रेम का दिन भी आ रहा है..कहीं यही तो कारण नहीं है कुछ हल्के-हल्के भीने-भीने दर्द का.....ओहो..लो फिर जाने क्या सोचने लगा मन..इसलिए तो खाली रहना बहुत बड़ी परेशानी है, पर क्या करें....
   अरे बाबा...मर गए..माता श्री आ पहुंची है डांटने के लिए...."कम्पयूटर पर बैठा है? आज तो आराम करे ले... ठीक है दोस्तों अभी चलता हुं....फिर मिलता हुं...
/a>
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