रविवार, 31 जनवरी 2010

To LoVe 2015: गाँधी...माने न माने लोचा तो होगा ही

२ दिन पहले गाँधीजी की पुण्यतिथि थी....मुझे मुन्नाभाई याद आ गया...जिसे गाँधी जी ने कहा लोगो से कह दो मेरे बुत तोड़ दें ..रखना है तो मुझे दिल में रखें....

पर दिल में रखने से काम कब तक चलेगा...
समय है गाँधी को यथार्थ में बदलने का....
क्या ये बेहतर नहीं की हम कुछ करें...गाँधी के सपनों को धरातल पर लायें....सपना क्या था गाँधी का..भारत को मजबूत बनाने का...हर किसी को सुखी करने का...और भी कई...
क्या गाँधी का सपना हमारा नहीं....

हम गाँधी से सहमत हों या असहमत, गाँधी की चर्चा करते हैं॥
यानि कोई न कोई केमिकल लोचा तो है ही....

१०० साल पहले कहा गाँधी ने..लगता है आज की बात कह रहे हैं......

संसद बाँझ है, काम सुलझाने से जायदा उलझाती है, चर्चा के वक़्त सांसद सोते है....

जब घमंड हो तो कोई काम करने से पहले सोचो की उस काम से उस गरीब आदमी को कितना फायदा होगा जिसे तुमने देखा है....गाँधी ने कहा.....
पर हमने शायद गरीबों के बारे में सोचना छोड़ दिया है...

गरीब कभी मिले तो हम हड़काते हैं...." दो-दो हाथ है कुछ काम क्यों नहीं करता...."
"जो डिग्री ले के घूम रहे हैं, उन्हें कौन सा काम मिल रहा है....लूटपाट ही तो कर रहे है...."जवाब मिलता है...या कहे कि काम न करने का बहाना जड़ देता है

गरीब बदल गया है या किसी ने गरीब का चोला धारण कर लिया है....पता नहीं...

एक बार गाँधी जी के एक दांत में दर्द था.....डॉक्टर ने दांत निकाल दिया...एक गाँधी भक्त ने डॉक्टर से गाँधीजी का दांत ले लिया....संभाल कर रखने के लिए....अनमोल धरोहर के तोर पर....गांधीजी इन बातों से चिढ़ते थे....इसलिए जब गांधीभक्त के दिल ने कचोटा तो बेचारे जा पहुंचे गाँधी जी से के पास गांधी जी नाराज होते हैं कहते हैं....जो नश्वर है उसे सहजने का क्या फायदा..। वो गाँधी भक्त मान गया...शर्मिंदा हुआ...
मेरे बुत तोड़ डालो रखना है तो दिल में रखो... फिर आवाज आती है .......

पर हमने हर चोराहे पर बुत बना डाले.... औऱ विचारों को, उनके सपनों को चोराहे पर खड़ा कर दिया....

आज नहीं तो कल..कभी न कभी बापू दिमाग में केमिकल लोचा तो मचाएगंे ही।
अब गाँधीजी के साथ 75 फीसदी सहमती के साथ जिएं या 25 फीसदी असहमति के साथ जिएं..यह हमें तय करना है.....
Bapu ka Chemical Locha तो पीछा छो़ड़ने से रहा....
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FuLl MoViEs
MoViEs To mOvIeS
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रविवार, 17 जनवरी 2010

To LoVe 2015: ‘फ्रांसीसी संस्‍कृति की खिड़की- पुडुचेरी 'और 'ओरोविला'

'पुडुचेरी 'और 'ओरोविला' [चित्र को बड़ा देखने के लिए उस पर क्लिक करें]पुडुचेरी जिसे हम सभी पाँडिचेरी के नाम से जानते थे .पुडुचेरी इस राज्य का नया नाम है।भारत का यह केन्द्र शाषित प्रदेश पिछले लम्बे काल से फ्रेंच कालोनी के रूप में चर्चित रहा है.इसका इतिहास १६७३से तब प्रारंभ होता है जब चेन्नइ्रर् के पास सेंट होम के किलेबंद नगर में फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कंपनी के एजेन्टमार्टिन को डचों ने हरा दिया था

शनिवार, 9 जनवरी 2010

To LoVe 2015: भारत का राष्ट्रपति भवन और मुगल गार्डन


'नव वर्ष की शुभकामनाएँ'
राष्ट्रपति भवन

दिल्ली -
भारत का राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र.१४८३ वर्ग किलोमीटर (५७२ वर्ग मील) में फैली दिल्ली भारत का दूसरा तथा दुनिया का आठवां सबसे बड़ा महानगर है.
अतिप्राचीन नगर...महाभारत काल से ही दिल्‍ली[इन्द्रप्रस्थ] का विशेष उल्‍लेख रहा है.
18वीं सदी के उत्तरार्द्ध और 19वीं सदी के पूर्वार्द्ध में दिल्‍ली में अंग्रेजी शासन की स्‍थापना हुई.
1911 में कोलकाता से राजधानी