बुधवार, 30 दिसंबर 2009

To LoVe 2015: कुछ कहते-कहते रुक जाती हो.....


दोस्तों इस बार एक पुरानी कविता आपके सामने है ..लाइनें बिना बदले ...जैसी पहली बार लिखी थी.....बदलना सही नहीं समझा.....हो सकता है तारतम्य न हो लाइनों में ...मगर भाव जैसे थे मेरे ख्याल में, वैसे ही आपके सामने हैं...

जब जब तुम्हारा ख़त पड़ता हुं
चंद पंक्तियों पर, रुकता हूँ
हर पंक्ति में, तुम्हें ही देखता हूँ

तुम, चंद पंक्तियाँ ही लिखती हो
पर हर बार शब्द बदल जाता है
शब्दों में नया ही कुछ दीखता है....

तुम, काफी कुछ कहना चाहती हो
पर, चंद पंक्तियों में ही ढल जाती हो
शायद इसलिए हर शब्द नए भाव धर लेता है.....

तुम्हारे शब्दों को जितनी बार पढ़ता हूँ
तुम उतनी बार, अक्षरों में दिखती हो
फिर तुम्हारा हर छंद नए रंग में दिखता है

कभी कभी शब्द अर्थ ही बदल लेते हैं 
कभी शब्द नए आयाम धर लेते हैं
फिर जाने कब कहीं गहरे उतर जाते हैं....

कभी आँखों से नींद कोसों दूर होती हैं
तब शब्द चहुँ और बिखर जाते हैं
कभी तारे बन फलक पर छा जाते हैं...

उन्मुक्त शब्द कभी नया जीवन जीने लगता है
कभी आकाशगंगा में अठखेलियाँ करता है
तो कभी चांदनी में घुलमिल जाता है.....

और जब शब्द (या तुम) थक जाते हैं
कुछ और जब नहीं कह पाते हैं
तो चुपके से लम्बी ठंडी सासें भरकर....

अद्धोपन्त !
व्योम के सफ़र से टूट कर शब्द (या तुम)
ख़त (या मेरे) के ही आगोश में ही समां जाते हैं......
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गुरुवार, 24 दिसंबर 2009

To LoVe 2015: वैलंकानी गिरिजाघर

'प्रभु यीसु के जनमदिन 'की आप सभी को बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएँ.इसी पावन अवसर पर आज मैं आप को लिए चलती हूँ 'वैलंकानी 'जो तमिलनाडु राज्य में स्थित है.यहाँ दर्शन करेंगे प्रभु यीसु की जननी 'माता मेरी के जिन्हें 'Our lady of Good Health,'"Our Lady of Vailankanni" वैलंकानी माता भी कहा जाता है .तमिलनाडु के नागापट्टिनम क्षेत्र में वैलंकानी गिरिजाघर स्थित है।मानना है कि मदर मेरी की प्रतिमा यहाँ

बुधवार, 16 दिसंबर 2009

To LoVe 2015: जीए तेरे लिए....


चंद पंक्तिया जाने कहाँ से निकली...और कलम के रास्ते पन्नों पर उतर गई...और आज कीबोर्ड के सहारे ब्लॉग पर.....

मेरे दिल के टूटने की कसक उन्होंने सुनी नहीं
हँसतें हुए मेरे लबों को देख वो चहकती रहीं
मैं मुस्कराहट मैं ही दर्द अपना पीता रहा....

दर्द भले मेरा कभी वो समझे ही नहीं
आँखों मैं मेरे जो अश्क थे ठहरे हुए
ख़ुशी के आंसू समझ वो महक्तीं रही.....

दामन थाम किसी और का वो बढ़तीं रही
सुनके उनके ख्याल मैं ठिठकता रहा
वो मुझे ठहरा हुआ समझती रही.....

मैं उनकी मंजिल भले ही न रहा
पर राह के काँटों पर हाथ रखता रहा
दर्द हर बार उनका मैं बांटता रहा.......

वो हर चौराहे पर आकर भटक गई
पर भटकन को ही सफ़र समझती रही
अपने सपनों की मंजिल तलाशती रही......

मैं समझा कहीं दूर वो निकल गई
फिर मैं भी किस्सा बन फ़ना हो गया .....
दो गज नीचे चिर निद्रा में खो गया.....

पर वाह री किस्मत !
दफ़न था जहाँ मैं उसी राह वो
अपनी ख़ुशी तलाशती निकल पड़ी.....

कब्र के पत्थर को ही नींव समझ बेठी
वहीँ अपने सपनों का आशियाना बनाती रही
और मैं, देख उन्हें वहीँ चुपचाप पड़ा रहा........
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शनिवार, 5 दिसंबर 2009

To LoVe 2015: कोई लड़की हो तो बताना दोस्तों


अकेले है हम, तो दुसरो को क्यों है गम....?


किसी शायर ने क्या खूब कहा है "जिंदगी जिंदादिली का नाम है, मुर्दा दिल क्या ख़ाक जिया करते है"....यह एक शेर जिंदगी को ज़ीने का फलसफा बताने की लिए काफी है....आप सोच रहे होंगे की में यह शेर क्यो पढ़ रहा हूँ ...तो दोस्तों दरअसल इसी शेर को पढ़ कर हम यानि की सो कॉल्र्ड तुर्रमखान अब तक मस्त जीते आ रहे थे...मुस्कुराने की आदत डाले बैठे थे......अपनी जिंदगी मस्ती से कट  भी रही थी...अकेले जीने का मज़ा भी ले रहे थे...
लेकिन लोगो को ये रास नहीं आई....औऱ किसी हमारी मुस्कराहट को किसी कलमुंहे की नज़र लग लगी गई।
 
दोस्तों आप कितने भी मस्त क्यों न हो..आपकी जिंदगी कितनी ही मस्ती से क्यों न कट रही हो, पर कुछ लोगो को ये हज़म नही होती... 'अपन मस्त' वाला आपका अंदाज़ कई लोगो को रास नही आता....कहते हैं न कि दुनिया में कुछ लोग अपने दुःख से कम, दुसरों की खुशी से ज्यादा दुखी होते है...ये वो ही लोग होते हैं..
 
मगर इन कलमुंहें दुश्मन के अलावा आपके कुछ ऐसे शुभचिंतक भी होते है जो आपकी चंद खुशियों इत्तफाक नहीं रखते (ऐसे में दुश्मनों की जरूरत ही क्या है....)
 ये वो लोग होते हैं जिन्हें आप अपना कह सकते है.....जो आपके दुःख से दुखी होते है...आपकी खुशी से खुश होते है....पर आप सच मानो कभी-कभी इन्हें बर्दाश्त करना काफी मुश्किल हो जाता है...और आजकल ऐसे ही शुभचिंतकों ने मेरी चैन छीना हुआ है...आप भी सोच रहे होंगे कैसा पागल है? शुभचितंकों से परेशान है....पर सच यही है दोस्तों..अगर यही हाल रहा तो मुझे पागल होते देर नही लगेगी.....चलिए पहले मेरी मुसीबत सुन लीजिए..

आजकल शादी का टाइम चल रहा है.....और ये शादियाँ ही मेरी चैन की दुश्मन बनी हुई है....इन शादियों में मुझे थोक के भाव से रायचंद मिल रहे है....यही वो लोग हैं, जिन्होंने मेरी जिंदगी दूभर कर रखी है......शादियों में नाच गाने के बाद जब खाने का टाइम होता है, तो यह सभी रायचंद मिल कर हमे घेर लेते है...अब कोई एक हो या दो हों, तो हम इनसे निबटे....
भाई यह कहाँ की बहादुरी हुई कि मिलकर एक को घेर लो और लगो मारने तीर पे तीर ....
होता क्या है कि हाल चाल पूछते-पूछते लोग अगला सवाल रुपी अस्त्र बिना देर किए मारने लगते हैं...."भाई परिवार का क्या हालचाल है...हम कहते हैं कि सब ठीक है ...तो उनका जवाब होता ठीक है....और बीबी बच्चे? 
हम कहते हैं यार हम शादी शुदा नहीं हैं..तो लोग कहते हैं ओह तो आप परिवार के झंझट से मुक्त हैं..ये बात मेरा दिमाग घुमा देता है...हद है यार ..क्या माँ-बाप परिवार में नही आते ? .......
भाई मेरी समझ में तो परिवार का मतलब बीबी और बच्चे और माँ-बाप आते हैं....अगर छोटे भाई-बहिन हों तो वो भी ....
पर लगता है कि आजकल परिवार की भाषा में माँ-बाप नही आते......
खैर बात यहीं थम जाती तो भी गनीमत होती......
अब हर कोई कोई दार्शनिक अंदाज़ में (आखिर हम भारतीयों ने दार्शनिक होने का ठेका जो ले रखा है) कहता है की यार शादी कर डालो....जवानी तो कट जाएगी, बुढ़ापा नहीं कटेगा...( जैसे जवानी काटने के लिए मैं जीबी रोड के चक्कर काटता हूं या किसी कॉलगर्ल को बुलाता हूं )....अमां यार जिसकी शादी में आए हो उसे एन्जॉय करो और मुझे भी करने दो.....जब शादी होनी होगी या करनी होगी तो कर लेंगे....पर नहीं.....लगता है की जैसे सभी को मेरे अकेले होने का गम खाए जा रहा हो ।

    कभी तो लगता है की लोग ख़ुद दुखी हैं और मुझसे जलते हैं.... इन रायचन्दों में जो उम्र में बड़े हैं वो कहते हैं ..भाई हम तो आपको छोटा भाई समझते है....इसी लिए कहते है की शादी कर डालो सुखी रहोगे....महिला दोस्त होंगी तो कहेंगी यार अब शादी कर ले। इन सबके बाद शुरू होता है नसीहतो का दौर ...कहीं न कहीं तो समझौता करना ही पड़ता है....ऐसी जीवनसाथी पंसद करो..वैसी को कर लो......तुमपर कोई दवाब नहीं डालता..हर किसी को सब कुछ नही मिलता....(किसी को आसमान तो किसी को जमीन नहीं मिलता..वाले अंदाज़ में).....देखो जरूरी नही खूबसूरत लड़की हर किसी को मिल लाये....सूरत नहीं सीरत देखनी चहिये....वगैरह, वगैरह। बोलने का अंदाज ऐसा जैसे जो काम ख़ुद न कर सके या करके पछता रहे हों..वो हमें बता रहे हों..।


इन रायचंदों में ख़ुद तो कई लोगो ने सूरत देखकर शादी की थी और अब लगता है पछता रहे हैं..अबे ये पूछना कि कौन हैं ये लोग। अगर इनके नाम यहां लिख दिए तो इन महाश्यों औऱ मोहतरमाओं के घर में महाभारत छिड़ जानी है। ऐसे में अपनी हालत तो ऐसी है कि जिनसे नसीहत खाओ औऱ उनपर अहसान भी करो ..
हम चाहें या न चाहें...बातचीत जारी रहती है....और अगली नसीहत को फेंक-फेंक कर मारने का दौर जारी रहता है...
"देखो रोहित जरूरी नहीं की हर लड़की कमाने वाली ही हो....जरूरत होगी तो कमाने लगेगी... (नहीं कमाने पर जैसे मैं उसे फासीं दे दूंगा....हद है यार)
फिर लगे हाथ कमाने वाली लड़की का नुक्श भी बताने लगते हैं...
" जरुरी नहीं रोहित कि कमाने वाली लड़की घर संभाल ही सके"
लगता है की यहां भी मेरे बहाने अपना गम गलत कर रहे हो... अब बीबी से कुछ भी कहने की हिम्मत न रही हो। इनके हिसाब से तो जो बाकी लड़कियां घर भी संभाल रही हैं वो शायद दूसरे ग्रह से आती हैं।

   कई बार तो मन करता है की अपने बाल नोच लूँ, पर नोच नही सकता, सर पर वैसे ही बाल कम है...और दोस्तों के बाल तो नोच नही सकता...सिर वाले यार, (पता नहीं क्या-क्या सोचने लगते हो )......आखिर शादी के बाद यह रायचंद और इनकी बीबियाँ एक दुसरे के बाल नोच ही रहे हैं..।
(कुछ एक दम्पतियों को छोड़के....ही ही ही ही )

खैर अपन भी कम नहीं हैं....हमने भी एक ऐसा अस्त्र ढूंढ लिया है जिनसे कमोबेश सभी नि:श्स्त्र हो जाते हैं...। अब जैसे ही कोई प्रश्न का गोला दागता है हम भी पलटवार करने में देर नहीं लगाते....अपना अस्त्र फेंक मारते हैं...
....कोई लड़की है आपकी नज़र में......है तो बताना ..हमारा ये एक सवाल सबको ढेर कर देता है।
हाल ही में एक एक पत्रकार और एक डॉक्टर दोस्त (दोनो महिलाएं) पीछे पड़ गई.."
यार रोहित अब शादी कर डालो, हमें तुम्हारी चिंता होती है.....तो उन दोनो को एक नए सावल से निढाल करने में हमने देर नहीं लगाई..हमने पलट कर कहा...
"यार अगर तुमने लाइन दी होती, तो अब तक हमारे 4-5 बच्चे होते..."

तो दोस्तो इस तरह हम फिलहाल तो शादी के इस सीजन में हमलो से बचे हुए है...और उम्मीद है की आगे भी बचे रहेंगे ...
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रविवार, 29 नवंबर 2009

To LoVe 2015: चलिए श्री गणेश करते है.....


दोस्तों कैसे है आप......आखिर मेनें भी ब्लॉग की दुनिया में श्री गणेश करने का फ़ैसला कर ही लिया.....लंबे इंतज़ार के बाद ...आखिरकार ब्लॉग की दुनिया में आ ही गया हूँ ....कभी न कभी तो श्री गणेश करना ही होता है.... तो चलिए आज से ही सही....हर बार सोचता ही रहा की अगले हफ्ते शुरुआत करूँगा ... फिर लगता की अगले हफ्ते ....करते करते काफी साल गुजर गए ..पर नही किया..हर बार जब लिखने लगता तो लगता की स्टॉप से निकल चुकी चलती बस में  सवार हो रहा हूँ...कही बार सोचता  आखिर कहाँ से शुरुआत करूँ ... यही सोचता रहा .... लिखा तो डायरी में लिखा पर ब्लॉग पर नही आया...चलो कोई न...आज से ही सही.....ब्लॉग की इस दुनिया में हम भी आज से अपना सफर शुरू करते है...इस दुनिया में कई लोग है...बड़े बड़े नेता है, अभिनेता है.....सितारे है....उद्योगपति है.....बड़े बड़े पत्रकार है.....तो दोस्तों मैने भी आज से यहां हाजरी भरने का मन बना लिया है.....तो यह नाचीज़ (वैसे बड़ी उची चीज़ हूं.. कोई माने न माने अपन को कोई फर्क नहीं पड़ता)) भी आपके सामने हाज़िर है......ब्लॉग का सफर शुरू करता हुआ......यह बन्दा जो बोलेगा बिंदास बोलेगा.....या नही बोलेगा.....आप से भी गुजारिश है की आप भी कुछ कहना चाहें या न चाहें .....मन करे न करे....फिर भी कुछ जरूर कहना.....या लिख मारना..बुरा नही मानूंगा (अगर माना तो मिटा दूंगा....आपकी टिप्पणी)....खैर...आज से इस सफर में आप भी मेरे साथ जुड़ें  अच्छा लगेगा .....हमने आपस में काफी कुछ कहना होता है पर कह नही पाते ....तो ऐसे ही सब बातो को कहने का इरादा है अपना तो....उम्मीद है आप भी कुछ कहेंगे .......कई बार अपने आसपास देखती दुनिया को समझने का दावा करते है...दोस्तों हो सकता है अभी काफी कुछ कह न पा रहा हूँ पर हां जल्दी ही रवानगी आयेगी....पर हाँ ब्लॉग को कौन पसंद करेगा कौन नही इसकी परवाह नही करूँगा ...आखिर लाइफ में भी यही करता हूँ ....तो दोस्तों फिलहाल इज़ाज़त दीजिये ....दुबारा मिलने के लिए...
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To LoVe 2015: हरियाणा


हरियाणा
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हरियाणा के नाम का  अर्थ है " यह परमेश्वर का निवास " से हरि ( हिंदू देवता विष्णु ) और आयन ( घर )!
हरियाणा का इतिहास वैदिक काल से आरंभ होता है. यह राज्‍य पौराणिक भरत वंश की जन्‍मभूमि माना जाता है जिसके नाम पर इस देश का नाम भारत पड़ा. हमारे महान महाकाव्‍य महाभारत में हरियाणा की चर्चा हुई है.जैसा कि बहुत से लोग जानते हैं कि  कौरवों और पांडवों की युद्धभूमि  कुरूक्षेत्र

सोमवार, 28 सितंबर 2009

To LoVe 2015: 'पूरब का स्विजरलैंड--नागालैंड

केवल १ ,९८८ ,६३६ [२००१ की गणना के अनुसार]की जनसंख्या वाले पहाड़ी राज्य जिसकी राजधानी कोहिमा है ,आज चलते हैं उस राज्य की तरफ जिसका नाम है नागालैंड.इसे पूरब का स्विजरलैंड भी कहते हैं.पूर्व में म्‍यांमार, उत्‍तर में अरूणाचल प्रदेश, पश्चिम में असम और दक्षिण में मणिपुर से घिरा हुआ नागालैंड 1 दिसंबर, 1963 को भारतीय संघ का 16 वां राज्‍य बना था.इस राज्य में ११ जिले हैं.नागालैंड की प्रमुख जनजातियां है:

बुधवार, 23 सितंबर 2009

To LoVe 2015: गुलमर्ग -[कश्मीर]

कश्मीर भारत देश का अभिन्न अंग है.कश्मीर को धरती का स्वर्ग भी कहते हैं.प्राचीनकाल में कश्मीर हिन्दू और बौद्ध संस्कृतियों का पालना रहा है। माना जाता है कि यहाँ पर भगवान शिव की पत्नी देवी सती रहा करती थीं, और उस समय ये वादी पूरी पानी से ढकी हुई थी। यहाँ एक राक्षस नाग भी रहता था, जिसे वैदिक ऋषि कश्यप और देवी सती ने मिलकर हरा दिया और ज़्यादातर पानी वितस्ता (झेलम) नदी के रास्ते बहा दिया। इस तरह इस जगह

शुक्रवार, 18 सितंबर 2009

To LoVe 2015: दुनिया की दूसरी [?] और भारत की सबसे पुरानी पहली मस्जिद

[केरल mein hai दुनिया की दूसरी सबसे पुरानी[??] और भारत की सबसे पुरानी पहली मस्जिद - चेरमान जुमा मस्जिद.] केरल- 'God 's own country 'आज हम आप को जहाँ ले कर आये हैं वह भारत की दक्षिण पश्चिम सीमा पर स्थित है.जब हम यहाँ घूमने गए थे तब मुझे इस जगह ने बहुत प्रभावित किया -इस के ठोस कारण हैं एक-यह जगह इतनी हरीभरी है कि आप खुद को प्रकृति के बहुत नज़दीक पाएंगे.और इस स्थान को देव भूमि क्यूँ कहा जाता है समझ

रविवार, 6 सितंबर 2009

सब पर भारी बाजारवाद

आदरणीय सोमा जी
सादर
आपकी प्रतिक्रिया जान कर ख़ुशी हुई मेरा होंसला अफजाई का शुक्रिया. आपने एक साथ कई सवाल कर दिए जिनका एक साथ पत्र के माध्यम से उत्तर देना शायद एकदम संभव नहीं हो पर में संक्षिप्त में प्रयास करूँगा.
१ सामुदायिकता की भावना आदिवासी समाज में भी लगभग खत्म होने के चरण में चल रही है जो एक चुनोती है.
२ निजीकरण आज के समाज का अभिन्न अंग बन गया है क्योंकि सामुदायिक संसाधन और उस पर निर्भर सामुदायिक रूप के मानवश्रम की जरुरत अब कम होती जा रही है। क्योंकि कृषि खत्म हो रही वन उपज खत्म हो रही है और ये सब काम सामुदायिकता पर निर्भर है जो कम होते जा रहे है और पलायन बढ़ रहा है और रोजमर्रा की मजदूरी पर निर्भरता बढ़ रही है. संयुक्त परिवार की अवधारणा अब बीते कल की बाते हो गई है सभी रिश्तों पर पैसा भारी पड़ रहा है और पैसे से दुनिया में सब कुछ किया जा सकता है ये धारणा जोर पकड़ रही है इस कारण दुनिया में बाजार सबसे शक्तिमान बन गया है और दुनिया की सारी सत्ताएं उसके आगे कमजोर पड़ गई है इसी कारन व्यक्तिवाद बढ़ रहा है और सामुदायिकता खत्म हो रही है।

३ आदिवासी समाज की दुनिया सबसे ख़राब हालत है तो इसमें भी तुलना की जाये तो इस समाज की महिलाओं की हालत बदतर है। क्योंकि प्रय्तेक संकट और विपरीत हालत का असर महिलाओं पर सबसे ज्यादा पड़ता है और महिलाओं के पारिवारिक दायित्वों को निभाने के काम को अनुत्पादक माना जाता है जो आदिवासी समाज में ही नही सब समाजों में विद्यमान है इसके अलावा दुनिया में महिला सबसे सरल शिकार है जिसे आसानी से निशाना बनाया जा सकता है उसके बाद बच्चे आते है। इस दुनिया में हर शेत्र में तनाव बढ़ गया है और इसके कारण असफल होने पर आदमी अपनी ओरत पर खीज निकलता है क्योंकि सामुदायिक संसाधन खोने के कारण आर्थिक गुलामी बढ़ी है जिसका असर आय पर पड़ा है इसलिए आदमी बाजारवादी ताकतों और वयवस्था का तो कुछ नही बिगड़ सकता वो घर आ कर अपनी ओरत और उसके बाद भी गुस्सा नही उतरा तो बच्चों पर निकलता है ये एक आदमी के कमजोर और नाकाम होने की निशानी है।
४ अतिक्रमण की कई परिभाषा है गरीब आदमी करे तो अतिक्रमण और सरकार करे तो जनहित।
वन अधिकार कानून के क्रियान्वयन के दोरान हम महसूस कर रहे है की सामुदायिकता की भावना की क्या हालत हो गई है सभी लोग अपनी कब्जे की जमीन को पहले चाहते है इसका कारण यही है की सामुदायिकता समाज में केवल तीज त्योहारों और समारोहों तक ही सिमित हो कर रह गई है मुद्रा के संबंधो ने सामुदायिकता को खत्म कर दिया है और श्रम आधारित समाज को खत्म कर निक्क्मो की फोज इस व्यवस्था ने खड़ी कर दी है जो सब अपने अपने अलग अलग जहाँ को बसाने के चक्कर में लग गए है
मांगीलाल गुर्जर
जंगल जमीन जन आन्दोलन
उदयपुर/a>
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शुक्रवार, 4 सितंबर 2009

राजस्थान में आदिवासियों के लाल हो जाने का खतरा

एक हिन्दी समाचार देनिक में छपे समाचार और सम्पादकीय के अनुसार राजस्थान की खुपिया पुलिस ने राज्य सरकार को एक रिपोर्ट भेजी है जिसमे ये आशंका प्रकट की गई है की राजस्थान के आदिवासी इलाकों में अगर आदिवासियों की बुनियादी सुविधाओं में ढांचागत सुधार नही क्या गया और वन भूमि के मसलों को सही प्रकार से नही निपटा गया तो इस इलाके में नक्सली गतिविधियों के बढ़ने का खतरा हो जाएगा। खुपिया पुलिस ने इससे निपटने के लिए कुछ उपाय भी सुजाये है जिनमे सबसे प्रमुख इन इलाकों में ईमानदार और संवेदनशील अधिकारीयों और कर्मचारियों को लगाना है क्योंकि आदिवासी आज भी सरकारी कर्मचारियों को ही सरकार मानते है। यहाँ में टिपण्णी करना चाहूँगा की आज़ादी के ६३ साल बाद भी अगर देश की दूरदराज इलाकों में रहने वाली जनता कर्मचारियों को ही सरकार माने तो इससे बढ़ के इस देश को चलाने वालों के लिए शर्म की बात नही हो सकती की आज भी आदिवासी लोग लोकतंत्र क्या है इसको जान ही नही पाए है तो ऐसे हालात में अगर कुछ लाल तत्व इन आदिवासी इलाकों में आ जाए तो क्या बड़ी बात होगी।
रिपोर्ट में जंगल जमीन जन आन्दोलन जेसे आन्दोलन जो आदिवासियों के पारम्परिक वन अधिकारों की मान्यता वन अधिकार मान्यता कानून के प्रावधानों के अनुसार कानून की इन इलाकों में पालना कराने के लिए प्रयास कर रहे है जो पुरी तरह से संवेधानिक मांग है और आन्दोलन का तरीका भी। पर इस कानून की पालना में जहाँ राज्य सरकार तो दोषी है ही वंही वन विभाग भी उतना ही दोषी है क्योंकि वन विभाग ने आदिवासियों के वनों पर पारम्परिक वन अधिकारों को उनके संकीर्ण स्वार्थ जो दारू मुर्गे और हर फसल पर आदिवासियों से प्राप्त होने वाली रिश्वत है तथा आदिवासी की वो खटिया है जिस पर वन विभाग के कर्मचारी ब्रिटिश सरकार के बनाये वन कानूनों के बनने के बाद से पिछले १४५ सालों से आराम फरमा रहे है। इन्ही कारणों से पुरी तरह से नकार दिया है और सेंकडों सालों से वनों में निवास कर रहे और वनों पर निर्भर रहने वाले आदिवासियों की फसलों को उजाडा है और उनको गैरकानूनी तरीकों से बेदखल किया है जो आने वाले समय में आदिवासियों के उत्तेजित होने और उनमे सरकार के खिलाफ असंतोष पनपने का कारण बन सकता है। यहाँ में ये भी स्पस्ट करना चाहूँगा की जेसा की रिपोर्ट में बताया गया है की आदिवासी आज भी अधिकारीयों और कर्मचारियों को ही सरकार मानते है इससे यही स्पस्ट है की आदिवासियों का असंतोष सरकार के खिलाफ नही हो कर के उन संवेदनहीन बेईमान और रिश्वतखोर अधिकारीयों और कर्मचारियों है क्योंकि उनके लिए वही सरकार है। इसलिए इस प्रकार के कर्मचारियों को हटाना सरकार की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए ताकि जनता को लाल होने से बचाया जा सके।
जंगल जमीन जन आन्दोलन पिछले १५ साल से आदिवासियों की वनों से जुड़े अधिकारों के मांग को उठाता आया है और पुरी तरह से शांतिपूर्ण आन्दोलन रहा है तथा अपनी गैर राजनेतिक छवि के लिए विख्यात है।
लेकिन सरकार के ही कर्मचारियों के निक्कमेपन के कारण जनता लाल, पिली, नीली और या हरी हो जाए तो इसमे सामाजिक सरोकार रखने वाले शांतिपसंद संविधान के प्रति निष्ठावान लोग भी क्या करे।

मांगीलाल गुर्जर
उदयपुर/a>
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उदयपुर में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना को ले कर आन्दोलन

राजस्थान के उदयपुर जिले में हाई कोर्ट बेंच की मांग पिछले २८ सालों से की जा रही है। इस मांग को लेकर वर्तमान में चल रहा आन्दोलन अपने दो माह पुरे कर चुका है और ४ सितम्बर को सभी राजनेतिक दलों और संगठनो की और से एक सामूहिक रेली की गई इसमे उदयपुर के आदिवासियों ने बढ़ चढ़ कर भाग लिया। उल्लेखनीय है की उदयपुर संभाग आदिवासी इलाका है और इस इलाके में मानवाधिकारों के हनन की खबरें आम है और अधिकांश गरीब और आदिवासी लोग धन और पहुँच के अभाव में है कोर्ट जो जोधपुर में है नही जा सकते परिणाम में उनको अपील के अभाव में सजा काटनी पड़ती है। लोकतंत्र में जन कल्याणकारी सरकारों का ये फ़र्ज़ बनता है की वो आम जनता को सस्ता और सुलभ न्याय दिलवाने की व्यवस्था करे पर जोधपुर है कोर्ट के वकीलों के दबाव में राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जो जोधपुर से ही आते है वे उदयपुर की इस जायज मांग को ठुकरा चुके है। साथ ही उदयपुर में आई आई टी खोलने के लिए केन्द्र सरकार ने निर्णय लिया था उसे भी नजरंदाज कर आई आई टी को भी जोधपुर में ही खोलने का निर्णय ले लिया है जो ये दर्शाता है की वे पुरे राज्य के नेता नही हो कर केवल जोधपुर के ही नेता बन गए है। श्री गहलोत ने क्षेत्रवाद की सभी सीमाओं को लांग कर उदयपुर में पेयजल की यौजना जो देवास योजना के नाम से जानी जाती है उसके बजट में भी कटोती कर दी है। याद रहे की अन्य पार्टियों की सहायता से चल रही गहलोत सरकार को उदयपुर संभाग ने सबसे ज्यादा विधायक दिए है इसके बावजूद भी उदयपुर संभाग के विकास को इस सरकार ने ठप्प कर दिया है।/a>
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बुधवार, 2 सितंबर 2009

To LoVe 2015: हम रुपया नही खा सकते

राज्य की भूमिका भले ही संसाधनों के प्रबधन और वितरण में उसका ये कह कर रही हो की उसने अपनी भूमिका को बखूबी निभाया है पर आज जो वैश्विक परिस्थतियाँ सामने है उससे लगता है राज्य प्राकतिक संसाधनों को समग्र समुदाय के लिए सहेजने में लगभग विफल रहा है। भारत में पिछले कुछ सालों से प्राकतिक संसाधनों से समुदाय का नियंत्रण खोता जा रहा है और इन संसाधनों को बड़े ओधोगिक प्रतिष्ठान और कम्पनियां इनका व्यवसायिक उपयोग करने की सारी सीमाएं पार कर चुकी है और इनका मकसद इन संसाधनों को कागज की मुद्रा में परिवर्तित करने में लग गया है। जैसे पानी को बेच कर रुपया कमाया जा रहा है। पत्थर को बेच कर, लकड़ी को बेच कर, जमीन को बेच कर यानि हर प्रकति की दी हुई अनमोल धरोहर को बेच कर इन सबको कागज के रूपये में बदला जा रहा है।
क्या हम इन सब प्राकतिक संसाधनों को रूपये में बदलने के बाद जब एक समय बाद ये सभी संसाधन ख़त्म हो जाएँगे तब हम क्या खायेंगे कैसे और कहाँ रहेंगे अगर इन सबका विकल्प नही है तो इन सब प्राकतिक संसाधनों को कागज के रूपये में बदलने का क्या लाभ।
मांगीलाल गुर्जर
उदयपुर/a>
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मंगलवार, 1 सितंबर 2009

बेदखली के खिलाफ आदिवासियों का वन विभाग और पुलिस के खिलाफ जंगी प्रदर्शन अधिकारी दफ्तर छोड़ भागे

बेदखली के खिलाफ आदिवासियों का वन विभाग और पुलिस के खिलाफ जंगी प्रदर्शन अधिकारी दफ्तर छोड़ भागे राजस्थान के राजसमन्द जिले की कुम्भलगढ़ तहसील के सिया गाँव में वन विभाग द्वारा पिछली २१ अगस्त को कुछ सवर्ण जाती के लोंगो को साथ ले कर कई पीढियों से वन भूमि पर काबिज १३ आदिवासियों की मक्का की फसलें नस्ट कर दी और एक झोंपडा तोड़ दिया। इन आदिवासिओं ने वन अधिकार मान्यता कानून के तहत अपने दावे भी पेश कर रखे थे इसके बावजूद भी वन विभाग ने कुछ दबंगों और पुलिस के साथ मिल कर ये कह कर फसलें नस्ट कर दी की इन लोंगो ने नया कब्जा किया है जबकि इन अदिवासियों के पास सन २००२ के वन विभाग के नोटिस है और ये नोटिस भी सन २००२ में इसलिए आना शुरू हुऐ क्योंकि इससे पहले ये जमीन राजस्व विभाग की थी पर वन विभाग ने ले ली थी.सन २००२ से इन अदिवासियों के दावा पेश करने तक तो वन विभाग और गाँव के दबंग लोंगो ने इन अदिवासियों को कुछ नहीं कहा पर दावा पेश करने के बाद इनको ऐसा लगा की इन आदिवासियों को जमीन मिल जायेगी तो इनको बेदखल करने की योजना बनाई और २१ अगस्त २००९ को इनके साथ ये अमानवीय तरीका अपना कर इनके साथ मारपीट कर फसलें बर्बाद कर दी और एक झोंपडा तोड़ दिया.जब ये आदिवासी अपने साथ हुए अन्याय की पुलिस में ऍफ़ आई आर दर्ज कराने गए तो पुलिस ने इनकी तो ऍफ़ आई आर दर्ज नहीं की उल्टे इस क्षेत्र में काम करने वाले जरगा समिति नाम के संगठन के एक सक्रिय कार्यकर्त्ता और कुछ आदिवासियों के खिलाफ रास्ट्रीय सम्पति को नुकसान पहुँचाने और राज कार्य में बाधा डालने का मुकदमा दर्ज कर दिया. इस अन्याय के खिलाफ २५ अगस्त २००९ को सेंकडो की तादात में आदिवासी केलवाडा पहुंचे और वन विभाग के बाहर नारेबाजी करने लगे आदिवासियों का आक्रोश देख सभी वन अधिकारी वहा से भाग गए तब सभी लोग पुलिस थाणे पहुंचे और पुलिस से कहा की जब तक दोषी वन विभाग और लोंगो के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं होगा तब तक वे यहाँ से नहीं उठेंगे थाणे में पुलिस के खिलाफ भी दोहर्रे बर्ताव के खिलाफ नारे लगाए आखिरकार पुलिस के इस आश्वासन के बाद ही लोग उठे की उनकी रिपोर्ट भी दर्ज की जायेगी. इसके बाद लोग उपखंड अधिकारी के पास गए और वहां एस डी ओ के नहीं होने पर तहसीलदार को मांग पत्र दिया गया की अगर १० दिन में कोई कार्यवाही नहीं की गई तो बेमियादी पड़ाव डाल दिया जायेगा.
मांगीलाल गुर्जर/a>
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राजस्थान में वन अधिकार कानून वन विभाग के कब्जे में.

राजस्थान में वन अधिकार कानून वन विभाग के कब्जे में।राजस्थान में वन अधिकार कानून के प्रावधानों की धज्जियाँ जिस प्रकार वन विभाग और सरकारी कर्मचारियों ने उडाई है उसका उदहारण ढूंढे नहीं मिलता.१. वन अधिकार कानून के अनुसार वन भमि पर १३ दिसम्बर २००५ के पहले से कौन लोग काबिज है इसकी सूचि बनाने का अधिकार ग्रामसभा को होता है पर वन विभाग अपनी बनाई सूचि को ही अधिकृत मान रहा है और उन्ही दावों का सत्यापन कर रहा है जिनके नाम् उसकी सूचि से मेल खाते हो.२. दावेदारों की वास्तविक कब्जे की भूमि से कम भूमि का सत्यापन कर रहा है यानि अगर दावेदार ने १० बीघा भूमि का दावा किया है तो उसको अधिकार पत्र केवल १ या २ बीघा भूमि का ही दिया जा रहा है.३. वन विभाग १९८० के पूर्व के दावो का ही भोतिक सत्यापन कर रहा है और सामुदायिक वन अधिकार के दावों को वह न तो स्वीकार कर रहा है और अगर गाँव वाले दावा कर भी रहे है तो उनका सत्यापन करने से आनाकानी कर रहा है.४. अन्य परंपरागत जंगल वासियों के दावों को तो स्वीकार करने की प्रक्रिया ही नहीं शुरू की गई है.५. किसी भी दावेदार को उसके दावे की प्राप्ति की रसीद नहीं दी जा रही है और न ही किसी भी दावेदार को उसके दावा निरस्त होने की सुचना दी जा रही है. ६. राज्य सरकार ने दावों के निस्तारण के लिए पंचायतवार शिविर लगाये पर राज्य में आदिवासी इलाके में राजस्व गाँव स्तर पर वन अधिकार समिति बनी होने के कारण सभी शिविर असफल हो गए और दावो का निस्तारण ही नहीं हो सका क्योंकि दावों का निस्तारण तो तभी हो सकता था जब वन अधिकार समितियों ने उनका सत्यापन कर लिया होता. इन शिविरों में वन अधिकार समितियों के सदस्य और पदाधिकारी भी नहीं पहुंचे क्योंकि इन शिविरों की सुचना भी सरकार की और से प्रसारित नहीं की गई.७. अधिकांश वन अधिकार समितियां काम ही नहीं कर रही है क्योंकि उनको ये भी पता नहीं है की सत्यापन कैसे किया जाये इसका परिणाम ये हो रहा है की वन विभाग के कहे अनुसारसारी कार्यवाही चल रही है जो किसी भी सूरत में दावेदारों के लिए लाभकारी नहीं सिद्ध हो रही है. ८. जिन ग्रामसभाओं में आदिवासी संख्या में कम है वहां उनके दावे ही स्वीकार नहीं किये जा रहे है.९. राज्य स्तरीय निगरानी समिति के सदस्यों को कोई नहीं जनता और आज दिन तक निगरानी समिति ने किसी भी गाँव का दौरा करके वास्तविकता जानने का कोई प्रयास ही नहीं किया है.१०. इन सब कारणों से आज जो स्थिति बन गई है वो इस प्रकार नजर आ रही है की अब तक पुरे राज्य में सरकारी आंकडों के अनुसार ५३ हजार दावे पेश किये जा चुके है पर इसकी तुलना में केवल २८०० अधिकार पत्र ही जारी हुए है वो भी वास्तविक भूमि से कम भूमि के और इन पिछले कुछ दिनों में दक्षिणी राजस्थान में ही ५० से ज्यादा आदिवासी परिवारों की फसलें वन विभाग ने नया कब्जा बता कर बर्बाद की है जबकि इन लोंगो के पास न केवल पर्याप्त सबूत है बल्कि इन्होने अपने दावे भी पेश कर रखे है और इन में से कुछ के दावे तो उपखंड समिति तक पहुँच चुके होने के बावजूद इनकी फसलें नस्ट की गई वन विभाग रात दिन इसी प्रयास में लगा हुआ है की किसी न किसी प्रकार इन लोंगो के दावे ग्रामसभा में ही नहीं पहुँच सके.जंगल जमीन जन आन्दोलन ने इन दिनों में इन सब गैरकानूनी गतिविधियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर धरना प्रदर्शन और रास्ते जाम किये है
दी गुर्जर/a>
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बुधवार, 26 अगस्त 2009

To LoVe 2015: दंतवाडा-‘छत्तीसगढ़'

'छत्तीसगढ़' ---यही वह राज्य है जहाँ से मैं समझती हूँ आज की तारीख में सब से अधिक हिंदी ब्लॉगर हैं. इस राज्य के बारे में जो कुछ भी यहाँ लिख रही हूँ उसमें अगर कहीं कोई त्रुटी दिखाई दे तो कृपया मुझे सूचित करीए.छत्तीसगढ़ -जैसा की नाम ही इशारा करता है यह क्षेत्र ३६ गढ़ों का समूह रहा होगा इस लिए इस का नाम छत्तीसगढ़ पड़ा.पौराणिक इतिहास-कहते हैं कि राजा दशरथ की पत्नी कौशल्या के नाम पर इस क्षेत्र

मंगलवार, 18 अगस्त 2009

To LoVe 2015: त्रिपुरा

त्रिपुराप्रकृति प्रेमियों के लिए बेहद आकर्षक पर्यटक स्थल है त्रिपुरा!भौगोलिक क्षेत्र 10,49,169 हेक्‍टेयर और 27,57,205 [ 1991 Census के अनुसार ] जनसँख्या वाला यह राज्य भारत का दूसरा सब से छोटा राज्य है.सुदूर उत्तर पूर्व में स्थित ७ राज्यों में से एक राज्य है.इस छोटे से राज्य उत्तरी,दक्षिणी,और पश्चिमी सीमायें बंगला देश की सीमा से जुडी हैं.इस कि पूर्वी सीमा भारत के मिजोरम और आसाम राज्यों की सीमा से

गुरुवार, 13 अगस्त 2009

To LoVe 2015: मणिपुर और श्री श्री गोविंदाजी मंदिर

'जन्‍माष्‍टमी की बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएं'
मणिपुर
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आईये चलें एक नए राज्य की सैर पर..यह राज्य है मणिपुर.
यह राज्य भारत के पूर्वी सिरे पर स्थित है.इसके पूर्व में म्‍यांमार (बर्मा) और उत्तर में नागालैंड राज्‍य हैं , इसके पश्चिम में असम राज्‍य और दक्षिण में मिजोरम राज्‍य और म्‍यामांर हैं.कुल क्षेत्रफल 22,327 वर्ग किलो मीटर है.
इस राज्य में ९ जिले हैं.
राजधानी इम्फाल’ है.भाषा

सोमवार, 10 अगस्त 2009

To LoVe 2015: नंदी हिल्स [कर्णाटक]

नंदी हिल्स [कर्णाटक] चलते हैं एक ठंडे पहाडी स्थान पर,जिसे नंदी हिल्स के नाम से ख्याति प्राप्त है.यह स्थान कर्नाटक राज्य में है और यह कर्णाटक राज्य भारत के दक्षिण राज्यों में से एक है . इस राज्य की स्थापना १९५६ में हुई थी,इस का नाम मैसूर स्टेट था जिसे बदल कर १९७३ में कर्णाटक कर दिया गया.इस के पश्चिम तट को अरब सागर छूता है .गोवा,तमिलनाडु,केरला,आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र इस के पडोसी राज्य

गुरुवार, 6 अगस्त 2009

To LoVe 2015: 'पंजाब--अमृतसर-स्वर्ण मंदिर'

‘पंजाब -' Smiling soul of India'.'भारत के उत्तरपश्चिम में पंजाब राज्य है ,जिसके पश्चिम में पाकिस्तान और उत्तर में जम्मू और कश्मीर राज्य ,उत्तरपूर्व में हिमाचल प्रदेश तथा दक्षिण में हरयाणा और राजस्थान राज्य हैं.यह सभी जानते हैं कि 'पंजाब', फारसी शब्द 'पंज'= पांच और 'आब' =पानी के मेल से बना है जिसका शाब्दिक अर्थ 'पांच नदियों का क्षेत्र' है. ये पांच नदियां मानी गयी हैं: सतलुज, व्यास, रावी,

मंगलवार, 4 अगस्त 2009

To LoVe 2015: चंडीगढ़-- 'रॉक गार्डन'




चंडीगढ़-भारत देश में चंडीगढ़ एकमात्र एक ऐसा शहर[union territory] है जो दो राज्यों की राजधानी है.एक राज्य पंजाब है,दूसरा हरयाणा [ज्ञात हो कि-हरयाणा नया राज्य १९६६ में ,पूर्वी पंजाब के हिस्से से बना था.

“The seed of Chandigarh is well sown. It is for the citizens to see that the tree flourishes”.-Mon Le Corbusier[Architect of Chandigarh]
'Open hand Monument ' की तस्वीर. जो की चंडीगढ़ की

रविवार, 2 अगस्त 2009

To LoVe 2015: सोमनाथ मंदिर--गुजरात






'गुजरात 'भारत देश के पश्चिम में एक राज्य है .इस के पडोसी राज्य हैं महाराष्ट्र ,राजस्थान,मध्य प्रदेश,दादरा एवं नगर-हवेली.इसकी उत्तरी-पश्चिमी सीमा पकिस्तान देश से लगी हुई है.इसकी पश्चिम-दक्षिणी सीमा को अरब सागर[सिन्धु सागर]छूता है.१९४७ में स्वतंत्रता के बाद बने 'बॉम्बे स्टेट' में मराठियों के प्रथक राज्य की मांग के कारण,भाषा के आधार पर ' बाम्बे स्टेट के उत्तरी भाग 'को अलग कर १ मई १९६० में '

To LoVe 2015: लाल बाग़ महल - इंदौर -'मध्य प्रदेश'


आज हम शहर इंदौर की तरफ़ चलते हैं. आशा है कि यह प्रयास आपको अच्छा लग रहा होगा.
आपकी राय हमें इस दिशा मे और बेहतर करने का संबल प्रदान करेगी.आशा करती हूं कि आप अपनी अमूल्य राय देकर हमारा मार्ग दर्शन करेंगे.
भारत देश के मध्य में बसा है राज्य 'मध्य प्रदेश'. अभी चंद साल पहले ही इसी राज्य के विभाजन से एक नये राज्य "छत्तीसगढ" [1 नवंबर, 2000 को] ka गठन हुआ है. आर्थिक दृष्टि से इंदौर 'मध्य प्रदेश की

मंगलवार, 28 जुलाई 2009

To LoVe 2015: रोहतांग पास-[ हिमाचल प्रदेश]

हिमाचल प्रदेश के बारे में मैं ने आप को पिछली पोस्ट में बताया था.मनाली की सैर कर रहे हैं तो रोहतांग पास भी जरुर देखें.आईये जाने इस जगह के बारे में विस्तार से-:रोहतांग दर्रा--भारत देश के हिमाचल प्रदेश में 13,050 फीट/समुद्री तल से 4111 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है 'रोहतांग दर्रा 'हिमालय का एक प्रमुख दर्रा है.रोहतांग इस जगह का नया नाम है.पुराना नाम है-'भृगु-तुंग'!यह दर्रा मौसम में अचानक अत्यधिक बदलावों

गुरुवार, 23 जुलाई 2009

To LoVe 2015: मनाली-[हिमाचल प्रदेश]

भारत के उत्तर-पश्चिम में स्थित एक राज्य है--'हिमाचल प्रदेश'-हिमाचल प्रदेश का शाब्दिक अर्थ बर्फ़ीले पहाड़ों का प्रांत है. उत्तर में जम्मू कश्मीर, पश्चिम तथा दक्षिण-पश्चिम में पंजाब, दक्षिण में हरियाणा एवं उत्तर प्रदेश, दक्षिण-पूर्व में उत्तराखण्ड तथा पूर्व में तिब्बत से घिरा हुआ है. इस प्रदेश को देव भूमि भी कहते हैं. यहाँ की राजधानी शिमला है.जिसके बारे में हम कभी और आप से पूछेंगे. इस के अलावा यहाँ

मंगलवार, 21 जुलाई 2009

To LoVe 2015: माऊंट आबू- [राजस्थान]

आईये आपको आज राजस्थान के एक बहुत ही खूबसूरत हिल स्टेशन माऊंट आबू के बारे मे जानकारी देते हैं.'माउंट आबू,' जिला सिरोही में है जानिए इस जिले सिरोही के बारे में-सिरोही राजस्थान का पर्वतीय एवं सीमावर्ती जिला हैं। सुप्रसिद्ध इतिहासकार कर्नल टॉड के अनुसार सिरोही नगर का मूल नाम शिवपुरी था। १४०५ में राव शोभा जी ने शिवपुरी शहर को बसाया था. प्रदेश का एकमात्र पर्वतीय स्थल माउन्ट आबू इस जिले में हैं।यह

रविवार, 19 जुलाई 2009

To LoVe 2015: बड़ा इमामबाड़ा-[ लखनऊ]-उत्तर प्रदेश

भारत के उत्तर में जनसँख्या की हिसाब से सब से बड़ा प्रदेश है उत्तर प्रदेश.उत्तर प्रदेश का ज्ञात इतिहास लगभग ४००० वर्ष पुराना है,जब आर्यों ने अपना पहला कदम इस जगह पर रखा तब वेदिक सभ्यता का उत्तर प्रदेश मे जन्म हुआ.इन्ही आर्यों के नाम पर भारत देश का नाम आर्यावर्त या भारतवर्ष पड़ा था.[भरत आर्यों के एक प्रमुख राजा थे].मथुरा शहर में जन्मे थे भगवान कृष्ण और भगवान राम" का प्राचीन राज्य कौशल इसी

बुधवार, 15 जुलाई 2009

To LoVe 2015: नालंदा विश्वविद्यालय-[बिहार]

बिहार का ऐतिहासिक नाम मगध है,बिहार का नाम 'बौद्ध विहारों'शब्द का विकृत रूप माना जाता है,इस की राजधानी पटना है जिसका पुराना नाम पाटलीपुत्र था.इस के उत्तर में नेपाल, पूर्व में पश्चिम बंगाल, पश्चिम में उत्तर प्रदेश और दक्षिण में झारखन्ड है.इस राज्य की अधिकारिक साईट के अनुसार बिहार में ३८ जिले हैं.गंगा नदी यहाँ से गुजरती है.इस साईट में दिए विवरण के आधार पर भगवान राम की पत्नी देवी सीता यहीं की

रविवार, 12 जुलाई 2009

To LoVe 2015: नैनीताल-[उत्तराखंड ]

एक गीत सुना है -'तालों में ताल 'नैनीताल 'बाकि सब तलैय्या!' नैनीताल के प्रसिद्द कवि श्री बल्ली सिंह चीमा के शब्दों में- यहां पल में वहां कब किस पे बरसें क्या खबर , बदलियां भी हैं फरेबी यार नैनीताल की ताल तल्ली हो कि मल्ली चहकती है हर जगह, मुस्कराती और लजाती शाम नैनीताल की है 'भारत के उत्तराखंड राज्य में नैनीताल जिला है. यह 'छखाता' /षष्टिखात' परगने में आता है। 'षष्टिखात' का अर्थ है कि इस क्षेत्र

बुधवार, 1 जुलाई 2009

To LoVe 2015: अंडमान -निकोबार

आप को लिए चलते हैं दूर...भारत के केन्द्र शासित प्रदेश में जो लगभग छोटे बडे ५७२ द्वीपों का एक समूह है और उत्तर से दक्षिण की ओर विस्तार में लगभग 800 किलोमीटर की दूरी में फैला है -जी हाँ ,यह है अंडमान और निकोबार द्वीप समूह.हिंद महासागर में स्थित इस द्वीप का नाम भगवान् हनुमान के नाम का परिवर्तित रूप है.[क्योंकि अंदमान मलय भाषा के हन्दुमान शब्द से आया माना जाता है].इस प्रदेश की राजधानी पोर्ट ब्लयेर